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वैश्विक स्तर पर, नर्सों की संख्या में वृद्धि, मगर स्वास्थ्य देखभाल में असमानता भी

 - World News in Hindi

विश्व भर में स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में नर्स की संख्या में पिछले पाँच वर्षों में क़रीब 19 लाख का उछाल दर्ज किया गया है, मगर विभिन्न देशों व क्षेत्रों में उनकी सेवाएँ समान रूप से उपलब्ध नहीं हैं और विसंगति बरक़रार है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और उसके साझेदार संगठनों की एक नई रिपोर्ट में यह निष्कर्ष साझा किया गया है. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी, अन्तरराष्ट्रीय नर्स परिषद समेत अन्य संगठनों ने सोमवार को, State of the World’s Nursing 2025 report प्रकाशित की है, जिसके अनुसार, उनकी संख्या वर्ष 2018 में 2.79 करोड़ से बढ़कर 2023 में 2.98 करोड़ तक पहुँच गई है.मगर नर्सों की उपलब्धता व सेवाओं में व्याप्त असमानताओं की वजह से दुनिया के अनेक हिस्सों में बसी आबादी को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध नहीं है, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा पर असर होता है. Tweet URL

यह नई रिपोर्ट, 'अन्तरराष्ट्रीय नर्स दिवस' के अवस पर जारी की गई है, जोकि 194 सदस्य देशों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है.अध्ययन दर्शाता है कि वर्ष 2020 में 62 लाख नर्सों की कमी थी, जिसमें सुधार आया है और 2023 में यह खाई घटकर 58 लाख ही रह गई है. 2030 तक इसके 41 लाख रह जाने का अनुमान है.विसंगति पर चिन्तामगर, इस प्रगति में विभिन्न क्षेत्रों में पसरी विसंगति भी छिपी हुई हैं. दुनिया भर में क़रीब 78 प्रतिशत नर्सें उन देशों में हैं, जिनकी जनसंख्या विश्व आबादी की केवल 49 प्रतिशत है.निम्न- और मध्य-आय वाले देशों में नर्सों की पढ़ाई-प्रशिक्षण, उन्हें रोज़गार देना और उसे बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण है. इसके लिए वहाँ स्वास्थ्य प्रणाली में घरेलू निवेश किया जाना अहम है.वहीं, उच्च-आय वाले देशों में बड़ी संख्या में नर्सें सेवानिवृत हो रही हैं, जिसके लिए तैयार रहने की आवश्यकता है. इस वजह से विदेशों में प्रशिक्षित नर्सों पर बढ़ती निर्भरता की समीक्षा की जानी होगी.विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसेस ने इस रिपोर्ट में उत्साहजनक प्रगति के लिए देशों को बधाई दी है.मगर, उन्होंने सचेत किया है कि विश्व स्तर पर विसंगतियाँ बरक़रार हैं और देशों को इस रिपोर्ट के निष्कर्षों को परख कर जल्द से जल्द आगे का रास्ता तैयार करना होगा.अहम निष्कर्षनर्सिंग कार्यबल में लैंगिक प्रतिनिधित्व और समता से जुड़ी चुनौतियाँ हैं. इस क्षेत्र में अधिकाँश नर्स महिलाएँ हैं, वैश्विक कार्यबल का क़रीब 85 प्रतिशत हिस्सा विश्व भर में हर सात में से एक नर्स, विदेश में जन्मी है, जोकि अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन पर निर्भरता को दर्शाता है. उच्च-आय वाले देशों में यह आकँडा 23 फ़ीसदी है जबकि निम्न-आय वाले देशों मे यह केवल 8 प्रतिशत है उच्च-आय वाले देशों की तुलना में निम्न-आय वाले देशों में पढ़ाई पूरी करने वाली नर्सों की संख्या बढ़ रही है
कुछ देशों में नर्सों की स्नातक दर में प्रगति के बावजूद, बढ़ती आबादी और रोज़गार के कम अवसर होने की वजह से नर्सों की संख्या पर्याप्त स्तर पर नहीं पहुँची है
विश्व भर में नर्स कार्यबल अपेक्षाकृत युवा है. 33 फ़ीसदी नर्सों की आयु 35 वर्ष से कम है, जबकि अगले 10 वर्ष में रिटायर होने वाली नर्सों की संख्या 19 फ़ीसदी है
62 प्रतिशत देशों में अत्याधुनिक देखभाल भूमिकाओं के लिए नर्स की मौजूदगी है, जोकि 2020 की तुलना में (53) ठोस वृद्धि को दर्शाता है
मानसिक स्वास्थ्य व देखभाल कर्मियों का कल्याण एक चिन्ता का विषय है. केवल 42 प्रतिशत देशों में ही नर्सों के लिए मानसिक स्वास्थ्य समर्थन उपलब्ध है.

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