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SC ने सीजेआई मिश्रा की नियुक्ति को चुनौती देने पर 5 लाख का जुर्माना कम करने से इनकार किया

SC refuses to reduce Rs 5 lakh cost on petitioner challenging former CJI appointment - India News in Hindi

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा को प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में पदोन्नत करने को चुनौती देने वाली याचिका दायर करने के लिए मुकेश जैन पर लगाए गए 5 लाख रुपये के जुर्माने की लागत को कम करने की मांग वाली एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम. आर. शाह की पीठ ने जैन का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता ए. पी. सिंह से पूछा, आप राशि का भुगतान कब करने जा रहे हैं?

इस पर सिंह ने अदालत से अपने मुवक्किल को कुछ समय देने का आग्रह किया, जो एक साल और तीन महीने से न्यायिक हिरासत में है। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल तीन मामलों में आरोपी हैं और हाल ही में उन्हें एक मामले में जमानत मिली थी। हालांकि, वह अन्य मामलों में न्यायिक हिरासत में रहेंगे।

न्यायमूर्ति शाह ने इस साल 4 जून को जैन द्वारा प्रस्तुत एक आवेदन की ओर इशारा किया। पीठ ने कहा कि लागत में कमी की मांग वाली याचिका में आवेदक ने शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों के खिलाफ निराधार आरोप लगाए हैं।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि न्यायाधीशों के खिलाफ उनके द्वारा लगाए गए बेबुनियाद आरोपों की प्रकृति को देखते हुए आवेदक किसी भी प्रकार की छूट का पात्र नहीं है।

पीठ ने निर्देश दिया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा भू-राजस्व के बकाया के रूप में याचिकाकर्ता से लागत का पुरस्कार वसूल किया जाना चाहिए। और यह भी आदेश दिया कि भविष्य में किसी भी जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा विचार नहीं किया जाएगा, जब तक कि याचिकाकर्ता लागत जमा करने का प्रमाण नहीं दिखाता।

9 जुलाई को, शीर्ष अदालत ने जैन को निर्देश दिया था, जिन्होंने 2017 में न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा को प्रधान न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने को चुनौती दी थी। उनके साथ सह-याचिकाकर्ता के तौर पर स्वयंभू धर्मगुरु स्वामी ओम भी शामिल थे। हालांकि अब स्वामी ओम की मृत्यु हो चुकी है।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि कुछ लोग पेशेवर जनहित याचिकाकर्ता बन गए हैं और यह धंधा बंद होना चाहिए।

जैन के वकील ने पीठ को सूचित किया था कि उनका मुवक्किल लगभग एक साल से बालासोर जेल में है और हाल ही में वह जमानत पर छूट गया है। वकील ने कहा, वह कई बार व्यक्तिगत रूप से शीर्ष अदालत में पेश हुए हैं। स्वामी ओम की मृत्यु हो गई है। मैं 2 सप्ताह के लिए स्थगन का अनुरोध करूंगा।

बिग बॉस का हिस्सा रह चुके और हमेशा विवादास्पद बयान देने वाले स्वयंभू धर्मगुरु स्वामी ओम का फरवरी 2021 में निधन हो गया था।

अगस्त 2017 में, शीर्ष अदालत ने न्यायमूर्ति मिश्रा की पदोन्नति को चुनौती देने के लिए जैन और स्वयंभू संत स्वामी ओम पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। शीर्ष अदालत ने तब याचिका को लोकप्रियता का स्टंट करार दिया था और याचिकाकर्ताओं को दंडित करने का फैसला लिया था। स्वामी ओम ने बाद में कोविड-19 महामारी का हवाला देते हुए लागत में छूट की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था। कोर्ट ने तब इसे 10 लाख रुपये से घटाकर 5 लाख रुपये कर दिया था। (आईएएनएस)

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Web Title-SC refuses to reduce Rs 5 lakh cost on petitioner challenging former CJI appointment
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