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यूक्रेन: खेतों में हरियाली के बजाय बिखरा बारूद, संसाधनों की क़िल्लत झेलते किसान

 - World News in Hindi

यूक्रेन में युद्ध के अग्रिम मोर्चे वाले इलाक़ों में बसे किसानों ने पिछले तीन वर्षों से जारी हिंसक टकराव की एक बड़ी क़ीमत चुकाई है. जिन खेतों में कभी फ़सलें लहलहाती थीं, अब वहाँ सुरक्षित पहुँच पाना भी किसानों के लिए मुश्किल हो गया है. अपने खेतों में बारूदी सुरंगों, विस्फोटक सामग्री को बिखरे हुए देखना, यूक्रेन के ग्रामीण परिवारों के लिए फ़िलहाल एक कठोर वास्तविकता बन गया है. हज़ारों किसान और ग्रामीण परिवार खेतों से कट गए हैं. कहीं कृषि योग्य भूमि में बारूदी सुरंगें हैं, तो कहीं संसाधनों की इतनी कमी है कि बीज और खाद खरीदना तक असम्भव हो गया है. यूक्रेन विश्व में एक बड़ा अनाज निर्यातक देशों में रहा है, मगर फ़रवरी 2022 में, रूसी सैन्य बलों के आक्रमण के बाद से ही कृषि सैक्टर में बुनियादी ढाँचे को गहरा नुक़सान पहुँचा है.कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ है और किसानों की आय में गिरावट दर्ज की गई है. Tweet URL

देश भर में बड़ी संख्या में ऐसे ग्रामीण परिवार हैं, जो खेती पर निर्भर हैं और जिन्हें बुजुर्ग या महिलाएँ चला रही हैं.ये लोग छोटे-छोटे खेतों में सब्ज़ियाँ उगाते हैं, गाय या मुर्ग़ियों की देखभाल करते हैं, और गोलाबारी के बीच, बिना बिजली, बिना बाज़ार तक पहुँच के, अपना जीवन जीने की कोशिश कर रहे हैं. जो काम कभी उनकी दिनचर्या का हिस्सा था, वह अब जानलेवा जोखिम बन चुका है.लघु किसानों और ग्रामीण परिवारों ने हिंसा के प्रभाव को सबसे ज़्यादा झेला है. बारूद के कारण कृषि भूमि का दूषण, श्रमिकों की कमी, लागत में वृद्धि और बिजली कटौती जैसी मुश्किलें इनके सामने खड़ी हैं. हज़ारों किसान परिवारों के पास ज़रूरी औज़ार, सामग्री और सेवाओं की भारी कमी है.संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द और लगातार सहायता नहीं मिली, तो ये परिवार समय पर बुआई और कटाई नहीं कर पाएंगे, जिससे न केवल उनकी आजीविका, बल्कि पूरे देश की खाद्य सुरक्षा ख़तरे में पड़ जाएगी.कृषि को नुक़सानयूक्रेन की सरकार, विश्व बैन्क, योरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र द्वारा किए गए आकलन के अनुसार, यूक्रेन के कृषि क्षेत्र को अब तक 83.9 अरब डॉलर का नुक़सान हुआ है, जबकि सिंचाई क्षेत्र को 1.6 अरब डॉलर की क्षति हुई है.FAO के अनुसार, लोगों की खेतों तक पहुँच सुनिश्चित करने और बीज, उर्वरक, भंडारण व ऊर्जा की व्यवस्था के लिए तत्काल सहायता आवश्यक है. लेकिन ज़रूरत सिर्फ आपात राहत की नहीं है, बल्कि एक संगठित और दीर्घकालिक योजना की है, ताकि यूक्रेन की कृषि-खाद्य व्यवस्था बची रहे और ग्रामीण जीवन टिकाऊ बना रहे.FAO में आपदा व सहनसक्षमता मामलों के निदेशक रेन पॉलसन ने हाल ही में ज़ैपोरिज़्का क्षेत्र का दौरा किया. उन्होंने कहा, “युद्ध अब भी लाखों लोगों को प्रभावित कर रहा है. ग्रामीण सीमावर्ती समुदाय सबसे निर्बल और सबसे कम सहायता प्राप्त करने वालों में से हैं." "ये परिवार स्वयं के लिए खड़ा होना चाहते हैं, अपनी ज़मीन पर टिके रहना चाहते हैं और कृषि सहायता इस लक्ष्य को पाने का प्रभावी तरीक़ा है.”प्रभावित परिवारों को अब तक जो सहायता दी गई है, वह काफ़ी नहीं है. कई ग्रामीण परिवारों के पीछे छूट जाने का ख़तरा अभी भी बना हुआ है. अगर मदद लगातार नहीं मिली, तो उनकी बुआई, कटाई और पुनर्निर्माण की क्षमता कमज़ोर रह जाएगी. © UNICEF/Olena Hrom यूक्रेन के ख़ारकीव में बारूदी सुरंग के चेतावनी संकेत के पास खड़ी एक बच्ची. धन-कटौती का गहराता संकट2022 के बाद से ही, FAO ने 2.5 लाख ग्रामीण परिवारों को बीज, पशु आहार, नकदी समेय अन्य सहायता प्रदान की है, और 15 हज़ार से अधिक किसानों को फ़सल बीज, भंडारण सुविधा तथा वित्तीय मदद दी है. FAO साझेदारों के साथ बारूदी सुरंगों से प्रभावित ज़मीनों का सर्वेक्षण कर खेती तक पहुँच बढ़ा रहा है.निदेशक पॉलसन नेे कहा कि, “यह काम अत्यन्त आवश्यक है…कृषि सिर्फ आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण समाज की बुनियाद है, और ये परिवार अब भी टिके हुए हैं, उन्हें केवल जीने के लिए नहीं, बल्कि आगे बढ़ने और फिर से बसने के लिए सहयोग चाहिए.”मगर, 2025-2026 के लिए यूएन एजेंसी की आपातकालीन और पुनर्निर्माण योजना को पूरी तरह लागू करने में अब भी धन की कमी बाधा बनी हुई है.वैश्विक धन-कटौती की चुनौतियों के बीच, FAO ने दानदाताओं और साझेदारों से अपील की है कि वे यूक्रेन के किसानों को और ज़्यादा सहयोग दें, क्योंकि उनकी भूमिका न केवल खाद्य सुरक्षा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और दीर्घकालिक पुनर्निर्माण के लिए भी अनमोल है.

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