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हिमनद सिर्फ़ बर्फ़ नहीं हैं, ये मानव आजीविका को सहारा देते हैं, आमिना मोहम्मद

 - World News in Hindi

संयुक्त राष्ट्र उप महासचिव आमिना मोहम्मद ने जल-सम्बन्धी पारिस्थितिकी तंत्रों की रक्षा के लिए, तत्काल कार्रवाई की पुकार लगाई है. उन्होंने यह आहवान शुक्रवार को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में, अन्तरराष्ट्रीय हिमनद संरक्षण सम्मेलन के उदघाटन अवसर पर किया. आमिना मोहम्मद ने कहा कि 1975 से हिमनदों ने 9,000 बिलियन टन से ज़्यादा बर्फ़ गँवा दी है - जो जर्मनी के पूरे क्षेत्र को ढँकने वाले 25 मीटर मोटे ब्लॉक के बराबर है.उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि हिमनदों के पिघलने की अगर मौजूदा दरें यूँ ही जारी रहीं तो, बहुत से हिमनद, इस सदी में बच नहीं पाएंगे, जिससे वैश्विक स्तर पर पारिस्थितिकी तंत्र, आजीविकाओं और जल सुरक्षा में बदलाव आएगा.” Tweet URL

“यह सिर्फ़ पहाड़ों का संकट नहीं है - यह धीमी गति घटित हो रही एक वैश्विक आपदा है जिसके ग्रह और लोगों पर दूरगामी परिणाम होंगे.”ये केवल बर्फ़ नहींआमिना मोहम्मद ने यह बात कहने से एक दिन पहले ही, ताजिकिस्तान के उत्तर-मध्य इलाक़े में वंज याख़ हिमनद का दौरा किया था, जहाँ उन्होंने घने बर्फ़ के इस रूप की "अदभुत सुन्दरता" देखी.हिमनद मध्य एशिया के अनेक समुदायों के लिए एक महत्वपूर्ण जल स्रोत है, जहाँ से नदियों को पानी मिलता है और यह लाखों लोगों के जीवन व आजीविका को बनाए रखने में मदद करता है.लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण, यह स्रोत पिघल रहा है. तेज़ी से. इसने पिछले 80 वर्षों में, ओलम्पिक आकार के 64 लाख पूल के बराबर पानी खो दिया है.ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में 29 मई से 1 जून तक आयोजित हिमनद संरक्षण पर अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन ने, उन तरीक़ों को उजागर किया है जिनमें हिमनदों के सिकुड़ने से, दुनिया भर में जीवन और आजीविका के लिए ख़तरा उत्पन्न होता है.आमिना मोहम्मद ने कहा, "यह सिर्फ़ बर्फ़ नहीं है. यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भोजन, पानी और सुरक्षा है."'हमारे हिमनद दम तोड़ रहे हैं'हिमनद, बर्फ़ की चादरों के साथ, दुनिया के लगभग 70 प्रतिशत मीठे पानी को संग्रहीत करते हैं, जो उन्हें मानव अस्तित्व और अर्थव्यवस्थाओं के लिए आवश्यक बनाता है. लेकिन पिछले छह वर्षों में से पाँच वर्षों में हिमनदों को, सबसे अधिक रिकॉर्ड गति से सिकुड़ते देखा गया है.सम्मेलन के सह-आयोजक, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा, "हमारे हिमनद दम तोड़ रहे हैं.""हिमनदों के ख़त्म होने का मतलब बर्फ़ के ख़त्म होने से कहीं ज़्यादा है. ये हमारे पारिस्थितिकी तंत्र, अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने के लिए एक घातक झटका है."ग्लेशियरों के पिघलने से बाढ़ और भूस्खलन की सम्भावना और गम्भीरता बढ़ जाती है, साथ ही कृषि और वानिकी जैसे विभिन्न उद्योगों पर भी इसका असर पड़ता है.विज्ञान और कार्रवाई के बीच की खाई को पाटना UN Tajikistan आमिना मोहम्मद ने कहा कि हिमनदों के सिकुड़ने की दर का मतलब है कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को तुरन्त कार्रवाई करनी होगी.उन्होंने कहा, "हमारे लोगों और हमारे ग्रह के लिए अब कार्रवाई करने का समय आ गया है."दुशान्बे में हुए सम्मेलन ने इस साल नवम्बर में ब्राज़ील में होने वाले संयुक्त राष्ट्र COP30 जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से पहले, हिमनद संरक्षण को दुनिया भर के जलवायु एजेंडे में सबसे ऊपर लाने का काम किया है.सेलेस्टे साउलो ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हिमनदें की निगरानी को मज़बूत करना और हिमनदों के ढहने की चेतावनी प्रणाली में सुधार करना "विज्ञान और सेवाओं के बीच सेतु बनाने" में मदद करेगा.ताजिकिस्तान में यूएन रैज़िडैंट कोऑर्डिनेटर (RCO) पार्वती रामास्वामी ने कहा है कि उन्होंने स्थानीय समुदायों के लिए प्रशिक्षण और ज्ञान हस्तान्तरण के माध्यम से, किसानों का समर्थन करने पर ध्यान केन्द्रित किया है.उन्होंने समझाते हुए कहा, "[प्रशिक्षण] का मतलब है कि अधिक बच्चे आपदाओं से सुरक्षित हैं, वे स्कूल जा सकते हैं, सीख सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं.”"परिवार और समुदाय सहनशील बनते हैं और समृद्ध होते हैं."

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