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कॉप30: जलवायु संकट, एक स्वास्थ्य संकट है, WHO की चेतावनी

 - World News in Hindi

जलवायु परिवर्तन, एक वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थिति को हवा दे रहा है और अत्यधिक गर्मी की वजह से हर वर्ष, पाँच लाख से अधिक लोगों की मौत हो रही है. ब्राज़ील के बेलेम शहर में वार्षिक यूएन जलवायु सम्मेलन (कॉप30) में जारी एक नई रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि जलवायु चुनौती से, विश्व भर में अस्पतालों के लिए एक नया जोखिम उत्पन्न हो गया है. यूएन स्वास्थ्य संगठन (WHO) और ब्राज़ील की सरकार ने संयुक्त रूप से इस अध्ययन को तैयार किया है, जिसमें जलवायु परिवर्तन से स्वास्थ्य पर होने वाले के प्रभावों की पड़ताल की गई है.रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि हर 12 में से एक अस्पताल में जलवायु सम्बन्धी कारणों से कामकाज ठप हो सकता है. और इसलिए तेज़ी से गर्माती दुनिया में स्वास्थ्य प्रणालियों की रक्षा की जानी होगी.इससे पहले, गुरूवार को ‘बेलेम स्वास्थ्य कार्रवाई योजना’ पेश की गई थी, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य देखभाल को जलवायु नीति के केन्द्र में रखना है. Tweet URL

यूएन एजेंसी के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा कि जलवायु संकट, एक स्वास्थ्य संकट है. सुदूर भविष्य में नहीं, बल्कि यहाँ ऐसा अभी हो चुका है.इस रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन की वजह से आम लोगों व स्वास्थ्य प्रणालियों पर होने वाले असर के बारे में साक्ष्य दिए गए हैं, और ऐसे कारगर उदाहरण प्रस्तुत किए गए हैं, जिन्हें देश अपना सकते हैं.यह क्यों मायने रखता हैवैश्विक तापमान पहले ही 1.5°C की सीमा से ऊपर पहुँच चुके हैं. अध्ययन के अनुसार, 3.3 से 3.6 अरब लोग ऐसे इलाक़ों में रहते हैं, जोकि जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से सम्वेदनशील हैं.1990 की तुलना में चरम मौसम घटनाओं से किसी अस्पताल को क्षति पहुँचने का जोखिम 41 प्रतिशत तक बढ़ चुका है.कार्बन उत्सर्जन में विशाल कटौती लाए बिना, जोखिमों का सामना कर रही स्वास्थ्य प्रणालियों की संख्या, इस सदी के मध्य तक दोगुनी हो सकती है. स्वास्थ्य सैक्टर, 5 प्रतिशत ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए ज़िम्मेदार है और इसलिए निम्न-कार्बन, जलवायु सहनसक्षम व्यवस्थाओं पर बल दिया गया है.रिपोर्ट में चिन्ता जताई गई है कि स्वास्थ्य मोर्चे पर अनुकूलन योजना में अभी कई कमियाँ हैं.”केवल 54 प्रतिशत राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुकूलन योजनाओं में स्वास्थ्य केन्द्रों पर मंडराते जोखिमों का आकलन किया गया है30 प्रतिशत से कम योजनाओं में आय विसंगतियों का ध्यान रखा गया है20 प्रतिशत में लैंगिक आवश्यकताओं पर विचार किया गया है1 प्रतिशत के कम योजनाओं में विकलांगजन भी उनका हिस्सा हैं2015 से 2023 के दौरान, विविध प्रकार के जोखिमों से बचाव के लिए समय पूर्व चेतावनी प्रणाली वाले देशों की संख्या दोगुनी हो गई है, लेकिन कवरेज असमान है. विशेष रूप से सबसे कम विकसित देशों और लघु द्वीपीय देशों में.क्या क़दम उठाए जा रहे हैं35 से अधिक परोपकारी संगठनों ने शुक्रवार को 30 करोड़ डॉलर धनराशि का संकल्प लिया है ताकि जलवायु व स्वास्थ्य के मोर्चे पर समाधानों में तेज़ी लाई जा सके.इस पहल में ब्लूमबर्ग फ़िलेनथ्रोपी, गेट्स फ़ाउंडेशन, रॉकेफ़ेलर फ़ाउंडेशन और इकेया जैसे संगठनों का समर्थन प्राप्त है. इसके ज़रिए, अत्यधिक गर्मी, वायु प्रदूषण और जलवायु के प्रति सम्वेदनशील बीमारियों पर नवाचारी समाधानों, नीतियों व शोध को समर्थन दिया जाएगा. साथ ही, स्वास्थ्य प्रणालियों व डेटा एकीकरण के प्रयास किए जाएंगे. © UNFCCC/Kiara Worth ब्राज़ील के बेलम में कॉप30 सम्मलेन में स्वास्थ्य योजना को पेश किया गया. अनुकूलन उपाय जल्द अपनाने होंगेयूएन न्यूज़ ने स्वास्थ्य पर कॉप30 विशेष दूत इथेल मेसियल से बात की है, जिन्होंने बेलेम स्वास्थ्य कार्रवाई योजना में अहम भूमिका निभाई है.उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन का स्वास्थ्य प्रणालियों पर असर दिखाई देने लगा है. इसलिए यह ज़रूरी है कि हम अपनी स्वास्थ्य इकाईयों, अस्पतालों को इन चरम मौसम घटनाओं के लिए तैयार करें, जिनकी आवृत्ति बढ़ती जा रही है.इथेल मेसियल ने बताया कि जलवायु और स्वास्थ्य डेटा को एकीकृत किया जाना होगा. इससे गर्मी की वजह से स्वास्थ्य आवश्कताओं में आने वाले उछाल का अनुमान लगाया जा सकेगा. साथ ही, स्वास्थ्यकर्मियों की ट्रेनिंग और उनकी क्षमता-निर्माण भी ज़रूरी है ताकि वे गर्मी की वजह से होने वाली पानी की कमी या हृदय पर दबाव जैसी स्थिति का उपचार कर सकें.ताप-प्रतिरोधी दवाओं और वैक्सीन को विकसित करने के लिए शोध करना होगा, स्वास्थ्य आपूर्ति श्रृंखला में प्रदूषण को हटाना होग और नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को प्रोत्साहन देना होगा.

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