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ईरान वार्ता में बढ़ी जेडी वेंस की भूमिका, सफलता-नाकामी दोनों का दांव उपराष्ट्रपति पर

JD Vance Role Grows in Iran Talks; Vice President Stakes Reputation on Success or Failure - World News in Hindi

वाशिंगटन। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के साथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संवेदनशील एवं अत्यंत महत्वपूर्ण कूटनीति का मुख्य चेहरा बनकर उभरे हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच चल रही इस उच्च स्तरीय वार्ता की कमान संभाली है, जो मध्य पूर्व के समीकरणों को एक नया आकार दे सकती है। इसके साथ ही, वेंस इस शांति समझौते से जुड़े उन बड़े राजनीतिक जोखिमों का भी सामना कर रहे हैं, जिसकी अमेरिका के रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही दलों के राजनेता कड़ी आलोचना कर रहे हैं। स्विट्जरलैंड में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर हो रहे इस वार्तालाप को ट्रंप प्रशासन तेहरान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को एक नया मोड़ देने के इस प्रयास को एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में देख रहा है। वेंस ने पहले कहा था, "राष्ट्रपति ट्रंप ने हमसे ईरान के लोगों के साथ अपने संबंधों को बदलने के लिए एक नया रास्ता खोलने और मदद के लिए हाथ बढ़ाने को कहा है।" उन्होंने कहा कि अगर ईरान की लीडरशिप इलाके में अस्थिरता और परमाणु हथियारों की चाहत को छोड़ दे, तो अमेरिका ईरान के साथ अपने "संबंधों को पूरी तरह से बदलने" को तैयार है।
पिछले हफ्ते ईरान के साथ ट्रंप के समझौता ज्ञापन की घोषणा के बाद से उपराष्ट्रपति की भूमिका काफी बढ़ गई है। जबकि विदेश सचिव मार्को रुबियो समेत सरकार के शीर्ष नेतृत्व के ज्यादातर लोगों की नजरों से दूर रहे हैं। वेंस सरकार के प्रमुख मैसेंजर और नेगोशिएटर बन गए हैं। उनकी अहमियत को खुद ट्रंप ने हाईलाइट किया था।
बातचीत से पहले, राष्ट्रपति ट्रंप ने मजाकिया लहजे में कहा था, "अगर यह काम कर गया, तो मैं क्रेडिट लूंगा, अगर यह काम नहीं किया, तो मैं जेडी को दोष दूंगा। जेडी, तुम्हें सावधान रहना चाहिए।"
डेमोक्रेटिक सीनेटर कोरी बुकर ने इस समझौते को "एक तरह से सरेंडर" बताया और कहा, "ईरान को सारे फायदे मिलेंगे, सचमुच अरबों-खरबों डॉलर।" उन्होंने इस डील को "एक भयानक विफलता" करार दिया।
रिपब्लिकन की तरफ से भी आलोचना सामने आई। सीबीएस ने सीनेटर टेड क्रूज, जॉन कॉर्निन, टॉम कॉटन और बिल कैसिडी की टिप्पणी दिखाई, जिसमें उन्होंने चिंता जताई कि ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं को फिर से बनाने और रीजनल प्रॉक्सी को समर्थन करने के लिए नए आर्थिक रिसोर्स का इस्तेमाल कर सकता है।
आलोचना के बावजूद, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि बातचीत एक बड़ी डिप्लोमैटिक कामयाबी है।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि यह बातचीत "एक ऐसा कदम है जो कोई दूसरी सरकार कभी नहीं कर पाई" क्योंकि इसमें ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सीधा संपर्क हो रहा है।
वाल्ट्ज़ ने कहा, "हमें इस प्रक्रिया को एक मौका देना होगा। हमें शांति को एक मौका देना होगा।"
पूर्व रक्षा सचिव मार्क एस्पर ने समझौते के बिंदुओं पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार को बातचीत जारी रखने के लिए समय दिया जाना चाहिए।
एस्पर ने कहा, "मुझे लगता है जैसा उपराष्ट्रपति ने कहा, 'चलो इसे एक मौका देते हैं और देखते हैं कि यह काम करता है या नहीं'।"
वेंस के सामने राजनीतिक रूप से बड़ी चुनौती है। ट्रंप के प्रमुख सहयोगियों में शामिल और रिपब्लिकन पार्टी के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने वाले वेंस पर अब उस समझौते को जनता के सामने रखने और उसका बचाव करने की जिम्मेदारी है, जिसे विदेश नीति के कट्टर समर्थकों के साथ-साथ ट्रंप के कई समर्थक भी विवादास्पद मान रहे हैं।
इसलिए, 60 दिन की बातचीत के नतीजे ईरान से आगे भी हो सकते हैं। इसमें कामयाबी मिलने से वेंस की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के एक बड़े शख्सियत के तौर पर पहचान मजबूत होगी। नाकामी मिलने पर उन्हें सरकार के तरीके के समर्थक और विरोधी, दोनों तरह के लोगों की आलोचना का सामना करना पड़ेगा। इससे यह बातचीत उनके राजनीतिक करियर के सबसे अहम कामों में से एक बन जाएगी।
--आईएएनएस

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Web Title-JD Vance Role Grows in Iran Talks; Vice President Stakes Reputation on Success or Failure
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