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UN चीफ की तालिबान से अपील, 'संयुक्त राष्ट्र के लिए महिलाओं को करने दें काम, बैन वापस लें'

UN Chief Urges Taliban: Allow Women to Work for the UN, Lift the Ban - World News in Hindi

न्यूयॉर्क । संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने तालिबान द्वारा अफगान महिलाओं और युवतियों पर लगातार थोपी जा रही भेदभावपूर्ण नीतियों पर गहरी फिक्र जाहिर की है। उन्होंने अफगान महिलाओं के संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने पर लगी रोक को तुरंत हटाने और देश भर में संयुक्त राष्ट्र के परिसरों तक उनकी सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के पहुंच सुनिश्चित करने की अपनी मांग को फिर से दोहराया है। गुटेरेस ने कहा कि सार्वजनिक जीवन, शिक्षा और रोजगार के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की पूरी भागीदारी पर लगी रोक उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। साथ ही, यह अफगानिस्तान के आर्थिक विकास, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में फिर से शामिल होने की राह में एक बड़ी बाधा बनी हुई है। गुटेरेस का यह बयान ऐसे समय में आया है जब 7 सितंबर को अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) परिसरों में अफगान महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगे हुए एक साल पूरा हो गया है। यूएन प्रमुख ने तालिबान से आग्रह किया कि वे यूएन के लिए काम करने वाली अफगान महिलाओं पर लगी रोक को तुरंत हटाएं और यूएन परिसरों तक उनकी सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के पहुंच सुनिश्चित करें।
"ये प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। इसमें यूएन चार्टर भी शामिल है। ये संगठन की उस क्षमता को कमजोर करते हैं जिसके जरिए वह अपना काम पूरा करता है और अफगान लोगों तक जीवन बचाने वाली और अन्य सहायता पहुंचाता है, खासकर ऐसे समय में जब उनकी जरूरतें बहुत ज्यादा हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "अपने काम को पूरा करने और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के अनुसार जरूरतमंद लोगों, खासकर महिलाओं और लड़कियों तक पहुंचने और उनकी मदद करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के सभी कर्मचारियों की अपने कार्यस्थलों तक बिना किसी रुकावट के पहुंच बहुत जरूरी है। यह सुनिश्चित करना कि महिलाएं दूसरी महिलाओं और लड़कियों तक मानवीय सहायता और जरूरी सेवाएं पहुंचा सकें, एक प्रभावी और सिद्धांतों पर आधारित प्रतिक्रिया के लिए बहुत जरूरी है।"
अपने बयान में, गुटेरेस ने तालिबान से यह भी आग्रह किया कि वे अफगान महिलाओं और लड़कियों पर लगाए गए सभी प्रतिबंधों को हटाएं और अफगान समाज के सभी पहलुओं में उनकी पूरी, समान और सार्थक भागीदारी के अधिकार का सम्मान करें।
पिछले महीने, यूएन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि तालिबान के शासन में अफगानिस्तान में संस्थागत रूप से लिंग-आधारित दमन और गहरा हो गया है, जबकि अफगान आबादी, खासकर महिलाओं और लड़कियों पर प्रतिबंध बढ़ते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों ने कहा, "किसी देश के जीवन में पांच साल का समय छोटा हो सकता है, लेकिन एक बच्चे के जीवन में यह बहुत लंबा समय होता है। लड़कियों की एक पूरी पीढ़ी को अब माध्यमिक शिक्षा से वंचित कर दिया गया है। जो लड़की प्रतिबंध शुरू होने के समय छठी कक्षा में थी, वह बिना एक भी दिन स्कूल गए वयस्क हो रही है।"
उन्होंने एक अफगान लड़की के हवाले से कहा: "मुझे शिक्षा से वंचित हुए पांच साल हो गए हैं। यह महसूस करना बहुत निराशाजनक है कि आप आगे नहीं बढ़ सकते, बल्कि वहीं अटके हुए हैं जहां आप पांच साल पहले थे।"
विशेषज्ञों ने फिर से कहा कि तालिबान द्वारा मौलिक अधिकारों से "जानबूझकर और लक्षित लिंग-आधारित वंचित करना" लिंग के आधार पर "उत्पीड़न के मानवता के खिलाफ अपराध" के बराबर है। चूंकि यह दमन जेंडर-आधारित भेदभाव, उत्पीड़न और वर्चस्व वाली एक संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा है, इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि इसे "लिंग-भेद" भी कहा जा सकता है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से अपील की कि वे "लिंग-भेद को मानवता के खिलाफ एक अलग अपराध" के तौर पर कानूनी रूप से मान्यता देने का सक्रिय रूप से समर्थन करें।
विशेषज्ञों के अनुसार, तालिबान ने अफगान आबादी पर दमनकारी उपाय लागू करना जारी रखा है। इनमें अदालतों के आपराधिक नियमों से जुड़ा एक आदेश भी शामिल है, जो महिलाओं के खिलाफ हिंसा की इजाजत देता है, बशर्ते उससे "हड्डियां न टूटें" या "साफ तौर पर चोट के निशान न पड़ें"। उन्होंने बताया कि पति-पत्नी के अलग होने से जुड़ा एक अन्य आदेश परोक्ष रूप से बाल विवाह की इजाजत देता है और महिलाओं व लड़कियों के लिए शोषणकारी या जबरन शादी से निकलना बेहद मुश्किल बना देता है; साथ ही, ये आदेश धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भी भेदभाव करते हैं।
--आईएएनएस

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Web Title-UN Chief Urges Taliban: Allow Women to Work for the UN, Lift the Ban
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