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घरों से लेकर संस्थानों तक, बच्चों को सुरक्षित रखने में नाकाम पाकिस्तान

From Homes to Institutions: Pakistan Fails to Keep Children Safe - World News in Hindi

माले। बच्चों की सुरक्षा के मामले में पाकिस्तान की नाकामी सबसे ज्यादा उस अंतर में साफ दिखती है जो शोषण का पता लगाने और बच्चों को खतरे से बचाने के बीच होता है। अधिकारी एफआईआर दर्ज कर सकते हैं, संदिग्ध को गिरफ्तार कर सकते हैं, कोई कमेटी बना सकते हैं, कोई पॉलिसी ला सकते हैं, नया फ्रेंमवर्क घोषित कर सकते हैं या किसी अत्याचार की निंदा कर सकते हैं, लेकिन इनमें से कोई भी कदम इस सच्चाई को नहीं बदल सकता कि बच्चे को पहले ही खतरे में डाला जा चुका था। इस्लामाबाद स्थित संस्था 'साहिल' द्वारा पाकिस्तान भर में दर्ज किए गए बच्चों के शोषण के 1,914 मामलों का हवाला देते हुए 'मालदीव्स इनसाइट' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ये आंकड़े केवल आपराधिक आंकड़े नहीं हैं, बल्कि कई स्तरों पर विफलता की एक गंभीर तस्वीर पेश करते हैं – परिवारों और स्कूलों से लेकर समुदायों, सामाजिक सेवाओं, पुलिस और न्याय प्रणाली तक।
रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि "बच्चे का घर वह जगह होनी चाहिए जहां खतरा खत्म हो जाता है। पाकिस्तान में ताजा आंकड़े बताते हैं कि हजारों बच्चों के लिए यह वह जगह हो सकती है, जहां से खतरा शुरू होता है। 2026 के पहले छह महीनों के दौरान देश भर में बच्चों के शोषण के 1,914 मामले सामने आए। आधे से ज्यादा मामलों में यौन शोषण शामिल था, जबकि सैकड़ों अन्य मामले अपहरण, बच्चों के लापता होने, बाल विवाह और यौन शोषण से जुड़े थे। सामने आए लगभग आधे मामले पीड़ितों के अपने घरों के अंदर हुए।"
इसमें कहा गया है कि डेटा बच्चों के गंभीर शोषण के लगातार बने रहने को उजागर करता है, जो ऐसे उल्लंघनों को रोकने के लिए मौजूदा सुरक्षा तंत्र की विफलता को रेखांकित करता है।
रिपोर्ट में कराची के कय्यूमाबाद इलाके में डेढ़ साल की बच्ची की हालिया मौत का हवाला दिया गया, जो इस बात का एक बेहद परेशान करने वाला उदाहरण है कि परिचित माहौल में भी बच्चे कितने असुरक्षित रहते हैं।
कथित यौन हमले के बाद इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो जाने पर पुलिस ने एक किशोर रिश्तेदार को गिरफ्तार किया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि एफआईआर के अनुसार वह रिश्तेदार अक्सर परिवार के घर आता-जाता रहता था और बच्ची को कुछ दिलाने के बहाने बाहर ले गया था।
इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि इस मामले ने इसलिए ध्यान खींचा, क्योंकि कथित अपराधी कोई अजनबी नहीं, बल्कि एक रिश्तेदार था जिसकी परिवार तक करीबी और नियमित पहुंच थी। “खतरा सिर्फ अंधेरी सड़कों या अनजान लोगों तक ही सीमित नहीं है। यह घरों के दरवाजों के पीछे, बड़े परिवारों में और उन रिश्तों के भीतर भी हो सकता है जिन पर बच्चों को भरोसा करने के लिए कहा जाता है। पाकिस्तान में बच्चों की सुरक्षा के लिए कानून, संस्थाएं और रिपोर्टिंग सिस्टम मौजूद हैं। लेकिन ताजा सबूतों से यह साबित नहीं हो पाता कि ये सिस्टम हिंसा होने से पहले ही बच्चों को सुरक्षित रख पा रहे हैं।”
--आईएएनएस

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Web Title-From Homes to Institutions: Pakistan Fails to Keep Children Safe
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