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यूएन को फिर से गढ़ने में, महिलाओं के नेतृत्व की अहम भूमिका - पूर्व महासभा प्रमुख

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80 वर्ष पहले, संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से अब तक केवल चार महिलाओं ने यूएन महासभा अध्यक्ष का पदभार सम्भाला है, जहाँ 193 सदस्य देशों के प्रतिनिधि विश्व के समक्ष मौजूद अहम मुद्दों पर चर्चा करते हैं. जर्मनी की पूर्व विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक जल्द ही इस पद की बागडोर अपने हाथ में लेने वाली पहली योरोपीय महिला और महासभा के इतिहास में केवल पाँचवीं महिला अध्यक्ष बनेंगी.उनके शपथ ग्रहण से एक दिन पहले, यूएन न्यूज़ ने उनसे पहले इस दायित्व को निभा चुकी मारिया फ़र्नांडा एस्पिनोसा से बातचीत की. इक्वाडोर की पूर्व रक्षा और विदेश मंत्री रही एस्पिनोसा 2018-2019 में महासभा की अध्यक्ष थीं और लातिन अमेरिका तथा कैरिबियाई क्षेत्र से इस पदभार को सम्भालने वाली पहली महिला थीं.कड़ी मेहनत और कुशल कूटनीतिएस्पिनोसा ने महासभा को “अन्तरराष्ट्रीय क़ानून की प्रयोगशाला” बताया और कहा कि अध्यक्ष पद के लिए “कड़ी मेहनत, अच्छी कूटनीति और निष्पक्ष वार्ता करने की क्षमता” आवश्यक है.उनके अनुसार, एनालेना बेयरबॉक में अगले अध्यक्ष के रूप में “शानदार प्रदर्शन” के लिए सभी आवश्यक गुण हैं.उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वो इस पद को ऐसे समय में सम्भालेंगी जब संस्था में “संरचनात्मक बदलाव और आंशिक रूप से वित्तीय चुनौतियाँ” एक साथ मौजूद हैं.एस्पिनोसा का मानना है कि एनालेना बेयरबॉक यूएन80 प्रक्रिया के तहत सुधार लागू करने और 2024 में अपनाए गए ‘भविष्य का सहमति पत्र’ से सम्बन्धित प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाने में “केन्द्रीय भूमिका” निभाएंगी. UN Photo/Manuel Elias महासचिव पद पर महिला?न्यूयॉर्क में महासभा की पाँचवीं महिला अध्यक्ष के चुनाव का स्वागत करते हुए, एस्पिनोसा ने कहा कि यूएन को फिर से गढ़ने के लिए प्रयास, नेतृत्व शैलियों पर पुनर्विचार करने और अन्तत: महासचिव के पद के लिए पहली महिला पर विचार करने का अवसर भी प्रदान करते हैं. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश का कार्यकाल 31 दिसम्बर 2025 को पूरा हो रहा है, और 2026 में अगले यूएन प्रमुख की नियुक्ति की उम्मीद है.उन्होंने सवाल उठाया, “वास्तविक प्रश्न यह है: क्यों नहीं?” और ज़ोर दिया कि महिला पदाधिकारी “मज़बूत प्रबन्धन और पुल निर्माण” जैसी विशेषताएँ ला सकती हैं.पूर्व महासभा प्रमुख ने कहा कि 80 वर्षों तक, पुरुष प्रधान नेतृत्व के बाद एक महिला महासचिव, एक “ऐतिहासिक न्याय” का प्रतीक भी होंगी. एस्पिनोसा ने रेखांकित किया कि अध्यक्ष का ज़्यादातर काम परदे के पीछे होता है, जहाँ मतभेदों को सुलझाना और सहमति बनाना शामिल है. बेयरबॉक को आने वाले समय में शान्ति, सुरक्षा और सतत विकास से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा.

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