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ग़ाज़ा: मानवाधिकार प्रमुख ने खाद्य सहायता केन्द्र पर हुई मौतों की निन्दा की

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मानवाधिकार मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त (OHCHR) वोल्कर टर्क़ ने, मंगलवार की सुबह ग़ाज़ा में भोजन पाने की कोशिश में मारे गए लोगों की मौत की घटना की निन्दा की है. ये सभी लोग दक्षिणी हिस्से में अमेरिका और इसराइल द्वारा संचालित वितरण केन्द्र में खाद्य सहायता के लिए जुटे थे. मानवाधिकार उच्चायुक्त टर्क़ ने कहा, "नागरिकों पर जानबूझकर किए गए हमले अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का गम्भीर उल्लंघन और युद्ध अपराध हैं." यह वक्तव्य ऐसे समय में जारी किया गया है जब लगातार तीसरे दिन खाद्य सहायता पाने की कोशिश कर रहे फ़लस्तीनियों के मारे जाने की घटना हुई है.उन्होंने इसराइल से अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) द्वारा जारी क़ानूनी रूप से "बाध्यकारी आदेशों" का पालन करने, संयुक्त राष्ट्र के साथ पूर्ण सहयोग सुनिश्चित करने, और ग़ाज़ा के लोगों तक "बिना देरी के और बड़े पैमाने पर" सहायता पहुँचाने का आग्रह किया.उन्होंने कहा, "इन दायित्वों का पालन न करने का कोई भी औचित्य नहीं है."ग़ाज़ा में इसराइल व अमेरिका द्वारा संचालित मानवीय सहायता संस्था की यह निजी पहल, संयुक्त राष्ट्र की सहायता एजेंसियों के काम को दरकिनार करता है. इन एजेंसियों ने हमेशा ग़ाज़ा में बेरोकटोक सहायता आपूर्ति का आग्रह किया है ताकि वहाँ हज़ारों टन सामान पहुँचाया जा सके. अब तक जो थोड़ी बहुत सहायता ग़ाज़ा के अन्दर जाने दी गई है, वह ज़रूरत के मुक़ाबले बेहद कम है.विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा कि उनकी टीम अभी भी ग़ाज़ा में मौजूद हैं और अगर उन्हें अनुमति दी जाए तो वे ज़रूरतमन्द इलाक़ों में सहायता आपूर्ति वितरित कर सकते हैं. WHO के प्रवक्ता तारिक यासरेविच ने कहा, “इस समय हमारे पास 51 ट्रक मेडिकल सप्लाई से लदे खड़े हैं, जो उन कुछ अस्पतालों तक जाने को तैयार हैं, जहाँ अब भी काम हो रहा है. हमें पहुँच मार्ग चाहिए ताकि हम ग़ाज़ा के भीतर चिकित्सा संस्थानों के लिए सहायता रवाना कर सकें ताकि वे काम कर सकें." लेकिन, फ़िलहाल इसका ठीक उलट हो रहा है. अब उत्तरी ग़ाज़ा में कोई भी अस्पताल कार्यरत नहीं है.उन्होंने बताया कि WHO की एक टीम उत्तरी ग़ाज़ा के इंडोनेशियाई अस्पताल गई थी और “वहाँ बचे हुए सभी मरीज़ों और मेडिकल स्टाफ़ को बाहर निकाला गया… अब वह अस्पताल पूरी तरह खाली है.” भुखमरी के हालातसंयुक्त राष्ट्र समेत अन्य संगठनों ने अमेरिका-इसराइल की इस सहायता योजना की आलोचना की है, जिसमें बच्चों, बुज़ुर्गों और विकलांगजन तक राहत नहीं पहुँच पा रही है.बताया गया है कि राहत सामग्री को 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर वितरित किया जाता है, और इसके लिए लोगों को लम्बी दूरी पैदल चलकर जाना पड़ता है.मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क़ ने कहा, “नागरिकों के लिए भोजन और अन्य जीवन-रक्षक राहत सामग्री तक पहुँच में जानबूझकर बाधा डालने को युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है.”उन्होंने ग़ाज़ा के लोगों की भुखमरी के हालात का उल्लेख करते हुए पिछले 20 महीनों से आम नागरिकों के मारे जाने और बड़े पैमाने पर तबाही की भी कड़ी निन्दा की.‘क्या मुझे गोली मार दी जाएगी?’संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने 27 मई को नया सहायता केन्द्र खुलने के बाद ग़ाज़ा में कई फ़लस्तीनियों के मारे जाने की घटनाओं की तत्काल व स्वतंत्र जाँच की मांग की है.OHCHR प्रवक्ता जेरेमी लॉरेंस ने जिनीवा में पत्रकारों से कहा, “मुझे लगता है कि बीते तीन दिनों में बहुत कुछ हुआ है, सिर्फ़ उस त्रासदी से इतर, जहाँ लोग जीवित रहने के लिए खाना लेने की कोशिश कर रहे थे और उसी दौरान मारे गए." ग़ाज़ा में आम लोग इन राहत केन्द्रों तक पैदल चलने को मजबूर हैं और अब वे डरे हुए हैं. शायद वे वहाँ जाए और उन्हें लगता है, ‘क्या मुझे खाना मिलेगा या मुझे गोली मार दी जाएगी?’”प्रवक्ता लॉरेंस ने बताया कि हाल के दिनों में दक्षिणी ग़ाज़ा स्थित सहायता केन्द्र के आसपास हुई ऐसी घटनाओं के दौरान कई मीडिया रिपोर्टों में हेलीकॉप्टर, नौसैनिक जहाज, टैंक और ज़मीनी सैनिकों के सक्रिय होने का ज़िक्र है.उन्होंने कहा, “हमें इन रिपोर्टों की जानकारी है,” और यह भी बताया कि इसराइली सुरक्षा बलों (IDF) ने मंगलवार को हुई घटना पर सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म, X, पर अपना पक्ष भी जारी किया है.

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