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2026 के लिए यूएन बजट में बड़ी कटौती का प्रस्ताव, मगर दिवालिया होने की चेतावनी भी

 - World News in Hindi

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चेतावनी दी है कि यदि संगठन के सदस्य देशों ने समय पर, अपनी बक़ाया धनराशि का पूर्ण भुगतान नहीं किया तो यूएन दिवालिया होने के रास्ते पर बढ़ता जाएगा. उन्होंने शुक्रवार को, वर्ष 2026 के लिए 3.23 अरब डॉलर के नियमित बजट को प्रस्तुत करते हुए यह बात कही है, जिसे भारी कटौती के बाद तैयार किया गया है. अगले वर्ष के लिए बजट का यह संशोधित प्रस्ताव है, जोकि पहले तैयार किए गए आकलन, 3.71 अरब डॉलर, से कम रक़म को दर्शाता है. वर्ष 2025 के लिए स्वीकृत बजट से यह धनराशि 15 प्रतिशत कम है.यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने शुक्रवार को जनरल ऐसेम्बली की पाँचवी समिति को सम्बोधित किया, जिस पर यूएन में वित्तीय व प्रशासनिक मामलों की देखरेख की ज़िम्मेदारी है. Tweet URL

यूएन प्रमुख ने चिन्ता जताई कि पहले की धनराशि बक़ाया है, सदस्य देशों ने समय पर भुगतान नहीं किया है और ऐसी समस्याओं से नक़दी ख़त्म होने व संगठन के बुनियादी कामकाज पर गहरा असर होने की आशंका है.कर्मचारियों की संख्या में कटौतीबजट में बड़े स्तर पर यूएन स्टाफ़ की संख्या में कटौती का प्रस्ताव भी है.वर्ष 2026 के लिए पहले बजट में 13 हज़ार 809 पदों के लिए धनराशि मुहैया कराने की मांग की गई थी. इस संख्या को अब संशोधित बजट प्रस्ताव में घटाकर 11 हज़ार 594 पद कर दिया गया है. वर्ष 2025 की तुलना में यह 18.8 प्रतिशत की कटौती है.इस प्रस्ताव में बड़े विभागों, प्रशासनिक कामकाज में कटौती की जाएगी, जबकि सदस्य देशों को सीधे सेवाएँ प्रदान करने वाले कार्यक्रम प्रभावित नहीं होंगे. विशेष रूप से सबसे कम विकसित देशों, भूमिबद्ध विकासशील देशों, लघु द्वीपीय विकासशील देश, और अफ़्रीकी देशों के विकास पर केन्द्रित कार्यक्रम.नियमित बजट को कैलेंडर वर्ष के अनुरूप, सदस्य देशों के लिए तयशुदा, अनिवार्य योगदान के आधार पर तैयार किया जाता है, जिसमें बुनियादी कार्यक्रम और यूएन सचिवालय की गतिविधियाँ शामिल हैं.इसके अलावा, शान्तिरक्षा अभियानों के लिए यूएन के पास अलग से बजट है, जोकि 1 जुलाई से 30 जून तक के कैलेंडर के आधार पर चलता है.नक़दी संकटयूएन प्रमुख ने आगाह किया है कि मौजूदा नक़दी संकट की वजह से अगले वर्ष के बाद, 2027 में भी गम्भीर नतीजे हो सकते हैं.पिछले वर्ष के अन्त तक, 76 करोड़ डॉलर की धनराशि बक़ाया थी, और उसके अलावा 2026 की शुरुआत में सदस्य देशों को 30 करोड़ डॉलर की रक़म वापिस (क्रेडिट) भी लौटाई जानी है. यह बजट के 10 फ़ीसदी हिस्से को प्रभावित करेगा.महासचिव गुटेरेश ने कहा कि अगले वर्ष की शुरुआत में यदि वित्तीय योगदान मिलने में और अधिक देरी हुई, तो ख़र्चों में और कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. इसके बाद, 2027 में 60 करोड़ डॉलर की रक़म लौटने की स्थिति पैदा सकती है, जोकि बजट का 20 फ़ीसदी होगा.“यह दिवालिया होने की दिशा में दौड़ने जैसा होगा.” इसके मद्देनज़र, उन्होंने बक़ाया धनराशि में जल्द से जल्द कमी लाने और क्रेडिट लौटाने की शर्त को स्थगित करने की अपील की है.इससे पहले, यूएन के ख़र्चों को सीमित करने के लिए क़दम उठाए गए थे, लेकिन उससे अस्थाई राहत ही मिल पाई.आगे क्या होगायूएन ने 13.5 करोड़ डॉलर के बजट घाटे के साथ वर्ष 2025 में प्रवेश किया और सितम्बर महीने के अन्त तक केवल 66.2 प्रतिशत धनराशि ही प्राप्त की जा सकी थी. 2024 में यह आँकड़ा 78 फ़ीसदी था.अब तक 193 सदस्य देशों में से, 136 देशों ने पूर्ण भुगतान किया है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस और मैक्सिको को अभी अपनी देनदारी का भुगतान करना बाक़ी है.आगामी दिनों में, पाँचवी समिति, इन प्रस्तावों पर यूएन सचिवालय के विभागों और वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारियों के साथ चर्चा करेगी.इसके बाद, यह समिति अनुशंसाओं के साथ अपनी रिपोर्ट जनरल ऐसेम्बली में प्रस्तुत करेगी, जहाँ दिसम्बर के अन्त तक यूएन बजट को अन्तिम स्वीकृति मिलने की सम्भावना है.

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