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ग़ाज़ा में हर पाँच में से एक व्यक्ति पर भुखमरी का जोखिम

 - World News in Hindi

संयुक्त राष्ट्र समर्थित खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ग़ाज़ा पट्टी में पूरी फ़लस्तीनी आबादी गम्भीर खाद्य असुरक्षा से जूझ रही है और 4.7 लाख लोग विनाशकारी स्तर पर भूख का सामना कर रहे हैं. ग़ाज़ा में युद्ध शुरू हुए 19 महीने बीत चुके हैं और पिछले 70 दिनों से मानवीय सहायता आपूर्ति को वहाँ प्रवेश की अनुमति नहीं मिल पाई है. एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (आईपीसी) के इस अध्ययन के अनुसार, लोगों की गुज़र-बसर के लिए आवश्यक सामान या तो ख़त्म हो चुका है या फिर आगामी दिनों में समाप्त हो जाने की सम्भावना है.“यहाँ की पूरी आबादी पिछले कुछ समय से खाद्य असुरक्षा के ऊँचे स्तर का सामना कर रही है.”आईपीसी के विश्लेषण में खाद्य असुरक्षा को पाँच स्तरों पर आंका जाता है, पहला चरण जहाँ भूख की कोई समस्या न हो, और पाँचवा चरण जिसे अकाल परिस्थिति माना जाता है. Tweet URL

इस नए अध्ययन में अनुमान जताया गया है कि ग़ाज़ा में लगभग हर पाँच में से एक व्यक्ति, 4.70 लाख लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं.बुनियादी खाद्य सामग्री की क़ीमतों में उछाल आया है: गेहूँ के आटे की 25 किलोग्राम बोरी के दाम में फ़रवरी के बाद से अब तक तीन हज़ार प्रतिशत का उछाल आया है, और अब यह 235 डॉलर से 520 डॉलर के बीच है.खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि यदि व्यापक स्तर पर सैन्य अभियान और लम्बे समय तक खिंचते हैं और मानवीय सहायता व स्थानीय बाज़ारों के लिए सामग्री पर रोक बरक़रार रहती है, तो दैनिक गुज़र-बसर के लिए आवश्यक सामान व सेवाओं की उपलब्धता ठप हो सकती है.ग़ाज़ा में खाद्य सुरक्षा हालात पर यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब वहाँ इसराइली बमबारी की ख़बरें अब भी मिल रही हैं.फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) द्वारा ग़ाज़ा सिटी में संचालित एक स्कूल शनिवार को शाम 6.30 बजे हमले की चपेट में आया, जिससे दो लोगों की जान गई और अन्य घायल हो गए.इससे एक ही दिन पहले, उत्तरी ग़ाज़ा के जबालिया में UNRWA के एक अन्य केन्द्र पर हमले में चार लोग मारे गए थे, और यूएन एजेंसी का कार्यालय पूरी तरह बर्बाद हो गया था.आस-पास स्थित अन्य इमारतों को भी गम्भीर क्षति पहुँची है, जिसमें एक मानवीय सहायता वितरण केन्द्र भी है. गोलाबारी के समय इस केन्द्र पर कोई सहायता आपूर्ति मौजूद नहीं थी.खाद्य सामग्री की क़िल्लतUNRWA ने बताया कि ग़ाज़ा में क़रीब दो सप्ताह पहले ही यहाँ खाद्य सामग्री ख़त्म हो गई थी. ग़ाज़ा पट्टी के विभिन्न इलाक़ों में खाद्य व अन्य प्रकार की सहायता पहुँचाने के लिए इसराइली योजना को मानवतावादी समुदाय ने नकार दिया है.इस पृष्ठभूमि में, आईपीसी ने बताया कि स्थानीय आबादी की भोजन, जल, आश्रय व दवाओं समेत अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यह योजना अपर्याप्त है.आईपीसी के विश्लेषण से मानवीय सहायता एजेंसियों को यह आकलन करने में मदद मिलती है कि दुनिया भर में खाद्य आवश्यकताएँ कहाँ सबसे अधिक हैं.नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, राफ़ाह, उत्तरी ग़ाज़ा और ग़ाज़ा में 15 प्रतिशत आबादी खाद्य असुरक्षा के पाँचवे स्तर (अकाल) से जूझ रही है. वहीं अन्य इलाक़ों में भी चिन्ताजनक हालात हैं.इसराइली योजना पर संशयआईपीसी के अनुसार, ग़ाज़ा में त्रासदीपूर्ण और बद से बदतर होते हालात के बीच, इसराइल द्वारा प्रस्तावित योजना से बड़ी आबादी के लिए मानवीय सहायता वितरण के लिए अवरोध खड़े होंगे.इसराइल द्वारा हाल ही में ग़ाज़ा में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान की घोषणा की गई है. मानवीय सहायता एजेंसियों के समक्ष मौजूद चुनौतियों की मद्देनज़र, आईपीसी ने चेतावनी दी है कि अब से 30 सितम्बर तक अकाल का गम्भीर जोखिम है.चुनौतीपूर्ण हालात में, स्थानीय घर-परिवार बेहद कठिन निर्णय लेने के लिए मजबूर हैं. अनेक परिवार कूड़ा एकत्र करके उन्हें बेचकर भोजन जुटा रहे हैं. इनमें हर चार में एक प्रभावितों का कहना है कि अब कूड़े का ढेर भी किसी मूल्य का नहीं है और सामाजिक व्यवस्था दरक रही है.

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