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प्रवासी पक्षियों पर संकट: कुछ शहर बने सुरक्षित आश्रय स्थल

 - World News in Hindi

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) कई देशों में प्रवासी पक्षियों के आवास व उड़ान स्थल के संरक्षण के लिए प्रयासों में जुटा है, जिसके तहत, अनेक परियोजनाएँ संचालित की जा रही हैं. शनिवार, 10 मई, को विश्व प्रवासी पक्षी दिवस के अवसर पर पक्षियों को विलुप्ति से बचाने के कुछ अनूठे प्रयासों पर एक नज़र... हर साल वसन्त और शरद ऋतु में लाखों पक्षी प्रजनन और शीतकालीन आवासों के बीच लम्बी उड़ानें भरते हैं. ये प्रवासी पक्षी न केवल जैव विविधता बनाए रखने में मदद करते हैं, बल्कि कीट नियंत्रण और बीज वितरण जैसे पारिस्थितिकी तंत्र की ज़रूरतों में भी अहम भूमिका निभाते हैं. साथ ही, ये पक्षी अपनी यात्राओं से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों और संस्कृतियों को भी जोड़ते हैं.हालाँकि, इन पक्षियों की यात्राएँ अब पहले से कहीं अधिक ख़तरनाक हो गई हैं. जलवायु परिवर्तन, अवैध शिकार, काँच की इमारतें, बिजली के तार, और तेज़ी से घटते आवास उनके अस्तित्व को ख़तरे में डाल रहे हैं. ख़ासतौर पर शहरों में, जहाँ वे थोड़े विश्राम के लिए रुकते हैं, वही क्षेत्र अब जोखिम के केन्द्र बन चुके हैं. © FAO/Pakistan इस्तान्बुल की अनूठी पहलतुर्की का इस्तान्बुल शहर पक्षियों के अफ़्रीकी-यूरेशियाई उड़ान मार्ग पर स्थित है, जहाँ हर साल वसन्त और शरद ऋतु में हज़ारों सारस, शिकारी पक्षी और अन्य प्रजातियाँ ठहरती हैं. परन्तु शहरीकरण, हवाई अड्डे और पुल जैसी परियोजनाएँ, उनके विश्राम स्थलों को प्रभावित कर रही हैं.इसकी रोकथाम के लिए, इस्तान्बुल महानगरपालिका ने UNEP की “Generation Restoration Cities” पहल के तहत एक परियोजना शुरू की है. इसका उद्देश्य, जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के साथ-साथ नागरिकों को जागरूक बनाना है.शहर में बस अड्डों पर पोस्टर और वीडियो के ज़रिए पक्षियों के बारे में जानकारी दी जा रही है. छतों पर घास और फूल लगाए जा रहे हैं ताकि लोग स्थानीय वन्यजीवों की सराहना कर सकें. साथ ही, प्राथमिक विद्यालयों में जैव विविधता की शिक्षा देने और कार्यशाला आयोजित करने की योजना है, जहाँ नागरिक समाज, व्यवसाय और सरकार, एक साथ मिलकर हरित स्थलों के संरक्षण पर विचार करेंगे.यह पहल संयुक्त राष्ट्र के पारिस्थितिकी पुनर्बहाली दशक का हिस्सा है, जो प्राकृतिक दुनिया को पुनर्जीवित करने के लिए एक वैश्विक प्रयास है. इस्तान्बुल Journeys for Life नामक पहल का भी हिस्सा है, जिसके ज़रिए शहरों को प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित बनाया जा रहा है. Russian Raptor Research and Conservation Network / Helena Schneider साझेदारी की मिसालइस्तान्बुल की ही तरह, अमेरिका का सिएटल शहर भी प्रवासी पक्षियों के लिए स्थाई समाधान बना है. यहाँ कीटनाशकों से प्रभावित मछली‑खाने वाले ओस्प्रे पक्षियों के लिए सुरक्षित घोंसला‑मंच बनाए गए. आज शहर में 20 प्रजनन जोड़े सक्रिय हैं. यह काम 'Urban Raptor Conservancy' व नगर बाग़ विभाग ने संयुक्त रूप से किया है.काले सारस, सफ़ेद सारस, और शिकारी पक्षी, जिनमें कई प्रजातियों के चील और बाज़ शामिल हैं, अक्सर शहर के ऊपर बड़ी संख्या में चक्कर लगाते नज़र आ जाते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि वो, अपने प्रवास को जारी रखने से पहले ऊँचाई हासिल करने के लिए गर्म हवा के प्रवाह का उपयोग करते हैं.वैश्विक सहयोगप्रवासी प्रजातियों पर कन्वेंशन की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रवासी पक्षियों की कम से कम 134 प्रजातियाँ, विलुप्ति के ख़तरे में हैं. यह एक वैश्विक समझौता है, जो सीमाओं के पार यात्रा करने वाले पशुओं की रक्षा के लिए बनाया गया है.रिपोर्ट के अनुसार, 1,189 प्रवासी प्रजातियों में से 44 प्रतिशत की संख्या घट रही है और 22 फ़ीसदी विलुप्ति के कगार पर हैं.'Generation Restoration Cities' जैसी पहल, स्थानीय निवासियों को प्रेरित करने और दुनिया भर में नगरपालिका व क्षेत्रीय अधिकारियों को परस्पर अनुभव साझा करने में मदद करती हैं.UNEP के अधिकारी मिरे अतल्लाह कहते हैं, “सिएटल और इस्तान्बुल जैसे शहर यह दर्शाते हैं कि हालात बहाल करने और सुनियोजित शहरी क्षेत्र न केवल पक्षियों, बल्कि इनसानों के लिए भी सुरक्षित शरणस्थली बन सकते हैं.”यह लेख पहले यहाँ प्रकाशित हुआ.

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