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अमेरिकी चुनाव करीब आने पर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उथल-पुथल हुई तेज

As the US election draws to a close the turmoil on the digital platform intensifies - World News in Hindi

न्यूयॉर्क : अमेरिका की सड़कें इन दिनों उग्र प्रदर्शनकारियों से भरी हुई हैं और डिजिटल पब्लिक स्पेस में भी एक प्रकार की उथल-पुथल तेज हो गई है, क्योंकि देश में इसी साल राष्ट्रपति चुनाव होना है।

लॉस एंजिलिस के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में डिजिटल कल्चर लैब के निदेशक और 'बियॉन्ड द वैली' के लेखक डॉ. रमेश श्रीनिवासन का आईएएनएस ने एक वीडियो साक्षात्कार लिया, जिसमें उन्होंने बताया, "यहां जो कुछ भी दांव पर लगा है, उसमें केवल लोकतंत्र में नागरिकों की राजनीतिक स्वायत्तता नहीं है। संभावित रूप से जो कुछ भी दांव पर लगा है, उसमें हमारे जीवन की संभावना भी है और यह कि हम अपनी उत्पादकता के आधार पर आर्थिक अवसर पा सकते हैं या नहीं।"

टेक फर्मों को तेजी से अपने प्लेटफार्मों पर बिना किसी शर्त के पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, विशेष रूप से डेटा दलालों या तीसरे पक्ष के साथ उनके संबंध को लेकर जो उपयोगकर्ताओं के लाखों डेटा पॉइंट्स तक पहुंच रखते हैं। उपयोगकर्ताओं के पास स्वयं की कोई शक्ति और तरीका नहीं है कि वे इसे रोजमर्रा की जि़ंदगी में समझ सकें।

मीडिया, प्रौद्योगिकी और समाज के चौराहे पर काम करने वाले शोधकर्ता डिजिटल प्लेटफॉर्म के व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं के लिए अपनी कॉल बढ़ा रहे हैं, ताकि डिजिटल टचपॉइंट्स पर डेटा की बारीक जानकारी तक उनकी पहुंच हो सके, जिसे श्रीनिवासन इंटेलीजिबल की बजाय 'नॉनसेंस ट्रांसपेरेंसी' के रूप में वर्णित करते हैं।

श्रीनिवासन के अनुसार, "हम जो कुछ भी कर रहे हैं, वह एक समग्र पहचान के साथ जुड़ाव है, हमारे पास इसके साथ कुछ करने के लिए कोई समझ, ²श्यता, नियंत्रण या करने की क्षमता नहीं है।"

श्रीनिवासन जैसे विद्वान यह मानते हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग उपयोगकर्ताओं को इस बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए कि उनके बारे में क्या एकत्र किया गया है, दूसरी ओर उन्हें यह बताने में भी सक्षम होना चाहिए कि वे क्या एकत्र नहीं कराना चाहते हैं। डेटा रिटेंशन पॉलिसी के तहत उन्हें सभी एकत्रीकरण की जानकारी और विवरणों को जानना चाहिए।

डोनाल्ड ट्रंप को लेकर बात करें तो उनकी पकड़ सामग्री मॉडरेशन पर है। डोमेन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि ट्रंप के नेतृत्व वाली फायरस्टॉर्म केवल एक शाइनी ऑब्जेक्ट है।

श्रीनिवासन कहते हैं कि असली परेशानी यह है कि फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और गूगल सहित दुनिया के सबसे बड़े सोशल प्लेटफॉर्म द्वारा लोगों को चुपके से टारगेट किया जा रहा है।

श्रीनिवासन ने कहा, "अगले पांच महीनों में राष्ट्रपति ट्रंप के राजनीतिक अभियान की लगभग सभी रणनीति और चुनाव मुख्य रूप से डिजिटल विज्ञापन पर केंद्रित होंगे, जो वास्तव में बिहेवियरल मोडिफिकेशन के लिए मास्क की तरह हैं।"

वह आगे कहते हैं, "गोपनीयता की रक्षा कैसे होगी जब हम यही न समझ सकते हों कि गोपनीयता कैसे कार्य करती है। लिहाजा, जरूरी है कि वहां एक डिस्क्लोजर होना चाहिए जो कम से कम ये बताए कि एल्गोरिदम (कलन गणित) कैसे काम करता है।"

--आईएएनएस

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Web Title-As the US election draws to a close the turmoil on the digital platform intensifies
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