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पाकिस्तान में सेना का बढ़ता दबदबा, असिम मुनीर के हाथ में कूटनीति की कमान - रिपोर्ट

Army Growing Dominance in Pakistan, Asim Munir Takes Command of Diplomacy – Report - World News in Hindi

नई दिल्ली,। पाकिस्तान में एक बार फिर नागरिक सरकार पर सेना का प्रभाव बढ़ता दिख रहा है। अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिशों में सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असिम मुनीर की अहम भूमिका ने यह संकेत दिया है कि देश की विदेश नीति पर रावलपिंडी का नियंत्रण मजबूत हो रहा है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच एक अप्रत्याशित मध्यस्थ के रूप में उभरा है, जिसमें असिम मुनीर को मुख्य भूमिका निभाने वाला माना जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मुनीर उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं जो अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेतृत्व से सीधे संपर्क स्थापित कर सके और दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान करा सके। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इन वार्ताओं का संचालन इस्लामाबाद (संसद का केंद्र) के बजाय रावलपिंडी (सेना मुख्यालय) से हो रहा है, जो सेना के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
पाकिस्तान की पूर्व राजनयिक मलीहा लोधी ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में सेना प्रमुख ही “मुख्य संचालक” हैं और उनके बिना ये बातचीत संभव नहीं थी। उन्होंने कहा, “विदेश मंत्रालय केवल जूनियर पार्टनर है और सरकार के मंत्री तो महज सहायक की भूमिका में हैं।”
रिपोर्ट के अनुसार, 18 जून 2025 को असिम मुनीर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी, जो अपने आप में एक असामान्य घटना थी क्योंकि वह किसी राजनीतिक पद पर नहीं थे। बताया जाता है कि अमेरिका-ईरान वार्ता के दौरान ट्रंप ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बजाय मुनीर के साथ ज्यादा संवाद किया।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच बैठक हुई, तब मुनीर तीसरे पक्ष के रूप में मौजूद थे और वार्ता को दिशा दे रहे थे।
पाकिस्तान में नवंबर 2025 में पारित 27वें संवैधानिक संशोधन के जरिए सेना की शक्ति और बढ़ गई है। इस संशोधन के तहत ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ का पद बनाया गया, जो सेना प्रमुख के पास ही रहेगा और उसे नौसेना व वायुसेना पर भी नियंत्रण देगा। साथ ही पांच सितारा अधिकारियों को आजीवन कानूनी छूट भी प्रदान की गई है।
इससे नागरिक शासन की कमजोरी और स्पष्ट हो गई है तथा भ्रष्टाचार, मानवाधिकार उल्लंघन और विपक्ष के दमन जैसी चिंताएं बढ़ी हैं।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी सार्वजनिक रूप से मुनीर की भूमिका की सराहना करते हुए उन्हें अमेरिका और ईरान के बीच संदेश पहुंचाने में “महत्वपूर्ण” बताया है। हाल ही में मुनीर तेहरान भी गए, जहां उन्होंने वार्ता के अगले दौर को आगे बढ़ाने की कोशिश की।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मध्यस्थता सफल होती है, तो मुनीर का प्रभाव और बढ़ेगा और नागरिक सरकार और कमजोर हो जाएगी। वहीं, विफल होने की स्थिति में शहबाज शरीफ सरकार को आंतरिक विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
विश्लेषकों के मुताबिक, पाकिस्तान में सेना का यह बढ़ता प्रभाव लोकतांत्रिक संतुलन के लिए खतरा है और इससे चुनी हुई सरकार की स्वायत्तता लगातार सीमित होती जा रही है।
--आईएएनएस

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Web Title-Army Growing Dominance in Pakistan, Asim Munir Takes Command of Diplomacy – Report
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