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ग़ाज़ा: एक महीने से अधिक समय से, 10 लाख बच्चे ज़रूरी सहायता से वंचित

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संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने कहा है कि ग़ाज़ा पट्टी में मानवीय सहायता आपूर्ति पर पाबन्दी की वजह से 10 लाख से अधिक बच्चों पर गम्भीर असर हो रहा है. इसके मद्देनज़र, यूएन एजेंसी ने उनकी भलाई व जीवनरक्षा के लिए, बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा किए जाने की अपील की है. यूएन एजेंसी ने शनिवार को जारी अपने एक वक्तव्य में बताया कि 2 मार्च के बाद से अब तक, ग़ाज़ा में राहत सामग्री को पहुँचाने की अनुमति नहीं दी गई है. 7 अक्टूबर 2023 को युद्ध शुरू होने के बाद से ऐसी पाबन्दी की यह सबसे लम्बी अवधि है. Tweet URL

इन हालात में भोजन, सुरक्षित जल, आश्रय व्यवस्था के लिए सामान व मेडिकल आपूर्ति समेत अन्य महत्वपूर्ण सामग्री की क़िल्लत महसूस की जा रही है.यूनीसेफ़ ने चेतावनी दी है कि इन अति-आवश्यक सामान के अभाव में ग़ाज़ा में कुपोषण, बीमारियों समेत ऐसी स्वास्थ्य स्थितियों के उभरने का जोखिम है, जिनकी आसानी से रोकथाम की जा सकती है.मध्य पूर्व व उत्तर अफ़्रीका के लिए यूएन एजेंसी के क्षेत्रीय निदेशक ऐडुअर्ड बेइगबेडर ने बताया कि ग़ाज़ा में प्रवेश के लिए बड़ी संख्या में मानवीय सहायता क़ाफ़िले सीमा चौकी के दूसरी ओर तैयार हैं.“इसमें से अधिकाँश सहायता जीवनरक्षक है, मगर ज़िन्दगियों को बचाने के बजाय यह भंडारण केन्द्रों में रखी है. इसे तत्काल पहुँचाने की अनुमति देनी होगी. यह कोई चुनने या परोपकारिता की बात नहीं है, यह अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत एक दायित्व है.”युवा ज़िन्दगियों पर जोखिमयूनीसेफ़ ने आगाह किया है कि कुपोषण का उपचार करा रहे बच्चों पर गम्भीर जोखिम है, चूँकि विस्थापन आदेशों या बमबारी की वजह से अब तक 21 केन्द्र बन्द हो चुके हैं.बहुत कम संख्या में नवजात शिशुओं को खाने के लिए तैयार भोजन मिल पा रहा है. यूनीसेफ़ को मानसिक स्वास्थ्य व मनोसामाजिक सेवाओं के लिए सेवाओं में कटौती करने के लिए भी मजबूर होना पड़ा है.युद्धविराम के दौरान, यूनीसेफ़ ने कुँओं व जल केन्द्रों की मरम्मत का कार्य शुरू किया था, मगर बमबारी फिर शुरू होने के कारण, अनेक कुँओं को फिर से क्षति पहुँचने का जोखिम है.UNICEF ने बताया है कि 10 लाख लोगों के लिए पेयजल की सुलभता प्रति दिन प्रति व्यक्ति 16 लीटर से घट कर, छह लीटर पहुँच गई है.बताया गया है कि ईंधन के ख़त्म होने की स्थिति में यह घटकर केवल चार लीटर तक रह जाएगी, जिसके कारण परिवारों को असुरक्षित जल पीने के लिए मजबूर होना पड़ेगा और बीमारियों के फैलने का जोखिम बढ़ेगा.इसके मद्देनज़र, यूनीसेफ़ ने इसराइली प्रशासन से आग्रह किया है कि ग़ाज़ा में 10 लाख से अधिक बच्चों की भलाई के लिए, बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा किया जाना अहम है.

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