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बांग्लादेश: जबरन गुमशुदगी व यातना मामलों में 'जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम क़दम'

 - World News in Hindi

बांग्लादेश में पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान लोगों को जबरन ग़ायब कराए जाने और यातना देने के आरोपों का सामना कर रहे लोगों के विरुद्ध क़ानूनी प्रक्रिया की शुरुआत हुई है. यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त (OHCHR) कार्यालय ने इसे जवाबदेही तय किए जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम क़रार दिया है. पिछले सप्ताह, बांग्लादेश में अन्तरराष्ट्रीय अपराध ट्राइब्यूनल ने मानवता के विरुद्ध अपराधों के दो मामलों में औपचारिक आरोप पत्र दाख़िल किए हैं, जोकि जबरन ग़ायब और यातना से सम्बन्धित हैं.कथित रूप से इन अपराधों को पूछताछ के लिए टास्क फ़ोर्स और संयुक्त पूछताछ केन्द्र पर अंजाम दिया गया था.मानवाधिकार मामलों के लिए कार्यालय की प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने बुधवार को बताया कि यह पहली बार है जब देश में जबरन ग़ायब कराए जाने के मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय किए गए हैं.“यह पीड़ितों और उनके परिवारजन के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है.” Tweet URL

बांग्लादेश में सरकारी रोज़गारों में आरक्षण कोटा निर्धारित किए जाने के विरोध में, जुलाई 2024 में विश्वविद्यालय परिसरों में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे थे. इस आन्दोलन के दौरान सरकारी बलों पर दमनात्मक बल प्रयोग के आरोप लगे, जिनमें सैकड़ों लोग मारे गए व हज़ारों अन्य घायल हुए थे.इन हालात में, तत्कालीन सरकार की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को इस्तीफ़ा देना पड़ा और उन्हें देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी. इसके बाद, एक अन्तरिम सरकार का गठन हुआ है, जिसका मुख्य सलाहकार, देश के नोबेल पुरस्कार अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस को बनाया गया.ट्राइब्यूनल ने पूर्व और वर्तमान में सेवारत सैन्य अधिकारियों के विरुद्ध गिरफ़्तारी वॉरंट भी जारी किए हैं, जिनमें गुप्तचर महानिदेशालय के पूर्व महानिदेशकों समेत रैपिड एक्शन बटालियन के अनेक पूर्व अधिकारी हैं.बीते शनिवार को, बांग्लादेश की सेना ने एक दर्जन से अधिक ऐसे अधिकारियों को हिरासत में लेने की घोषणा की थी, जिन्होंने पूर्व सरकार के शासनकाल में कथित तौर पर गम्भीर अपराधों को अंजाम दिया था.मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क के अनुसार, हिरासत में लिए गए अधिकारियों को तत्काल एक नागरिक अदालत में पेश किया जाना आवश्यक है, ताकि उन पर अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत निष्पक्ष व पारदर्शी ढंग से आपराधिक मुक़दमे की कार्रवाई चलाई जा सके.“इन सम्वेदनशील व अहम मामलों में पीड़ितों व प्रत्यक्षदर्शियों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाना होगा.”अन्तरराष्ट्रीय मानकों पर बलयूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने पिछले वर्ष अपनी तथ्य खोजी रिपोर्ट में सिफ़ारिश की थी कि छात्रों के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान, मानवाधिकार उल्लंघन के गम्भीर मामलों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को अन्तरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप न्याय के कटघरे में लाना होगा.इनमें से कुछ मामलों को अन्तरराष्ट्रीय अपराधों की श्रेणी में रखा जा सकता है. यह पहली बार है जब बांग्लादेश में लोगों को जबरन ग़ायब कराने के अपराध को अब औपचारिक रूप से मान्यता हासिल है.OHCHR ने बांग्लादेश में प्रशासन से आग्रह किया है कि बड़ी संख्या में लम्बित मुद्दों से निपटने को प्राथमिकता देनी होगी, जिनमें से कुछ पूर्व सरकार के शासन काल से हैं.हर मामले में समुचित न्याय प्रक्रिया का पालन करना, निष्पक्ष से उसका निपटारा करना अहम है और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों को जल्द रिहा किया जाना होगा.इनमें पत्रकारों समेत वे लोग भी हैं, जिन्हें पूर्व सरकार के समर्थक के तौर पर देखा जाता था, मगर उन पर लगे आरोपों का कोई आधार नहीं है. ऐसे लोग अब भी आतंकवाद-रोधी क़ानून समेत अन्य आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं.मानवाधिकार कार्यालय ने बांग्लादेश प्रशासन से आग्रह किया है कि कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किसी भी मामले में मृत्युदंड की मांग करने से बचा जाना होगा, भले ही वह कितना भी गम्भीर अपराध हो.रवीना शमदासानी ने कहा कि वैयक्तिक जवाबदेही सुनिश्चित करने से परे, बांग्लादेश के लिए भविष्य में सर्वोत्तम रास्ता सच्चाई जानने, बताने, मुआवज़ा देने, मरहम लगाने और न्याय देने का है. इस प्रक्रिया में यह सुनिश्चित करना होगा कि मानवाधिकार उल्लंघन के ऐसे गम्भीर मामलों की विरासत से निपटा जाए और इन्हें फिर दोहराने से रोका जाए.

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