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बारूदी सुरंगों के ख़तरों से निपटने के लिए, वैश्विक कार्रवाई का आग्रह

 - World News in Hindi

विश्व भर में, 10 करोड़ से अधिक लोगों पर बारूदी सुरंगों, युद्ध के दौरान इस्तेमाल में लाए गए विस्फोटकों और अन्य आयुध सामग्री के अवशेषों की चपेट में आने का जोखिम है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शुक्रवार, 4 अप्रैल, को ‘अन्तरराष्ट्रीय बारूदी सुरंग जागरूकता दिवस’ के अवसर पर यह चिन्ता व्यक्त की है. लड़ाई ख़त्म होने के सालों बाद भी हिंसक संघर्षों और युद्धों के दौरान बिछाई गई बारूदी सुरंगों और विस्फोटकों से आम नागरिकों, शान्तिरक्षकों और मानवीय राहतकर्मियों को जान का जोखिम बना रहता है.यूएन प्रमुख ने कहा कि बन्दूकों के शान्त हो जाने के बाद भी, युद्ध के इन अवशेष मौजूद हैं, मैदानों, सड़कों और रास्तों पर फैले हुए हैं, जिससे मासूस आम नागरिकों के जीवन और समुदायों की आजीविका पर ख़तरा है.अफ़ग़ानिस्तान से म्याँमार तक, सूडान से यूक्रेन, सीरिया, क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े और उससे परे तक, ये घातक विस्फोटक सामग्री, ग्रामीण व शहरी इलाक़ों में बिखरी हुई है. आम नागरिक इसकी चपेट में आने से हताहत होते हैं और विकास व मानवीय सहायता अभियान के दौरान मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. Tweet URL

एक अनुमान के अनुसार, हर एक घंटे में विस्फोटक अवशेषों की वजह से एक व्यक्ति हताहत है, जिनमें अनेक बच्चे भी हैं.इस वर्ष, अन्तरराष्ट्रीय दिवस की थीम है: सुरक्षित भविष्य यहाँ शुरू होता है. इसके ज़रिये यह दर्शाया गया है कि बारूदी सुरंगों से निपट करके, किस तरह से तबाह हुए समुदायों को फिर से खड़ा किया जा सकता है.बारूदी सुरंग के विरुद्ध कार्रवाई के लिए यूएन सेवा (UNMAS) ने इस प्रक्रिया में नवाचारी समाधानों पर बल दिया है और उन्हें समावेशी बनाए जाने की अपील की है.यूएन सेवा के अनुसार, हिंसक टकराव के दौरान शारीरिक विकलांगता का शिकार लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए परियोजनाओं में निवेश किया जाना अहम है.UNMAS ने पिछले दो दशकों के दौरान विस्फोटक सामग्री के ख़तरों से निपटने के लिए आवश्यकता अनुसार अपने तौर-तरीक़ों में बदलाव किए हैं. इससे आम नागरिकों, शान्तिरक्षकों व मानवीय सहायताकर्मियों को मदद मिली है, विशेष रूप से युद्ध और उसके बाद सर्वाधिक प्रभावित इलाक़ों में.अन्तरराष्ट्रीय दिवसवर्ष 1990 के शुरुआती सालों में नागरिक समाज संगठनों द्वारा पुरज़ोर ढंग से आवाज़ उठाए जाने के बाद अन्तरराष्ट्रीय समुदाय ने बारूदी सुरंगों के इस्तेमाल के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अपनाया.1997 में नॉर्व की राजधानी ओस्लो में एक अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान एक सन्धि पर सहमति बनी, जिसके तहत बारूदी सुरंगों का इस्तेमाल करने, उनके भंडारण और उत्पादन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसम्बर 2005 में हर साल 4 अप्रैल को ‘बारूदी सुरंग के प्रति जागरूकता एवं बारूदी सुरंग कार्रवाई में सहायता का अन्तरराष्ट्रीय दिवस’ मनाने की घोषणा की थी.सोमालिया में चुनौतीसोमालिया में कामचलाऊ विस्फोटक के रूप में इस्तेमाल में लाई जाने वाली आयुध सामग्री (आईईडी), देश की शान्ति व सुरक्षा के लिए एक बड़ा ख़तरा है. 2024 में ऐसी 574 आईईडी की वजह से 1,400 लोग हताहत हुए थे.सोमालिया के यूएन महासचिव के विशेष प्रतिनिधि जेम्स स्वॉन ने कहा कि बारूदी सुरंगों और कामचलाऊ विस्फोटकों से नागरिक आबादी पर गहरा असर हो रहा है.“आज, हम उन लोगों के सम्मान में यहाँ है, जिन्होंने इस घातक विस्फोटकों की चपेट में आकर अपना जीवन खो दिया. हम सोमालियाई सरकार व साझेदार संगठनों के साथ मिलकर इस घातक ख़तरे में कमी लाने के लिए अपने संकल्प को दोहराते हैं.”बारूदी सुरंग व विस्फोटक सामग्री की चुनौती से निपटने के लिए स्थानीय कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, राष्ट्रीय स्तर पर क्षमता निर्माण किया गया है और जीवनरक्षक उपकरण भी मुहैया कराए गए हैं.महासचिव गुटेरेश ने सभी सदस्य देशों से अपने अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी मानदंडों को निभाने और क्लस्टर आयुध सामग्री, पारम्परिक हथियारों व बारूदी सुरंगों पर पाबन्दी समेत अन्य अहम सन्धियों का हिस्सा बनने की अपील की है.उन्होंने कहा, “बारूदी सुरंग कार्रवाई कारगर है. एक साथ मिलकर, आइए, हम सुरक्षित भविष्यों का निर्माण करें – जिसकी शुरुआत यहीं पर, अभी होती हो.”

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