• Aapki Saheli
  • Astro Sathi
  • Business Khaskhabar
  • ifairer
  • iautoindia
1 of 1

अफ़ग़ानिस्तान: बुनियादी ज़रूरतों और गुज़र-बसर के लिए संघर्ष कर रहे हैं भूकम्प पीड़ित

 - World News in Hindi

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र की एक वरिष्ठ अधिकारी ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि भूकम्प पीड़ितों की केवल तात्कालिक ज़रूरतें पूरी करने के लिए ही नहीं, बल्कि उनके भविष्य को फिर से सँवारने की क्षमता के लिए भी समर्थन दिया जाना होगा. उन्होंने सोमवार को देश के जलालाबाद शहर से भूकम्प के बाद उपजी स्थिति और मानवीय राहत प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि कुछ ही पलों के भीतर, परिवारों की ज़िन्दगियाँ तबाह हो गई. 31 अगस्त को, अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वी हिस्से में आए भीषण भूकम्प में, बड़े पैमाने पर जान-माल की बर्बादी हुई है और चार प्रान्त सर्वाधिक प्रभावित हैं. इस भूकम्प की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6 थी. मानवीय मामलों के लिए समन्वय कार्यालय (OCHA) की रणनीति प्रमुख शैनॉन ओहारा ने, जलालाबाद से वीडियो लिंक के ज़रिए न्यूयॉर्क में संवाददाताओं को बताया कि “हमने ऐसे परिवार देखे जिनकी ज़िन्दगी महज़ कुछ मिनटों में बिखर गई.” Tweet URL

“भूकम्प ने लोगों के घर, खेत और रोज़गार सब नष्ट कर दिए, उनके पास कुछ नहीं बचा है.”OCHA की टीम अब तक अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वी इलाक़ों नांगरहार, कुनार समेत भूकम्प प्रभावित प्रान्तों में 49 गाँवों तक पहुँचने में सफल रही है. साथ ही, मानवीय सहायताकर्मी अन्य इलाक़ों तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं. मौजूदा आँकड़ों के अनुसार, लगभग 40 हज़ार लोग भूकम्प से प्रभावित हुए हैं, जबकि पाँच हज़ार से ज़्यादा घर पूरी तरह ढह गए हैं.चुनौतियाँ का पहाड़OCHA अधिकारी ओहारा ने बताया कि, “भूकम्प से पहले भी इन गाँवों तक पहुँचना मुश्किल था. अब भूकम्प के बाद वहाँ पहुँचने में और भी अधिक प्रयास करना पड़ रहा है.”उन्होंने कहा कि जलालाबाद से आपदा प्रभावित इलाक़ों तक पहुँचने का एकमात्र रास्ता पहाड़ की ढलान पर बनी सँकरी, एकतरफ़ा सड़क है, जो “भूस्खलन से गिरे बड़े पत्थरों और घाटी में ऊपर-नीचे जाने की कोशिश करते अनेक वाहनों से बाधित” रहती है.इस वजह से उन्हें और उनकी टीम को क़रीब 100 किलोमीटर का सफ़र तय करने में साढ़े छह घंटे से अधिक लग गए. पीड़ितों तक पहुँचने के लिए सहायता दलों को पहले गाड़ियों से और फिर कई बार घंटों पैदल चलकर पहुँचना पड़ा.महिलाओं पर भारी बोझशैनॉन ओहारा के अनुसार, मानवीय राहतकर्मी स्थानीय महिलाओं, बच्चों और विकलांग जन को प्राथमिकता दे रहे हैं.उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में, अफ़ग़ानिस्तान में महिलाएँ और लड़कियाँ समाज में हाशिए पर धकेल दी गई हैं और वे बस किसी तरह जीवित रहने की कोशिशों में जुटी हैं. जैसाकि पहले आए भूकम्पों और अन्य आपदाओं के दौरान हुआ, इनका महिलाओं और लड़कियों पर हमेशा सबसे अधिक बोझ पड़ता है.इस बीच, संयुक्त राष्ट्र प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी (UNFPA) के अनुमान के अनुसार, इस आपदा से 11 हज़ार 600 गर्भवती महिलाएँ प्रभावित हुई हैं. यह एक ऐसे देश का आँकड़ा, जहाँ पहले से ही इस क्षेत्र में मातृ मृत्यु दर सबसे अधिक है.यूएन मानवतावादी टीम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत है कि “स्वास्थ्य टीमों में महिलाएँ शामिल हों और अधिक महिला राहतकर्मी वितरण, पोषण, मनो-सामाजिक और अन्य परामर्श सेवाओं में सहायता करें.” © WFP अफ़ग़ानिस्तान के कुनार प्रान्त में स्थानीय लोगों को पौष्टिक बिस्किट वितरित किए जा रहे हैं. बीमारी फैलने का डर उन्होंने बताया कि इस प्राकृतिक आपदा के कारण परिवार अब तम्बुओं में या खुले आसमान के नीचे, बारिश और ठंड में जीने को विवश हैं. यहाँ स्वच्छ पानी और स्वच्छता की सुविधाएँ नहीं हैं.यूएन एजेंसी अधिकारी ने कहा, “इस क्षेत्र में हैज़ा सामान्य है और शुरुआती आकलन दर्शाते हैं कि 92 प्रतिशत समुदाय खुले स्थानों में शौच कर रहे हैं. ऐसे में हैज़ा के फैलने की आशंका चिन्ता की एक बड़ी वजह है.”संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियाँ भोजन और स्वच्छता किट वितरित कर रही हैं, मगर इन प्रयासों को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है. शैनॉन ओहारा ने ज़ोर देकर कहा, “प्रभावित समुदाय बुनियादी जीवन यापन के लिए संघर्ष कर रहे हैं.”तत्काल कार्रवाई की आवश्यकतासंयुक्त राष्ट्र की एजेंसियाँ परिवारों की सहायता के लिए तम्बू, कम्बल और स्वच्छता किटें भी प्रदान कर रही हैं. जबकि अब तक 43 हज़ार पीड़ितों को तैयार भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है. लेकिन, अगर भारी बारिश के कारण आन्तरिक विस्थापितों के लिए आश्रय स्थल जलमग्न हो जाते हैं या सम्भावित भूकम्प के बाद के झटकों से भूस्खलन होता है, तो मानवीय प्रयासों में रुकावट आ सकती है. इसके अलावा, आगामी सर्दियों के मौसम में बर्फ़बारी भी महत्वपूर्ण मार्गों को बाधित कर सकती है.शैनॉन ओहारा ने कहा, “यदि हम अब कार्रवाई नहीं करते, तो सम्भवत: ये समुदाय आने वाली सर्दियों में जीवित नहीं रह पाएँगे. अतिरिक्त वित्तीय सहायता की तत्काल आवश्यकता है.”OCHA ने जीवनरक्षक सहायता आपूर्ति के लिए एक करोड़ डॉलर की धनराशि जारी की है और आपात प्रतिक्रिया योजना को अन्तिम रूप दिया जा रहा है.उन्होंने आगाह किया कि “तत्काल सहायता के अभाव में, आने वाले सप्ताह इस त्रासदी को और बढ़ा सकते हैं – रोकथाम योग्य बीमारियों का फैलाव, और अधिक विस्थापन और अतिरिक्त जानमाल की हानि होने का जोखिम है.”काबुल में पहुँची नई खेपकाबुल में सोमवार को, 35 टन से अधिक जीवनरक्षक चिकित्सा सामान की एक नई खेप पहुँचाई गई ताकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आपात प्रयासों को मज़बूती मिल सके.दुबई में WHO के भंडार के ज़रिए भेजी गई इस नई खेप में चोट के उपचार, आपातकालीन सर्जरी किट, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल किट, गैर-संचारी रोगों की किट और आवश्यक दवाइयाँ शामिल हैं.इन आपूर्ति सामग्री को सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में, स्वास्थ्य केन्द्रों और मोबाइल स्वास्थ्य टीमों तक पहुँचाया जाएगा, इसके लिए ज़रूरतों का निरन्तर आकलन किया जा रहा है.

यह भी पढ़े

Web Title-
खास खबर Hindi News के अपडेट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करे!
(News in Hindi खास खबर पर)
Tags: hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news
Khaskhabar.com Facebook Page:

प्रमुख खबरे

आपका राज्य

Traffic

जीवन मंत्र

Daily Horoscope

वेबसाइट पर प्रकाशित सामग्री एवं सभी तरह के विवादों का न्याय क्षेत्र जयपुर ही रहेगा।
Copyright © 2026 Khaskhabar.com Group, All Rights Reserved