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चीन ने व्यापार असंतुलन से जुड़े प्रस्तावों पर जी20 की आम सहमति को रोका

China Blocks G20 Consensus on Proposals Addressing Trade Imbalances - World News in Hindi

एशविले। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि चीन ने जी20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक में आम सहमति बनने से रोक दिया। चीन ने व्यापार में लगातार असंतुलन और गैर-बाजार आर्थिक तौर-तरीकों को लक्षित करने वाले प्रस्तावों पर आपत्ति जताई थी। बाकी 19 सदस्यों ने चेयरमैन के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें कहा गया था कि जिन देशों का बाहरी सरप्लस बहुत ज्यादा है, उन्हें ऐसी नीतियां हटानी चाहिए जो घरेलू खपत को रोकती हैं और निर्यात पर बहुत अधिक निर्भरता पैदा करती हैं। भारत भी उन सदस्यों में शामिल था, जिन्होंने इस बयान का समर्थन किया। नॉर्थ कैरोलिना के ऐशविले में दो दिन की बैठक के बाद मंगलवार (स्थानीय समय) को बेसेंट ने पत्रकारों से कहा, "यह साफ है कि दुनिया में सबसे अधिक और टिकाऊ न रहने वाले करंट अकाउंट सरप्लस वाला देश, यानी पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना, इस बात से असहमत था।"
उन्होंने कहा, "हमारे साथ 19 और सदस्य हैं और जैसा कि मैंने कहा, मेरे चेयरमैन का बयान उसी बात को दोहराएगा।"
बयान में कहा गया कि बहुत ज्यादा और लगातार असंतुलन बाजारों को बिगाड़ सकते हैं, सप्लाई चेन को कमजोर कर सकते हैं और दूसरी अर्थव्यवस्थाओं पर बुरा असर डाल सकते हैं। इसमें देशों से कहा गया कि वे ऐसी गैर-बाजार नीतियां और तौर-तरीके खत्म करें, जो इस तरह के असंतुलन को और बढ़ाते हैं।
चीन ने चार हिस्सों पर आपत्ति जताई, जिनमें एनर्जी ट्रेड और होर्मुज जलडमरूमध्य, ग्लोबल इकोनॉमिक असंतुलन, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड की निगरानी और सॉवरेन डेट रीस्ट्रक्चरिंग (सरकारी कर्ज का पुनर्गठन) शामिल थे।
बेसेंट ने कहा कि दूसरे सदस्यों के बीच हुआ समझौता, उन अर्थव्यवस्थाओं के बारे में बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंता को दिखाता है जो सब्सिडी वाले प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं।
उन्होंने कहा, "हमारा मानना ​​है कि पूरी दुनिया में नॉन-मार्केट-बेस्ड अर्थव्यवस्थाओं द्वारा सस्ते एक्सपोर्ट की कभी न खत्म होने वाली बाढ़ लाना टिकाऊ नहीं है।"
बेसेंट ने आगे कहा, "मुझे लगता है कि 19 देशों का इस मुद्दे पर बात करना ही समस्या की गंभीरता और हमारी सहमति को दिखाता है।"
उन्होंने यह नहीं बताया कि क्या जी20 के अलग-अलग सदस्य देश इसके जवाब में टैरिफ या व्यापार से जुड़ी दूसरी सुरक्षात्मक नीतियां लागू करेंगे।
उन्होंने कहा, "मैं यह अनुमान नहीं लगाऊंगा कि दूसरे देश क्या करेंगे। इसलिए आगे का रास्ता सभी देशों को खुद तय करना होगा, लेकिन हम देखते हैं कि इस मामले में काफी सहमति है।"
चेयरमैन के बयान में कहा गया कि जिन देशों में बाहरी सरप्लस (अतिरिक्त कमाई) बहुत ज्यादा है, उन्हें ऐसी कमियों को दूर करना चाहिए जो घरेलू खपत को रोकती हैं और एक्सपोर्ट को ग्रोथ का बहुत बड़ा जरिया बनाती हैं। इसमें लगातार घाटे वाले देशों से घरेलू बचत को बढ़ावा देने और फिस्कल कंसोलिडेशन (सरकारी खर्च और कर्ज को नियंत्रित करने) की दिशा में काम करने को भी कहा गया।
सदस्यों ने आईएमएफ से कहा कि वह ग्लोबल असंतुलन के कारणों की जांच को और मजबूत करे, जिसमें आर्थिक नीतियों की कमियां और उनके दूसरे देशों पर पड़ने वाले असर शामिल हैं। उन्होंने इस बात का भी अधिक डिटेल्ड एनालिसिस मांगा कि अगर कोई कदम नहीं उठाया गया तो उसका क्या नुकसान होगा।
बेसेंट ने कहा कि आम सहमति न बन पाने से बैठक के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ा। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि 19 देशों को किसी बात पर सहमत करना वाकई बड़ी बात है।"
बैठक में प्राइवेट सेक्टर की अगुवाई वाली ग्रोथ, सरकारी कर्ज, फाइनेंशियल लिटरेसी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फाइनेंशियल रेगुलेशन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। बेसेंट के मुताबिक, जी20 फाइनेंस ट्रैक के इतिहास में पहली बार बिजनेस लीडर्स, वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक के गवर्नरों के साथ शामिल हुए।
जी20 में 19 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ-साथ यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ शामिल हैं। इसके सदस्य दुनिया के ज्यादातर आर्थिक उत्पादन, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। सदस्य आम तौर पर आम सहमति से फैसले लेते हैं, लेकिन ये फ़ैसले कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होते हैं।
भारत ने 2023 में जी20 की अध्यक्षता की और यूक्रेन युद्ध को लेकर मतभेदों के बावजूद नई दिल्ली में नेताओं का घोषणा-पत्र तैयार करवाया। 2026 में अमेरिका अध्यक्षता करेगा और उसकी 'फाइनेंस ट्रैक' प्राथमिकताओं में आर्थिक विकास, वैश्विक असंतुलन, सरकारी कर्ज और वित्तीय इनोवेशन शामिल होंगे।
--आईएएनएस

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Web Title-China Blocks G20 Consensus on Proposals Addressing Trade Imbalances
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