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SC ने ईरानी महावाणिज्यदूतावास की याचिका खारिज की, हाईकोर्ट जाने को कहा

Supreme Court dismisses petition of Iranian Consulate General, asks to go to High Court - India News in Hindi

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ईरान के महावाणिज्यदूतावास द्वारा दायर एक याचिका को खारिज करते हुए इस मामले को लेकर मद्रास हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता प्रदान की। ईरान के महावाणिज्यदूतावास ने तमिलनाडु के एक वरिष्ठ जेल अधिकारी पर अत्याचार करने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी। ईरानी महावाणिज्यदूतावास ने चेन्नई की पुझाल केंद्रीय जेल में बंद दो ईरानी नागरिकों के बचाव में अपनी याचिका में कहा कि जेल अधीक्षक सभी तरह की जांच को आसानी से प्रभावित करने में सक्षम है, क्योंकि उसके अत्याचारों के खिलाफ गवाही देने की कोई भी हिम्मत नहीं करता है। मौजूदा दोषी ने विदेशी होने के नाते याचिकाकर्ता (ईरान के वाणिज्य दूतावास) से संपर्क करने की कुछ हिम्मत दिखाई है।

ईरान के ये दोनों नागरिक नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक इंसिडेंस (एनडीपीएस) अधिनियम से जुड़े एक मामले में दोषी ठहराए गए हैं।

प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे, न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की, जो कि अधिवक्ता राजीव रहेजा के माध्यम से दायर की गई थी।

याचिका में दावा किया गया कि जेल अधीक्षक सेंथिल कुमार ने कैदियों पर अत्याचार किया है और शीर्ष अदालत ने एक अवमानना मामले में और साथ ही हाईकोर्ट ने भी विभिन्न अनुचित कृत्यों के लिए उसे तलब किया है।

याचिका में कहा गया है कि उनकी यातना के शिकार लोगों की आपराधिक शिकायतें विभिन्न अदालतों के सामने लंबित हैं और इन गंभीर आरोपों पर आपराधिक जांच भी लंबित है।

याचिका में कहा गया है कि ईरानी नागरिक मोसवी मसूद और मोहम्मद जाफरी चेन्नई की पुझल सेंट्रल जेल में बंद हैं और उन्हें अन्य कैदियों से जान का खतरा है, जो कि कुमार के प्रभाव में हैं।

याचिका में दावा किया गया है कि यह विश्वसनीय रूप से पता चला है कि जेल के कैदियों पर उसके द्वारा किए गए कथित अत्याचार असंख्य हैं।

महावाणिज्यदूतावास ने शीर्ष अदालत से आग्रह किया कि वह अदालत में उक्त कैदियों को प्रस्तुत करने का आदेश दें और संबंधित अधिकारियों को उनके मूल देश में प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें सुरक्षित हिरासत में रखने का आदेश दें ताकि उन्हें सुरक्षित रूप से ईरानी अधिकारियों को सौंपा जा सके।

याचिका में यह भी कहा गया है कि दोनों कैदियों को नेल्सन मंडेला नियम के अनुसार आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए, जो कैदियों के लिए संयुक्त राष्ट्र के मानक न्यूनतम नियम हैं।

तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा मार्च 2013 में दो ईरानी नागरिकों को मैथम्फेटामाइन के निर्माण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद नौ मार्च, 2018 को एक एनडीपीएस की विशेष अदालत ने उन्हें 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
(आईएएनएस)

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Web Title-Supreme Court dismisses petition of Iranian Consulate General, asks to go to High Court
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