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हजारों प्रेमी मार दिए गए जहां में अब तक, प्रेम फिर भी जिंदा है और जिंदा रहेगा युगों तक

Thousands of lovers have been killed in this world till now, yet love is still alive and will remain alive for ages. - India News in Hindi

ये राजस्थान है। यहां आज भी गांवों में लोग अपनी रूढ़ीवादी सामाजिक परम्पराओं और रीति-रिवाजों को इस कदर प्यार करते हैं कि उन पर पांव रखने पर वे किसी अपने को भी मार डालने से नहीं चूकते। जबकि ये रीति-रिवाज और परमपराएं रामायण और महाभारत काल में नहीं थीं। कालांतर में जाने कहां से आ गईं और इन्सानी वजूद का सर्वनाश कर दिया। हाल ही जयपुर के पास मोखमपुरा में 32 वर्षीया विधवा सोनी देवी और उसके 40 वर्षीय प्रेमी कैलाश गुर्जर को इसलिए मार दिया गया कि वे दोनों एक-दूसरे से प्यार कर बैठे। सोनी देवी के ससुराल वालों को यह नागवार गुजरा और उन्होंने दोनों को पेट्रोल डाल कर जिंदा जला दिया। कैलाश गुर्जर और सोनी देवी दोनों के बच्चे हैं। सोनी के ससुराल वालों ने उन्हें खेत में देखा और पेट्रोल डाल कर जिंदा जला दिया। यह क्या हैॽ क्या इतनी-सी उम्र में विधवा हो गईं युवती को प्रेम करने का अधिकार नहींॽ और क्या ऐसे हिंसक तरीकों से प्रेम कभी रूका हैॽ लेकिन युगों से प्रेम का यही अंजाम होता रहा है। यही हमारी दकियानूसी सोच है जो कभी नहीं बदल सकती। युग बीत गए, जमाने बदल गए। लेकिन प्रेम युगों से अनवरत जारी है। हमारी दकियानूसी हिंसक सोच भी इसे खत्म नहीं कर सकती। कितनी अजीब बात है कि प्रेम हम सब किसी न किसी से करते हैं। लेकिन कोई दूसरा करे तो हमें चुभता है। क्योंॽ धरती पर जो भी विपरीतलिंगी हैं उनमें प्रेम होना स्वाभाविक है। क्योंकि यह ईश्वरीय रचना है और इसकी प्रस्तावना एक-दूसरे के प्रति शारीरिक आकर्षण से ही शुरू होती है। उसके बाद स्पर्श की चाहत, उसके बाद समागम की निरंतरता और उससे मिली तृप्ति प्रेम में मरते दम तक का प्राण फूंक देती है।
शारीरिक आकर्षण की बदौलत ही प्रेम एक-दूसरे में प्रस्फुटित होता है और जिसे कोई रोक नहीं सकता। प्रेम प्रत्येक इन्सान करता है लेकिन दूसरा करे तो उसे बर्दाश्त नहीं होता और वह इस क़दर हिंसक हो जाता है जैसा जयपुर के मोखमपुरा में हाल ही में हुआ। वहां 40 वर्षीय कैलाश चन्द्र गुर्जर और 32 वर्षीया विधवा सोनी देवी को एक-दूसरे से प्यार करने के परिणामस्वरूप सोनी देवी के ससुराल वालों ने दोनों को खेत में मिलते देख कर पेट्रोल डाल कर जिंदा जला दिया।
यह राजस्थान है और यहां गांवों में दकियानूसी सोच और निरर्थक प्रथाएं आज भी अनेक जातियों में जीवित हैं। चूंकि उनकी यह सोच उनके पुरखों की दी हुई है जो उनमें पल्लवित है, उन्हें इन्सान नहीं बनने दे रही। चूंकि उनमें ऐसा युगों से चला आ रहा है। न केवल राजस्थान बल्कि पंजाब, हरियाणा और मध्यप्रदेश के देहातों में आज भी यही सोच कायम है। ऐसे किस्सों में बाप बेटी को काट कर फेंक देने में देर नहीं करता तो उसके आशिक की भी बेहिचक विभत्स तरीके से हत्या कर देने से नहीं चूकता। उन्हें क़ानून से और जेल जाने से कोई डर नहीं। चूंकि ये लोग आज भी अपनी सदियों पुरानी ऐसी ही परम्पराओं को जी रहे हैं। ऐसे में कोर्ट और कानून दोनों लाचार हैं।
अपने जमाने के मशहूर लेखक गुलशन नंदा के उपन्यास नील कमल पर आधारित एक फिल्म इसी शीर्षक से आई थी। जिसमें एक बादशाह की बेटी से एक चित्रकार चित्रसेन को प्यार हो जाता है। वह बादशाह से उसकी राजकुमारी पुत्री से विवाह का प्रस्ताव रखता है। इस पर बादशाह इतना क्रोधित हो जाता है कि वह चित्रसेन को जिंदा दीवार में चुनवा देता है। यह गप्प नहीं है बल्कि राजस्थान में ऐसी ही ढेरों हकीकतें हैं जो रजवाड़ों और गांवों में आज भी कायम है। अधपकी उम्र में जो औरत विधवा हो गईं, क्या उसका मन प्यार करने का अधिकार खो देता हैॽ
यह कैसी विडम्बना और दकियानूसी सोच है। लेकिन राजस्थान के देहातों में आज भी है। ऐसी खबरें आए-दिन अखबारों में प्रकाशित होती रहती हैं। वे मरने मारने को तैयार हैं लेकिन अपनी ऐसी पुश्तैनी परम्पराओं को छोड़ने को तैयार नहीं। भले ही उन्हें अपनी ही औलाद की जान क्यों न लेनी पड़े। वे उसे मार डालते हैं। सोनी देवी का कैलाश गुर्जर से प्रेम संबंध पर दोनों को जिंदा जला देने का भी यही कारण है। विधवा हो जाने के बाद किसी भी स्त्री की पेट की और देह की भूख का उम्र भर का सहारा बनने को कोई तैयार नहीं। लेकिन वह किसी से प्रेम कर ले तो उसकी हत्या करने को तैयार हो जाते हैं। यह क्या हैॽ
शिक्षा की हम चाहे जितनी बातें कर लें। लेकिन हमारे संस्कार उसी जड़ता से जुड़े हुए हैं जिन्हें ये लोग मरते दम तक नहीं छोड़ेंगे और राजस्थान का इतिहास ऐसी हकीकतों से भरा पड़ा है। दो महीने पहले झुंझुनूं में महिला आंगनवाड़ी पर्यवेक्षक मुकेश कुमारी ने अपने शिक्षक प्रेमी मानाराम को पाने के लिए 600 किलोमीटर दूर गाड़ी चला कर उसके पास पहुंच गई। लेकिन मानाराम को उसका यूं आना अपनी बिरादरी में अपना अपमान लगा। परिणामस्वरूप मानाराम ने मुकेश कुमारी की हत्या कर दी। गांवों में आज भी समाज में ऐसी ही सोच को प्राथमिकता दी जाती है और उस पर आंच आने पर हर इन्सान कुछ भी करने को आमादा रहता है।
तीन महीने पहले गुड़गांव में वजीराबाद में एक रूढ़ीवादी पिता ने अपनी ही बेटी टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की गोली मार कर इसलिए हत्या कर दी कि वह एक लड़के से प्यार कर बैठी। फर्रूखाबाद में धर्मेन्द्र चौहान और उसकी पत्नी उमा चौहान ने अपनी बेटी के प्रेमी की हत्या कर दी। धर्मेन्द्र और उमा बेटी की इस बात से नाराज़ थे कि उसने दूसरी जाति के लड़के से प्रेम विवाह कर लिया था। यह जातिगत नफरत है। पांच दिन पहले हरियाणा के रोहतक के गांव कहनी में एक पिता ने अपनी बेटी सपना को गोली मार दी। क्योंकि सपना ने लव-मैरिज कर ली थी।‌ ऐसे में गुस्साए बाप ने बेटी को गोलियों से भून डाला। सपना मर गई।
बठिंडा में भी ऐसा ही हुआ। वहां विर्क कला गांव में प्रेम विवाह करने पर गुस्साए पिता राजवीर सिंह ने बेटी जशमनदीप कौर और उसकी बेटी को धारदार हथियार से काट दिया। दोनों मर गए। राजवीर सिंह का कहना था कि बेटी ने दूसरी जाति में शादी करके हमारी नाक कटवा दी। प्रेम शहरों की ही जागीर नहीं, यह गांवों में भी अंकुरित होता है। क्योंकि वहां भी इन्सान ही बसते हैं। लेकिन पता नहीं सैकड़ों साल पुरानी ऐसी सोच से भारत कब मुक्त होगा। गांवों में आज भी कोई नीची जाति का घोड़ी पर सवार होकर शादी करने नहीं जा सकता। कोई भी नीची जाति का ठाकुरों के कुएं से पानी नहीं पी सकता।
ऊंची जाति के लोगों के मंदिर में पूजा नहीं कर सकता। जाति-बिरादरी, दकियानूसी विचारों से भारत के हजारों गांव आज भी मुक्त नहीं हैं। वहां के लोग आज भी कीली हुई ज़िन्दगी जी रहे हैं और उसी का परिणाम है यह सब जो हो रहा है। जो मोखमपुरा में हुआ। और अब यह किसी भी कानून से खत्म होने वाला नहीं।

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