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हर वर्ष, न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से 1.1 करोड़ मौतें, तुरन्त देखभाल उपायों पर बल

 - World News in Hindi

विश्व भर में तंत्रिका सम्बन्धी विकारों (neurological disorder) की वजह से हर वर्ष 1.1 करोड़ लोगों की मौत हो जाती है, मगर इसके बावजूद, केवल 32 प्रतिशत देशों में ही इस स्वास्थ्य चुनौती से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय नीति मौजूद है. न्यूरोलॉजिकल विकास से तात्पर्य मुख्यत: मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और तंत्रिकाओं (nerves) से जुड़ी बीमारियों व समस्याओं से है.विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मंगलवार को जारी अपनी एक नई रिपोर्ट में आगाह किया है कि इन अवस्थाओं से क़रीब 40 फ़ीसदी विश्व आबादी, यानि तीन अरब से अधिक लोग प्रभावित हैं. Tweet URL

तंत्रिका सम्बन्धी अवस्थाओं से होने वाली मौतों व विकलांगता की वजह स्ट्रोक, माइग्रेन, अल्ज़ाइमर, मनोभ्रंश (dementia), मेनिनजाइटिस, तंत्रिका प्रणाली सम्बन्धी कैंसर समेत अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ हैं.यूएन एजेंसी ने देशों से आग्रह किया है कि न्यूरोलॉजिकल विकारों का उपचार करने के लिए स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में निवेश में वृद्धि की जानी होगी.WHO के सहायक महानिदेशक डॉक्टर जर्मी फ़रार ने बताया कि दुनिया में हर तीन में से एक व्यक्ति ऐसी अवस्था में जीवन गुज़ार रहा है, जिनसे उनका मस्तिष्क प्रभावित होता है. और यह ज़रूरी है कि उनके लिए स्वास्थ्य देखभाल को बेहतर बनाने के लिए हर सम्भव प्रयास किए जाएं.“इनमें से अनेक न्यूरोलॉजिकल अवस्थाओं की रोकथाम या कारगर ढंग से उपचार सम्भव है, इसके बावजूद, ये अधिकाँश लोगों की पहुँच से दूर हैं, विशेष रूप से ग्रामीण या उन इलाक़ों में जहाँ पर्याप्त सेवाएँ नहीं हैं.”ऐसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों की विशाल संख्या के बावजूद, केवल एक-तिहाई से भी कम देशों में इस विषय में राष्ट्रीय नीति मौजूद है.निवेश व स्वास्थ्यकर्मियों का अभावयूएन स्वास्थ्य एजेंसी के कुल 194 सदस्य देशों में से केवल 102 देशों ने इस रिपोर्ट के लिए अपना योगदान दिया, जोकि एक संकेत है कि न्यूरोलॉजी का कितना सीमित ध्यान ही मिल पाता है.63 देशों (32 फ़ीसदी) के पास तंत्रिका सम्बन्धी विकारों पर राष्ट्रीय नीति है जबकि 34 देशों (18 प्रतिशत) ने इनसे निपटने के लिए धनराशि आवंटित की है.रिपोर्ट के अनुसार, निम्न-आय वाले देशों की तुलना में धनी देशों में 80 गुना अधिक न्यूरोलॉजिस्ट होने की सम्भावना होती है.इस स्वास्थ्य चुनौती से जूझ रहे लोगों के लिए अक्सर सेवाएँ मुहैया नहीं हो पाती हैं और केवल 25 प्रतिशत देशों में ही तंत्रिका सम्बन्धी विकार के लिए देखभाल, उनकी सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज का हिस्सा है.न्यूरोलॉजिकल अवस्थाओं के लिए जीवन-पर्यन्त देखभाल की आवश्यकता होती है, जबकि केवल 46 देशों में ही देखभाल सेवाएँ उपलब्ध हैं. 44 देशों में देखभालकर्ताओं के लिए क़ानूनी संरक्षण है.इसकी वजह से अक्सर अनौपचारिक देखभाल प्रदान करने वाले लोगों को कोई मान्यता या समर्थन हासिल नहीं है, विशेष रूप से महिलाओं को.

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