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खाड़ी देश से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया तक, पिछले 10 वर्षों में भारत ने ऐसे बदला वैश्विक धार्मिक स्थलों का स्वरूप

From the Gulf nations to Southeast Asia: How India has transformed the landscape of global religious sites over the last decade - World News in Hindi

जकार्ता । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इंडोनेशिया के ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर की यात्रा से पहले एक बार फिर एशिया भर में साझा सभ्यतागत और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए भारत द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों को बताया है। 7 जुलाई को भारत और इंडोनेशिया ने योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रम्बानन मंदिर परिसर में भारत समर्थित संरक्षण और पुनर्स्थापना परियोजना के लिए एक लेटर ऑफ इंटेंट (आशय पत्र) का आदान-प्रदान किया। यह आदान-प्रदान मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच वार्ता के बाद हुआ। दोनों देशों ने अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने के तरीकों पर चर्चा की। 10वीं शताब्दी में निर्मित प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है और यह मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित है। इस भव्य परिसर में हिंदू त्रिमूर्ति शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित ऊंचे मंदिरों के साथ-साथ उनके दिव्य वाहनों के लिए बनाए गए मंदिर भी शामिल हैं। मंदिर की दीवारों पर रामायण के दृश्यों को दर्शाती बारीक नक्काशी की गई है, जो भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को दर्शाती है।
इस परिसर के केंद्र में 47 मीटर (154 फुट) ऊंचा शिव मंदिर स्थित है, जो प्रम्बानन की सबसे ऊंची संरचना है और प्राचीन हिन्दू वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरणों में से एक है। विशाल मंदिर परिसर में मूल रूप से 240 मंदिर शामिल थे, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े हिन्दू मंदिर स्थलों में से एक बन गया। यहां मौजूद पत्थरों पर बनी नक्काशियों में रामायण और अन्य हिन्दू महाकाव्यों की कथाओं को दर्शाया गया है।
पिछले एक दशक में मोदी सरकार ने पड़ोसी देशों में स्थित कई महत्वपूर्ण धार्मिक और विरासत स्थलों के पुनर्स्थापना और संरक्षण के लिए सक्रिय रूप से सहयोग दिया है।
बांग्लादेश में भारत ने ऐतिहासिक रामना काली मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए सहायता की घोषणा की थी, जिसे 1971 में पाकिस्तान के ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान नष्ट कर दिया गया था। इस मंदिर का उद्घाटन 2021 में हुआ, जिससे एक महत्वपूर्ण हिंदू तीर्थस्थल का पुनरुद्धार हुआ और भारत-बांग्लादेश के सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को मजबूती मिली।
भारत ने 2020 में अनुदान सहायता के माध्यम से नाटोर स्थित लगभग 300 वर्ष पुराने जॉय काली माता मंदिर के जीर्णोद्धार का वित्तपोषण भी किया। इसके अलावा, सरकार ने आनंदमयी काली माता मंदिर और रामकृष्ण मंदिर के संरक्षण के लिए भी सहायता प्रदान की, जिससे बांग्लादेश में हिंदू आस्था के महत्वपूर्ण केंद्रों को सुरक्षित रखा जा सके।
वियतनाम में 2014 में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन के माध्यम से भारत को यूनेस्को सूचीबद्ध माई सोन अभयारण्य में संरक्षण कार्य करने का अवसर मिला। यह स्थल दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे महत्वपूर्ण शैव मंदिर परिसरों में से एक है और प्राचीन चंपा साम्राज्य का धार्मिक केंद्र रहा है।
म्यांमार में भारत ने 2017 में यूनेस्को सूचीबद्ध बागान पुरातात्विक क्षेत्र में भूकंप से क्षतिग्रस्त स्मारकों के पुनर्स्थापन के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 12 ऐतिहासिक पगोडाओं का जीर्णोद्धार किया और प्रसिद्ध आनंद मंदिर में संरक्षण कार्य पूरा किया।
नेपाल में 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने अपनी 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की पुनर्निर्माण सहायता योजना के तहत 28 सांस्कृतिक विरासत स्थलों के पुनर्स्थापन और संरक्षण का कार्य शुरू किया। इनमें सेतो मच्छिंद्रनाथ मंदिर और बुधनीलकंठ मंदिर धर्मशाला भी शामिल हैं।
2022 से भारत कंबोडिया के अंगकोर विरासत परिसर में संरक्षण कार्य जारी रखे हुए है, जिसमें ता प्रोहम, अंगकोर वाट और प्रीह विहार शामिल हैं। यह दुनिया के सबसे महान हिन्दू सभ्यता केन्द्रों में से एक के संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
लाओस में भारत ने यूनेस्को सूचीबद्ध वाट फू मंदिर की प्रमुख संरचनाओं का पुनर्स्थापन किया। यह लगभग 1,000 वर्ष पुराना शिव मंदिर है और दक्षिण-पूर्व एशिया में सनातन सभ्यता के सबसे पुराने जीवित प्रतीकों में से एक है।
बहरीन में प्रधानमंत्री मोदी की 2019 की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान उन्होंने मनामा स्थित 200 वर्ष पुराने श्रीनाथजी (श्री कृष्ण) मंदिर के 42 लाख अमेरिकी डॉलर के पुनर्विकास परियोजना का उद्घाटन किया। यह मंदिर खाड़ी क्षेत्र के सबसे पुराने हिंदू मंदिरों में से एक है।
श्रीलंका में भारत ने ऐतिहासिक थिरुकेतीश्वरम मंदिर की पुनर्स्थापना परियोजना को फिर से सक्रिय किया। जुलाई 2015 में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन के तहत भारत ने इस प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए 32.6 करोड़ श्रीलंकाई रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित श्रीलंका के पांच प्राचीन पंच ईश्वरम मंदिरों में से एक है।
--आईएएनएस

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Web Title-From the Gulf nations to Southeast Asia: How India has transformed the landscape of global religious sites over the last decade
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