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मणिपुर हिंसा के खिलाफ अमेरिका के तीन प्रांतों में भारतीय-अमेरिकियों का विरोध-प्रदर्शन

Indian-Americans protest in three US states against Manipur violence - World News in Hindi

वाशिंगटन। भारतीय-अमेरिकियों और सहयोगियों ने मणिपुर में चल रही जातीय हिंसा की निंदा करने के लिए पूरे सप्ताहांत अमेरिकी प्रांतों कैलिफोर्निया, न्यू जर्सी और मैसाचुसेट्स में विरोध-प्रदर्शन किया, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों विस्थापित हुए हैं। ये विरोध-प्रदर्शन पिछले सप्ताह के एक भयावह वीडियो की प्रतिक्रिया में थे, जिसमें हिंसा प्रभावित राज्य में पुरुषों के एक समूह द्वारा दो युवा आदिवासी महिलाओं को नग्न अवस्था में घुमाते हुए दिखाया गया था। कैलिफोर्निया में, भारतीय-अमेरिकी और सहयोगी नॉर्थ अमेरिकन मणिपुर ट्राइबल एसोसिएशन (एनएएमटीए), इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (आईएएमसी) और अंबेडकर किंग स्टडी सर्कल सहित कई समूहों द्वारा आयोजित विरोध-प्रदर्शन के लिए ओकलैंड सिटी हॉल की सीढ़ियों पर एकत्र हुए।
एनएएमटीए के संस्थापक सदस्य नियांग हांग्जो ने कहा, “उन्होंने हमें हमारे घरों से बाहर निकाल दिया। उन्होंने हमारे घर, हमारी संपत्तियाँ जला दीं। उन्होंने लूटपाट की, हत्या की, बलात्कार किया। उन्होंने हमें जिंदा जला दिया, सिर काट दिए। उन्होंने हमें तोड़ दिया और हमारा सब कुछ खाक में मिला दिया।''
उन्‍होंने कहा, “यह कुकी-ज़ोमी के साथ किया जा रहा नरसंहार है… दुनिया कब तक चुप रहेगी? हम चाहते हैं कि सदन इस मुद्दे को लाए और इस पर चर्चा करे जैसा कि ईयू (संसद) ने किया है।''
यूरोपीय संसद ने इस महीने की शुरुआत में एक प्रस्ताव अपनाया था, जिसमें भारतीय अधिकारियों से मणिपुर में हिंसा को रोकने और धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर ईसाइयों की रक्षा के लिए "सभी आवश्यक" उपाय करने का आह्वान किया गया था। भारत ने इस प्रस्ताव की निंदा करते हुए इसे अपने आंतरिक मामलों में "हस्तक्षेप" बताया।
इसेलिन, न्यू जर्सी में, आईएएमसी ने एक विरोध प्रदर्शन और कैंडल जुलूस का आयोजन किया, जिसमें स्थानीय चर्चों, एनएएमटीए और नेशनल एसोसिएशन ऑफ एशियन इंडियन क्रिस्चियन्स के सदस्यों सहित विविध आस्था और जातीय पृष्ठभूमि के लोगों ने भाग लिया।
यूनाइटेड तेलुगु क्राइस्ट चर्च का प्रतिनिधित्व करने वाले पादरी प्रेम कंकनला ने कहा, "अगर उन दो महिलाओं को घसीटा और परेड कराया जा सकता है, तो यह किसी भी अन्य महिला के साथ हो सकता है, चाहे वह किसी भी धर्म की हो।"
उन्होंने कहा, "आइए हम एकजुट हों और महिलाओं की रक्षा और अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाएं।"
बोस्टन, मैसाचुसेट्स में कई भारतीय-अमेरिकी और सहयोगी पीड़ितों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए एक साथ आए और राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन से हस्तक्षेप करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मणिपुर में बढ़ती हिंसा को रोकने का आग्रह किया।
विरोध-प्रदर्शन के बाद, बाइडेन प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका "मणिपुर में दो महिलाओं पर हमले के वीडियो से स्तब्ध और भयभीत है"।
विदेश विभाग के उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने कहा, "हम लिंग आधारित हिंसा के इस कृत्य से बचे लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और उनके लिए न्याय पाने के भारत सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हैं।"
मणिपुर की स्थिति पर अपनी पहली सार्वजनिक टिप्पणी में, प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले सप्ताह इस घटना पर दु:ख और रोष व्यक्त करते हुए कहा कि इसने 140 करोड़ भारतीयों को शर्मसार किया है और कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, हालांकि विपक्षी कांग्रेस ने कहा कि यह टिप्पणी बहुत छोटी और काफी विलंबित है।
गत 3 मई को कुकी-ज़ोमी समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन के बाद हिंसा भड़क उठी।
बहुसंख्यक मेइती लोग मणिपुर की आबादी का लगभग 53 प्रतिशत हैं और ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी, जिनमें नागा और कुकी शामिल हैं, 40 प्रतिशत हैं और ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं।
(आईएएनएस)

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Web Title-Indian-Americans protest in three US states against Manipur violence
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