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ख़र्चों में कटौती और दक्षता बढ़ाने के लिए, यूएन प्रमुख ने दिया सुधारों पर बल

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने वित्तीय दबाव और बढ़ती वैश्विक चुनौतियों की पृष्ठभूमि में सदस्य देशों को यूएन में व्यापक स्तर पर ढाँचागत सुधारों के प्रयासों से अवगत कराया है. उन्होंने सोमवार को न्यूयॉर्क में एक बैठक में प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन का खाका प्रस्तुत किया: ख़र्चों में कटौती, कामकाज व अभियान संचालन में सरलता, और शान्ति व सुरक्षा, विकास व मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आधुनिक दृष्टिकोण.यूएन प्रमुख ने कहा कि यह जोखिम से भरा दौर है, मगर अवसरों व दायित्व का भी है. “संयुक्त राष्ट्र का मिशन पहले से कहीं अधिक ज़रूरी है.”यूएन प्रमुख ने, इससे पहले मार्च में यूएन80 नामक एक पहल पेश की थी, जोकि तीन अहम प्राथमिकताओं पर टिकी है: कामकाज में दक्षता को बढ़ाना, सदस्य देशों द्वारा निर्धारित शासनादेश (mandate) के क्रियान्वयन का आकलन, और यूएन प्रणाली में ढाँचागत सुधारों पर विचार.इस प्रक्रिया के निष्कर्ष, सितम्बर 2025 में, अगले वर्ष यानि 2026 के लिए पेश किए जाने वाले बजट में नज़र आएंगे.बजट कटौतीयूएन प्रमुख ने बताया कि इन क़दमों से संयुक्त राष्ट्र के कुल बजट में सार्थक कटौती होने की सम्भावना है. उदाहरणस्वरूप, राजनैतिक एवं शान्तिरक्षा मामलों के विभाग में कर्मचारियों की संख्या में 20 फ़ीसदी तक की कटौती हो सकती है, ताकि एक जैसा काम करने वाले पदों की संख्या घटाई जाए.महासचिव ने कहा कि इस स्तर की कटौती, पूरी यूएन प्रणाली में एक मानदंड के रूप में स्थापित हो सकती है, हालाँकि हर विभाग के विशिष्ट पहलुओं का इसमें ध्यान रखा जाएगा.एक अन्य उदाहरण, आतंकवाद-रोधी कार्यालय में आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई से जुड़े सभी कार्यों को शामिल करना है. इसके तहत, इमारतों की किराया लीज़ ख़त्म की जाएगी और पदों को महंगे ड्यूटी स्टेशन से हटाकर कम महंगे स्थानों पर भेजा जाएगा. कामकाज में बेहतरीयूएन प्रमुख ने कहा कि न्यूयॉर्क और जिनीवा मुख्यालयों में विभागों से पूछा गया है कि क्या कुछ टीमों को कम ख़र्चों वाले ड्यूटी स्टेशन पर भेजा जाना, उनमें कमी लाना या फिर उन्हें पूरी तरह से ख़त्म करना सम्भव है या नहीं.पहले कार्यप्रवाह (workstream) में दैनिक कामकाज में दक्षता बढ़ाने पर बल दिया जाएगा, सेवाओं का केन्द्रीयकरण होगा, कर्मचारियों को कम ख़र्चों वाले ड्यूटी स्टेशन पर भेजा जाएगा और स्वचालन (automation) और डिजिटल प्लैटफ़ॉर्म के इस्तेमाल में विस्तार किया जाएगा.दूसरे कार्यप्रवाह में, मौजूदा शासनादेश (mandates) की क्रियान्वयन प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी.आरम्भिक समीक्षा में, यूएन सचिवालय में 3,600 से अधिक विशिष्ट शासनादेशों की पहचान की गई है, और एक विस्तृत विश्लेषण जारी है.महासचिव ने कहा कि इन शासनादेशों की विशाल संख्या, और उनके क्रियान्वयन के लिए ज़रूरी लालफ़ीताशाही का सीमित संसाधनों वाले सदस्य देशों पर बड़ा बोझ पड़ता है. उनके अनुसार, सदस्य देशों द्वारा इस अवसर पर इन शासनादेशों की स्वयं समीक्षा भी की जा सकती है.ढाँचागत बदलावयूएन प्रमुख ने बताया कि तीसरा कार्यप्रवाह पहले से जारी है, जोकि ढाँचागत बदलावों पर केन्द्रित है. यूएन के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुरुआत में क़रीब 50 सुझाव जमा किए हैं.शान्ति व सुरक्षा, विकास, मानवाधिकार, मानवतावाद, प्रशिक्षण व शोध और अन्य विशेषीकृत एजेंसियों में कामकाज को समीक्षा के लिए चुना गया है.उन्होंने यूएन के समक्ष मौजूद नक़दी संकट पर भी बात की और कहा कि यह पहल, पिछले कई महीने से जारी नक़दी संकट का जवाब नहीं है, बल्कि किफ़ायती ढंग से कामकाज पर बल देने की है.उन्होंने कहा कि नक़दी संकट की एक सीधी वजह है, बक़ाया धनराशि. कुछ सदस्य देश समय पर अपना वित्तीय योगदान देने में विफल रहे हैं, लेकिन ढाँचागत सुधार उसका जवाब नहीं है. UN Photo/Manuel Elias यूएन80 पहल पर महासभा की एक अनौपचारिक बैठक का दृश्य. बक़ाया भुगतान की प्रतीक्षायूएन महासभा की पाँचवी समिति (प्रशासनिक व बजट सम्बन्धी) में नियंत्रक के अनुसार, वर्ष 2025 के लिए नियमित बजट, 3.5 अरब डॉलर, था मगर अब तक केवल 1.8 अरब डॉलर की धनराशि ही प्राप्त हुई है. यह 50 फ़ीसदी की कमी को दर्शाता है.30 अप्रैल तक, पहले की बक़ाया धनराशि मिलाकर कुल 2.4 अरब डॉलर का भुगतान नहीं किया गया है. अमेरिका पर 1.5 अरब डॉलर, चीन पर 59.7 करोड़ डॉलर, रूस पर 7.2 करोड़ डॉलर, सऊदी अरब पर 4.2 करोड़ डॉलर की धनराशि बक़ाया है. मैक्सिको को 3.8 करोड़ डॉलर, वेनेज़्वेला को 3.8 करोड़ डॉलर का भुगतान करना है, जबकि अन्य सदस्य देशों पर 13.7 करोड़ डॉलर की धनराशि बक़ाया है.वहीं, यूएन शान्तिरक्षा बजट (वर्ष में जुलाई से जून तक) में पहले की बक़ाया धनराशि के साथ 2.7 अरब डॉलर का भुगतान होना है.सदस्य देशों के साथ विमर्शमहासचिव गुटेरेश ने सदस्य देशों को बताया है कि वह उनके साथ मौजूदा वित्तीय स्थिति, नक़दी संकट व अन्य सुधारों पर चर्चा करेंगे, उनसे दिशानिर्देश लेंगे और ठोस प्रस्तावों को उनके समक्ष पेश करेंगे.उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में यूएन कर्मचारियों व उनके प्रतिनिधियों का पक्ष भी सुना जा रहा है और ज़रूरी बदलाव की प्रक्रिया में पेशेवराना व मानवीय रुख़ अपनाया जाएगा.महासचिव ने कहा कि यूएन80 पहल, संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था को मज़बूत करने का एक अहम अवसर है, उन लोगों के लिए वादों को साकार करने के लिए जो इस संगठन पर निर्भर हैं.

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