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बांग्लादेश: मानवता के विरुद्ध अपराध मामलों में निर्णय, ‘भुक्तभोगियों के लिए अहम क्षण’

 - World News in Hindi

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना और पूर्व गृहमंत्री को ढाका में अन्तरराष्ट्रीय अपराध ट्राइब्यूनल ने मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए दोषी क़रार देते हुए मौत की सज़ा सुनाई है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने इस निर्णय को, 2024 में भड़के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई दमनात्मक कार्रवाई और मानवाधिकार हनन के भुक्तभोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण क़रार दिया है, मगर मृत्युदंड थोपे जाने पर खेद व्यक्त करते हुए, निष्पक्ष अदालती प्रक्रिया के अन्तरराष्ट्रीय मानकों की अहमियत पर भी बल दिया है. बांग्लादेश में सरकारी रोज़गारों में आरक्षण कोटा निर्धारित किए जाने के विरोध में, जुलाई-अगस्त 2024 में विश्वविद्यालय परिसरों में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे थे. इस आन्दोलन के दौरान सुरक्षाकर्मियों पर दमनात्मक बल प्रयोग और मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन किए जाने के आरोप लगे थे, जिनमें सैकड़ों लोग मारे गए थे व हज़ारों अन्य घायल हुए थे.इन परिस्थितियों में, तत्कालीन सरकार की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को इस्तीफ़ा देना पड़ा था और उन्होंने बांग्लादेश छोड़कर भारत में शरण ली थी. इसके बाद, एक अन्तरिम सरकार का गठन हुआ है, और देश फ़िलहाल एक संक्रमण के दौर से गुज़र रहा है. Tweet URL

बांग्लादेश के अन्तरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने सोमवार को, पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व गृहमंत्री असदुज़्ज़माँ ख़ान को, मानवता के विरुद्ध अपराध मामलों में दोषी क़रार देते हुए उन्हें मृत्युदंड दिए जाने का निर्णय सुनाया है.यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने ट्राइब्यूनल के इस निर्णय की पृष्ठभूमि में अत्यधिक संयम बरते जाने की अपील की है.कार्यालय प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने जिनीवा में सोमवार को जारी एक वक्तव्य में ध्यान दिलाया कि बांग्लादेश में पिछले वर्ष हुए घटनाक्रम के बारे में, फ़रवरी 2025 में एक तथ्य-खोजी रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी.इसके बाद से ही, मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने, बांग्लादेश में शीर्ष नेतृत्व व वरिष्ठ पदों पर बैठे व्यक्तियों समेत सभी दोषियों की अन्तरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप जवाबदेही तय किए जाने पर बल दिया है.साथ ही, भुक्तभोगियों के लिए आवश्यक सहायता व मुआवज़ा सुनिश्चित किए जाने का भी आग्रह किया गया.निष्पक्ष अदालती प्रक्रिया अहमOHCHR प्रवक्ता ने बताया कि यूएन कार्यालय को ट्राइब्यूनल में अदालती प्रक्रिया के बारे में समुचित जानकारी नहीं है, लेकिन हमने निरन्तर पैरवी की है कि जवाबदेही तय करने वाली सभी प्रक्रियाओं में, निष्पक्ष ट्रायल व विधिसम्मत प्रक्रिया के अन्तरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया जाना होगा.उनके अनुसार, अन्तरराष्ट्रीय अपराधों से जुड़े आरोपों व मामलों में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है.“यह ख़ास तौर पर अहम है, जैसाकि इस मामले में हुआ, कि इस मुक़दमे को [व्यक्तियों की] अनुपस्थिति में संचालित किया गया और जिसमें फिर मौत की सज़ा का निर्णय सुनाया गया.”मानवाधिकार कार्यालय प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने, मृत्यु दंड थोपे जाने पर खेद जताते हुए कहा कि हम हर परिस्थिति में इसका विरोध करते रहे हैं.मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने आशा जताई है कि सच्चाई बयाँ करने, क्षतिपूर्ति और न्याय के लिए व्यापक प्रक्रिया के साथ, बांग्लादेश राष्ट्रीय मेल-मिलाप और घावों पर मरहम लगाने की दिशा में आगे क़दम बढ़ाएगा. इसके तहत, सुरक्षा सैक्टर में ऐसे “अर्थपूर्ण व रूपान्तरकारी बदलावों व सुधार” लागू करने होंगे, जिनमें अन्तरराष्ट्रीय मानकों का सम्मान किया जाए,” और इस प्रक्रिया में यूएन कार्यालय अपना हरसम्भव समर्थन प्रदान करेगा. साथ ही, यह सुनिश्चित करना होगा कि मानवाधिकार उल्लंघनों व दुर्व्यवहार मामलों को फिर कभी नहीं दोहराया जाए.

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