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नेपाल: व्यापक विरोध प्रदर्शनों में 15 लोगों की मौत, संयम की अपील

 - World News in Hindi

नेपाल सरकार द्वारा सोशल मीडिया मंचों पर लगाए गए प्रतिबन्धों के बाद भड़के प्रदर्शनों में कम से कम 15 लोगों के मारे जाने और 100 से अधिक के घायल होने की ख़बर है. ख़बरों के अनुसार, देश में भ्रष्टाचार के प्रति चिन्ताओं, असमानताओं और जवाबदेही की कमी पर भी युवाओं का ग़ुस्सा फूटा है. नेपाल में संयुक्त राष्ट्र की रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर हैना सिंगर-हामदी ने यूएन न्यूज़ के साथ एक बातचीत में इस घटनाक्रम पर गहरा दुख प्रकट करते हुए कहा कि नेपाल में आम तौर पर ऐसे हालात देखने को नहीं मिलते हैं. उन्होंने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है और कहा है कि संयुक्त राष्ट्र हर सम्भव समर्थन प्रदान करने के लिए तैयार है.समाचार माध्यमों के अनुसार, पुलिस ने नेपाल की राजधानी काठमाँडू में संसद परिसर में धावा बोलने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध आँसू गैस का इस्तेमाल किया और गोलियाँ चलाई. रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर हैना सिंगर-हामदी ने यूएन न्यूज़ के साथ बातचीत में हालात को “तनावपूर्ण” बताते हुए कहा कि स्थिति तेज़ी से बिगड़ रही है. काठमांडू, पोखरा और अन्य शहरों में कर्फ़्यू लगाया गया है. पुलिस ने संसद परिसर में घुसने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों पर आँसू गैस छोड़ी और सम्भवतः गोलियों का भी इस्तेमाल किया. Tweet URL

उन्होंने कहा कि “हमें अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि गोलीबारी किस तरह हुई, लेकिन इतना तय है कि गोलिया लगने से ही बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है. और जैसे-जैसे मैं आपसे बात कर रही हूँ, स्थिति लगातार बदल रही है.”दरअसल, नेपाल सरकार ने दो दिन पहले ही व्हाट्सऐप, फ़ेसबुक, एक्स और यूट्यूब समेत 26 बड़े सोशल मीडिया मंचों पर पाबन्दियाँ लगाने का आदेश जारी किया था.सरकार का तर्क है कि इन अन्तरराष्ट्रीय कम्पनियों ने स्थानीय पंजीकरण और निगरानी व्यवस्था का पालन नहीं किया है और झूठे अकाउंट्स, घृणात्मक भाषण तथा भ्रामक सूचनाओं को रोकने के लिए यह क़दम ज़रूरी है. लेकिन युवाओं और उद्यमियों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा डिजिटल दुनिया तक पहुँच पर सीधा हमला माना.रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर ने कहा, “नेपाल में ऐसे हालात देखने को नहीं मिलते. मेरे स्टाफ़ के बहुत से लोग रो रहे हैं. उन्होंने अपने जीवन में कभी इस तरह की हिंसा नहीं देखी. युवाओं पर गोली चलाना - यह समझ से बाहर है कि स्थिति यहाँ तक कैसे पहुँच गई.” उन्होंने उम्मीद जताई कि “बुद्धिमानी और संयम” से हालात पर क़ाबू पाया जाएगा.सहायता के लिए तत्परहैना सिंगर-हामदी ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र की सभी एजेंसियाँ सहायता के लिए सक्रिय हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनीसेफ़ (UNICEF) यह आकलन कर रहे हैं कि स्वास्थ्य क्षेत्र में अतिरिक्त मदद की आवश्यकता है या नहीं. मानवाधिकार उच्चायुक्त का कार्यालय (OHCHR) तनाव में कमी लाने के लिए विकल्प की तलाश कर रहा है. उन्होंने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने, घायलों को चिकित्सीय सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने की अपील की है. Navesh Chitrakar नेपाल सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म पर पाबन्दी लगाए जाने के बाद ये प्रदर्शन भड़के हैं. उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया मंचों पर से पाबन्दी कुछ समय से हटी हुई है, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह स्थाई होगी या नहीं. सिंगर ने कहा कि प्रतिबन्धों के बावजूद युवाओं ने घटनाओं को ऑनलाइन रिकॉर्ड किया है. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार और सुरक्षा टीम स्थिति पर नज़र रख रहे हैं और ज़रूरत पड़ने पर संवाद और बातचीत की सुविधा देने के लिए तैयार हैं.रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर ने कहा, “हमारी भूमिका है नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, मौलिक स्वतंत्रताओं की रक्षा करना और नेपाल को अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता में सहयोग देना.”लेकिन उन्होंने सचेत किया कि सरकार और युवाओं के बीच विश्वास बहाल करना बेहद आवश्यक है. “अब सबसे महत्वपूर्ण है कि युवाओं के साथ भरोसा फिर से किस तरह स्थापित किया जाए - कैसे संवाद खोला जाए, उनकी बात सुनी जाए और विश्वास बहाल किया जाए. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि नेपाल जैसा अद्भुत देश इस स्थिति में आ गया है.” Navesh Chitrakar नेपाल में सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म पर थोपे गए प्रतिबन्ध के विरोध में बड़े पैमाने पर लोग सड़कों पर उतरे हैं. जवाबदेही व जाँच की मांगयूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने नेपाल में प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने पर स्तब्धता प्रकट की है और त्वरित, पारदर्शी जाँच की मांग की है.नेपाल प्रशासन से शान्तिपूर्ण सभा के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करने का आग्रह किया. यूएन कार्यालय प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने सोमवार को जिनीवा में कहा कि हाल ही में सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म पर लगाए गए प्रतिबन्ध के विरोध में युवाओं द्वारा आयोजित प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा अनावश्यक, अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया. उनके अनुसार, नेपाल एक जीवंत लोकतंत्र है और युवाओं की चिन्ताओं को दूर करने का सबसे अच्छा तरीक़ा सम्वाद है.
इसके मद्देनज़र, उन्होंने सोशल मीडिया को नियंत्रित करने के उपायों पर पुनर्विचार करने और मानवाधिकार प्रतिबद्धताओं को पूरा ​करने की अपील की.

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