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ग़ाज़ा: युद्धविराम दरकने के बाद, 'गोलाबारी, हमलों में हर दिन 100 बच्चे हताहत'

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फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) के प्रमुख फ़िलिपे लज़ारिनी ने कहा है कि ग़ाज़ा में 18 मार्च को फिर शुरू हुए हमलों व बमबारी में हर दिन कम से कम 100 बच्चों की या तो जान जा रही है या फिर वे घायल हुए हैं. इस बीच, मानवीय सहायता आपूर्ति न हो पाने की वजह से ज़रूरतमन्द आबादी तक राहत पहुँचा पाना मुश्किल साबित हो रहा है. यूएन एजेंसी प्रमुख ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर अपने सन्देश में कहा कि युवा ज़िन्दगियाँ कम उम्र में ही ख़त्म हो रही हैं, जबकि बच्चे इसके ज़िम्मेदार भी नहीं हैं. 1.5 साल पहले ग़ाज़ा युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 15 हज़ार बच्चों के मारे जाने की ख़बर है.फ़िलिपे लज़ारिनी ने कहा कि इस वर्ष की शुरुआत में युद्धविराम लागू होने से बच्चों के पास बचने और फिर बच्चे बन जाने का अवसर था. लेकिन युद्ध फिर शुरू होने की वजह से उनका बचपन छीना जा रहा है. Tweet URL

UNRWA प्रमुख ने कहा कि यह युद्ध हमारी साझा मानवता पर एक धब्बा है. बच्चों के मारे जाने को किसी भी प्रकार से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता है, भले ही वे कहीं भी हो. इसके मद्देनज़र, उन्होंने युद्धविराम लागू किए जाने की अपील दोहराई है.संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों को बताया कि ग़ाज़ा पट्टी में इसराइली सैन्य बलों द्वारा जगह खाली करने के आदेश के बाद, हज़ारों फ़लस्तीनी फिर से विस्थापित हुए हैं.उन्होंने यूएन मानवतावादी कार्यालय के हवाले से बताया कि इन विस्थापन आदेशों की वजह से आम नागरिकों पर हिंसा की चपेट में आने और अपनी गुज़र बसर के लिए ज़रूरी सेवाओं से वंचित होने का जोखिम है.सहायता प्रयासों पर जोखिमग़ाज़ा के लिए सभी सीमा चौकियाँ बन्द हुए एक महीना बीत चुका है और पिछले कई हफ़्तों से यहाँ मानवीय सहायता की आपूर्ति नहीं हो पाई है.उधर, विश्व खाद्य कार्यक्रम ने आगाह किया है कि ग़ाज़ा में खाद्य सामग्री ख़त्म होती जा रही है और सहायता कार्यक्रम धीरे-धीरे बन्द हो रहे हैं. यूएन एजेंसी के समर्थन से संचालित ब्रैड बनाने वाली सभी बेकरी पहले ही बन्द हो चुकी हैं. खाद्य सामग्री का वितरण जल्द ही बन्द होने की आशंका है.ग़ाज़ा में साफ़-सफ़ाई की व्यवस्था बेहद चिन्ताजनक हालात में हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जोखिम बढ़ रहा है. अल-मवासी इलाक़े में अस्थाई शिविरों में गंदगी की वजह से लोगों में खुजली व अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ सामने आ रही हैं.इसके इलाज के लिए रसायन व दवाओं की ज़रूरत है, मगर सीमा चौकियाँ बन्द होने की वजह से यह उपचार सम्भव नहीं हो पा रहा है.यूएन एजेंसियों ने आगाह किया है कि खाद्य सामग्री की लूटपाट की घटनाएँ और असुरक्षा फिर से बढ़ रही है, जिसकी वजह से यहाँ मानवीय सहायता क़ाफ़िलों का न पहुँच पाना है.लापता कर्मचारीग़ाज़ा में फ़लस्तीनी रैड क्रेसेन्ट सोसाइटी ने शुक्रवार को अपने लापता चिकित्साकर्मी के बारे में जल्द से जल्द जानकारी दिए जाने और 23 मार्च को गोलीबारी में 15 चिकित्साकर्मियों व मानवीय सहायताकर्मियों की मौत होने की स्वतंत्र जाँच कराए जाने की मांग की है.पिछले सप्ताह, फ़लस्तीनी रैड क्रेसेन्ट सोसाइटी और यूएन मानवतावादी कार्यालय की एक साझा टीम ने राफ़ाह में एक उथली क़ब्र का पता लगाया था. यहाँ से फ़लस्तीनी रैड क्रेसेन्ट के आठ चिकित्साकर्मियों, सिविल डिफ़ेंस के छह कर्मचारियों और एक यूएन सदस्य के शव बरामद हुए.बताया गया है कि 23 मार्च को बमबारी का शिकार हुए पीड़ितों तक मदद पहुँचाने की कोशिश में ये सभी कर्मचारी इसराइली गोलीबारी का शिकार हो गए थे.फ़लस्तीनी रैड क्रेसेन्ट सोसाइटी ने यह पुष्टि की है कि उनकी टीम का एक सदस्य, असद, अभी लापता है और यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी मौत हो चुकी या फिर हिरासत में रखा गया है.टीम के सदस्यों ने इस घटना की अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर एक स्वतंत्र जाँच कराए जाने की मांग की है. उन्होंने इसराइली सरकार के पक्ष को चुनौती है और पीड़ितों व उनके परिजन के लिए न्याय का आग्रह किया है.

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