संयुक्त राष्ट्र, बढ़ते वैश्विक संकटों के इस वर्ष में, युद्धों के विस्तार, आर्थिक मुश्किलों और तेज़ होते जलवायु संकट के बावजूद, मज़बूती के साथ खड़ा रहा है. यह वैश्विक संगठन, शान्ति स्थापित करने, सतत विकास को आगे बढ़ाने और मानवीय पीड़ा को कम करने के लिए निरन्तर प्रयासरत है. संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें वार्षिक सत्र से ठीक पहले गुरूवार को जारी महासचिव की वार्षिक रिपोर्ट, संगठन के प्रयासों का एक गम्भीर लेकिन दृढ़ चित्र पेश करती है, जिसमें बढ़ती वैश्विक चुनौतियों से निपटने की दिशा में किए गए काम का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया है.महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों की दृढ़ता और समर्पण की सराहना की है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद ज़रूरतमन्द लोगों तक उम्मीद और सहायता पहुँचाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “यह रिपोर्ट दिखाती है कि इन बेहद चुनौतीपूर्ण समयों में – बल्कि इन्हीं कारणों से – हमें उस बेहतर दुनिया के लिए निरन्तर प्रयासरत रहना होगा, जिसे हासिल करना सम्भव हैं.”संयुक्त राष्ट्र ने अपने साझीदारों के साथ मिलकर 19 करोड़ 80 लाख लोगों की मानवीय ज़रूरतों के लिए, 50 अरब डॉलर की सहायता अपील जारी की. वर्ष 2024 में संयुक्त राष्ट्र ने इस लक्ष्य की आधी यानि 25 अरब डॉलर राशि जुटाई थी, जिससे 77 देशों और क्षेत्रों में 11.6 करोड़ ज़रूरतमन्द लोगों तक जीवनरक्षक सहायता पहुँचाई जा सकी.इस सहायता से हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका, इसराइल द्वारा क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र, सूडान, यूक्रेन और यमन में मानवीय ज़रूरतें पूरी की जा सकीं. साथ ही, वानुअतु में भूकम्प, दक्षिणी और पूर्वी अफ़्रीका में सूखे और दक्षिण-पूर्व एशिया में बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में भी जीवनरक्षक कार्यक्रम चलाए जा सके.लेकिन वर्ष 2024 संयुक्त राष्ट्र कर्मियों और मानवीय कार्यकर्ताओं के लिए अब तक का सबसे भयावह और दुखद साल साबित हुआ. इस दौरान 373 सहायता कार्यकर्ताओं की मौत हुई. इनमें से अधिकाँश स्टाफ़, संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) के कर्मचारी थे, जो ग़ाज़ा में बेहद कठिन एवं ख़तरनाक परिस्थितियों में, फ़लस्तीनी शरणार्थियों की मदद कर रहे थे.महासचिव ने रिपोर्ट जारी करते समय इन साहसी कार्यकर्ताओं के बलिदान को नमन किया और दुनिया के सबसे कमज़ोर व असुरक्षित लोगों के साथ खड़े रहने की संयुक्त राष्ट्र की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया. UN News यूएन मिशन का मूल है, शान्ति और सुरक्षाबढ़ती वैश्विक चुनौतियों के बीच भी संगठन ने कूटनीति को केन्द्र में रखकर अपना काम जारी रखा है. ख़तरों में वृद्धि के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र के कूटनैतिक प्रयास हर दिन लाखों नागरिकों की रक्षा कर रहे हैं और शान्ति प्रक्रियाओं को आगे बढ़ा रहे हैं.संयुक्त राष्ट्र ने, सीरिया में राजनैतिक बदलाव के दौरान, सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2254 के तहत सभी हितधारकों को शामिल किया. इस प्रस्ताव ने 2015 में देश में शान्ति प्रक्रिया के लिए एक रोडमैप को मंज़ूरी दी थी. इसके ज़रिए हिंसा को कम करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संघर्ष को क्षेत्रीय स्तर पर फैलने से रोकने के प्रयास किए गए.वहीं संयुक्त राष्ट्र ने, इसराइल के क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्रों (पूर्वी येरूशेलम, ग़ाज़ा और पश्चिमी तट) और व्यापक क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों के साथ मिलकर, हिंसा को रोकने, मानवीय सहायता की पहुँच बढ़ाने और प्रभावित आबादी को लगातार सहयोग पहुँचाने के प्रयास किए.लेबनान में, संयुक्त राष्ट्र ने, सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 (2006) के तहत युद्धविराम बहाल करने और तनाव कम करने में मदद की. इससे ब्लू लाइन के दोनों ओर लोग सुरक्षित रूप से अपने घरों को लौट पाए.संयुक्त राष्ट्र ने विश्व स्तर पर शान्ति वार्ताओं को आगे बढ़ाया, देश निर्माण की प्रक्रिया में सहयोग दिया और सूडान सहित कई देशों में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद की. आबिये क्षेत्र में शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के प्रयासों से सामुदायिक हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई.शान्ति निर्माण कोष से, 32 देशों और क्षेत्रों में राष्ट्रीय शान्ति योजनाओं को सहयोग देने के लिए, 11.6 करोड़ डॉलर से अधिक आवंटित किए गए, जिनमें लैंगिक समानता को प्राथमिकता दी गई. अफ़्रीकी संघ जैसे क्षेत्रीय संगठनों के साथ साझेदारी ने संघर्ष रोकथाम के प्रयासों को और मज़बूत बनाया. © UNRWA/Mohammed Hinnawi भविष्य के लिए नवीन दृष्टिकोण2024 का भविष्य के लिए शिखर सम्मेलन बहुपक्षवाद के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ. विश्व नेताओं ने “भविष्य के लिए समझौता” (Pact for the Future) अपनाया, जो अन्तरराष्ट्रीय सहयोग को नई ऊर्जा देने और लोगों व धरती के लिए ठोस समाधान पेश करने की दिशा में एक ऐतिहासिक क़दम है.इस समझौते में मज़बूत कूटनीति और संघर्ष रोकथाम को प्राथमिकता दी गई है, वैश्विक वित्तीय प्रणाली में सुधार की बात कही गई है, जलवायु परिवर्तन पर त्वरित कार्रवाई की माँग की गई है और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में तेज़ प्रगति पर ज़ोर दिया गया है. साथ ही, इसमें अधिक प्रतिनिधिक और प्रभावी वैश्विक शासन का आश्वासन दिया गया है, जिसमें सुरक्षा परिषद में सुधार और विकासशील देशों की आवाज़ को अधिक सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता भी शामिल है.इस समझौते के साथ, वैश्विक डिजिटल समझौता और भावी पीढ़ियों पर घोषणापत्र भी अपनाए गए, जो इसकी व्यापकता और महत्व दर्शाते हैं. यह समझौता एक सुरक्षित, खुला और समावेशी डिजिटल भविष्य बनाने की दिशा तय करता है. इसमें सदस्य देशों से अपील की गई है कि वे डिजिटल असमानताओं को कम करें, सर्वजन के लिए डिजिटल बुनियादी ढाँचा विकसित करें और डेटा व कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बेहतर प्रबंधन को सुनिश्चित करें.यह घोषणापत्र पहला वैश्विक समझौता है जो आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों और हितों को वर्तमान फ़ैसलों में शामिल करता है. यह नीति निर्माण में दूरदर्शिता जोड़ता है और दीर्घकालिक टिकाऊ समाधानों का मार्ग प्रशस्त करता है.ये सभी परिणाम मिलकर बहुपक्षवाद के नवीनीकरण की नींव रखते हैं. महासचिव ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र आज की सबसे बड़ी चुनौतियों का समाधान करके एक अधिक न्यायसंगत और टिकाऊ भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रहा है, और यह सुनिश्चित कर रहा है कि डिजिटल प्रौद्योगिकी का उपयोग पूरी मानवता के हित में हो.” UN Photo/Loey Felipe मानवाधिकार और सतत विकाससंयुक्त राष्ट्र का दृष्टिकोण है कि मानवाधिकार वैश्विक चुनौतियों के समाधान के कारक हैं और यही शान्ति, न्याय और सतत विकास की नींव हैं.साल 2024 में संगठन ने, महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ हिंसा ख़त्म करने, ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को सशक्त बनाने तथा शान्ति व संवैधानिक प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागेदारी सुनिश्चित करने के लिए, कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू कीं.मानवाधिकारों को संघर्ष, प्रवासन, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल शासन जैसी चुनौतियों के समाधान में भी शामिल किया गया. इससे संयुक्त राष्ट्र के काम में सुरक्षा, जवाबदेही और समावेशिता और मज़बूत हुई है.सतत विकास और जलवायु कार्रवाई भी संयुक्त राष्ट्र की प्राथमिकताओं में प्रमुख रहे. संगठन ने 170 देशों को उत्सर्जन घटाने के अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों को पूरा करने में सहयोग दिया और विकासशील देशों को कम-कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के लिए विशेष मदद प्रदान की.संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक वित्तीय प्रणाली में सुधार की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया, ताकि सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के लिए वित्तीय कमी को पूरा किया जा सके और सबसे सम्वेदनशील देशों को 2030 एजेंडे के वादों को पूरा करने का उचित अवसर मिल सके.कर्मचारियों के लिए प्रतिबद्धता, मानवता के लिए प्रतिबद्धता हैमहासचिव ने उन संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला जो बेहद जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम कर रहे हैं. उन्होंने मानवीय मानदंडों के कमज़ोर पड़ने पर गहरी चिन्ता जताई और आम नागरिकों, अस्पतालों, स्कूलों व राहतकर्मियों पर जानबूझकर किए जा रहे हमलों की कड़ी निन्दा की. उन्होंने कहा कि ऐसे हमले अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर की अनदेखी करते हैं.इन अभूतपूर्व खतरों के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों ने साहस और दृढ़ संकल्प के साथ अपना मिशन जारी रखा है.संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा, “यह रिपोर्ट साबित करती है कि इन बेहद कठिन परिस्थितियों के बावजूद – बल्कि इन्हीं परिस्थितियों की वजह से – हमें उस बेहतर दुनिया के लिए लगातार प्रयास करते रहना चाहिए, जिसे हासिल करना सम्भव हैं. हम शान्ति स्थापित करने, सतत विकास को आगे बढ़ाने और पूरी मानवता के लिए मानवाधिकारों की रक्षा व उन्हें बनाए रखने के अपने प्रयासों को और मज़बूत करेंगे.”ये सभी पहलू संगठन की उस भावना को दर्शाते हैं, जो केवल वर्तमान संकटों से निपटने तक सीमित नहीं है, बल्कि अधिकारों की रक्षा करने, विकास को आगे बढ़ाने और समस्त विश्व के लोगों की ईमानदारी और सम्वेदनशीलता के साथ सेवा करने के लिए भी प्रतिबद्ध है.
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