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सूडान: सुरक्षा की तलाश में चाड पहुँचने वाले शरणार्थियों की संख्या में उछाल

 - World News in Hindi

सूडान में हिंसक टकराव से जान बचाने के लिए लाखों सूडानी नागरिक, पड़ोसी देश चाड में शरण लेने के लिए पहुँच रहे हैं, जोकि अब देश के पूर्वी हिस्से में आपात स्थिति की वजह बन गया है. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने आगाह किया है कि पिछले दो वर्षों में चाड में आश्रय पाने वाले सूडानी शरणार्थियों की संख्या 12 लाख से अधिक हो चुकी है. सूडान में परस्पर विरोधी सैन्य बलों के अप्रैल 2023 में भीषण हिंसक टकराव भड़क उठा था, जिसके बाद से अब तक, सूडान से 40 लाख नागरिकों ने सीमा पार करके पड़ोसी देशों में शरण ली है, और यह विश्व के सबसे गम्भीर विस्थापन संकटों में है.इनमें से 8.44 लाख सूडानी शरणार्थियों ने चाड में शरण ली है. इस संकट से पहले से ही, चाड में चार लाख से अधिक सूडानी शरणार्थी रह रहे थे, जो 2003 से 2023 के दौरान, दारफ़ूर में हिंसा से बचने के लिए वहाँ पहुँचे.यानि कुल मिलाकर, पिछले दो वर्षों के भीतर, चाड में सूडानी शरणार्थियों की संख्या 12 लाख के आँकड़े को पार कर गई है, जिससे देश के संसाधनों पर गहरा असर हुआ है. इसके मद्देनज़र, UNHCR ने चाड में मानवीय सहायता प्रयासों के लिए समर्थन का आग्रह किया है.इस वर्ष अप्रैल में, हथियारबन्द गुटों ने सूडान के नॉर्थ दारफ़ूर में हमले किए जिनमें विस्थापितों के लिए बनाए गए शिविरों को निशाना बनाया गया.ज़मज़म व अबू शौक शिविर व अल फ़शर शहर में हुए इन हमलों में कम से कम 300 लोग मारे गए, जिसके बाद हज़ारों लोगों ने सुरक्षा की तलाश में अन्य इलाक़ों का रुख़ किया.इसके एक महीने के भीतर, चाड में 68 हज़ार से अधिक सूडानी नागरिकों ने शरण ली है, और पिछले कुछ दिनों में हर दिन औसतन 1,400 लोग सीमा को पार कर रहे हैं. ये आम नागरिक गोलाबारी से आतंकित हैं और सशस्त्र गुटों की सीमा चौकियों, फ़िरौती, और सख़्त पाबन्दियों से बचते हुए भाग रहे हैं.अप्रैल 2025 से चाड में शरण लेने वाले नागरिकों ने हिंसा, सम्पत्ति नुक़सान, मानवाधिकार उल्लंघन, शारीरिक व यौन हिंसा, मनमाने ढंग से लोगों को हिरासत में लिए जाने समेत अन्य घटनाओं को बयाँ किया है. 60 प्रतिशत के अनुसार, वे अपने परिवार से अलग हो चुके हैं.स्कूली आयु के बच्चों पर इस टकराव का गहरा असर हुआ है, 66 प्रतिशत स्कूली दायरे से बाहर हैं, बड़ी संख्या में बच्चे घायल हैं.संसाधनों पर दबावमानवीय सहायता संगठनों व स्थानीय प्रशासन के प्रयासों के बावजूद, सूडानी शरणार्थियों की मदद के लिए पर्याप्त स्तर पर वित्तीय संसाधन उपलब्ध नहीं हैं. आश्रय व्यवस्था बेहद ख़राब है.कुल आवश्यकताओं का केवल 14 प्रतिशत ही पूरा किया जा सका है, और हज़ारों लोग चरम मौसम व असुरक्षा में दिन गुज़ारने के लिए मजबूर हैं.शरणार्थियों को प्रति दिन, प्रति व्यक्ति 5 लीटर जल ही मिल पा रहा है. चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में परिवारों को बेहद कठिन विकल्प चुनने पड़ रहे हैं, जिसका उनके स्वास्थ्य व गरिमा पर असर हो रहा है.2.90 लाख से अधिक शरणार्थी सीमा पर फँसे हुए हैं, और उनके असुरक्षा, हिंसा व हथियारबन्द गुटों की चपेट में आने का जोखिम है.सहायता अपीलयूएन शरणार्थी एजेंसी ने वैश्विक समुदाय से अपील की है कि सूडान में मानवाधिकारों के गम्भीर उल्लंघन मामलों का अन्त करने के लिए क़दम उठाने होंगे.सूडान में सहायता अभियान के लिए क्षेत्रीय योजना के तहत, चाड में यूएन एजेंसी व साझेदार संगठनों ने 55.37 करोड़ डॉलर की अपील की है, ताकि सूडान से चाड पहुँचने वाले लोगों को सुरक्षा, आश्रय, भोजन, जल, साफ़-सफ़ाई मुहैया कराई जा सके.UNHCR ने चेतावनी जारी की है कि यदि वित्तीय समर्थन में यदि वृद्धि नहीं की गई, तो ज़रूरतमन्दों तक समय पर जीवनरक्षक सहायता पहुँचाना कठिन हो जाएगा.

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