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अनुराधा नक्षत्र में कानपुर में खेली गई थी आजादी की होली

हिमांशु तिवारी,कानपुर। देश आजाद नहीं हुआ था और न ही भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ था फिर भी होली में कानपुरवासियों का ऐसा रंग चढ़ा कि अपने को आजाद मान लिया। फिर क्या था अंग्रेजों ने होली खेलने वालों को जेल में डाल दिया।लेकिन आजादी के दीवाने होली खेलना नहीं बंद किये और रंग खेलकर ऐसा विरोध किया कि अंग्रेजी हुकूमत को झुकना पड़ा। जिसके बाद फिर अनुराधा नक्षत्र में पूरे शहर में देश आजाद न होते हुए भी पहली बार आजादी की होली खेली गई।
1942 का वह दौर था जब कांग्रेस के रणनीतिकार देश की आजादी के लिए भारतछोड़ो आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहे थे। हुआ भी ऐसा और नौ अगस्त 1942 को
आंदोलन छेड़ दिया गया। लेकिन इससे पहले इसी वर्ष मार्च माह में अनुराधा नक्षत्र
में कानपुरवासियों ने देश आजाद न होते हुए भी आजादी की होली खेल डाली थी। तब
से यह परंपरा लगातार चली आ रही है और होली के लगभग पांच दिन बाद अनुराधा
नक्षत्र में गंगा मेला के रूप में रंगों की होली मनाई जाती है। इसी क्रम में
शनिवार को कानपुर में गंगा मेला धूमधाम से मनाए जाने की तैयारियां जोरों पर
है।
इतिहास के आइने में होली

इतिहासकार डा. मनोज कपूर ने बताया कि जब भारत गुलामी की जंजीरो से आजाद होने
के लिए संघर्ष कर रहा था, तब कानपुर में आजादी के दीवाने क्रांतिकारियों ने
अंग्रेजी हुक्मरानों के मना करने के बावजूद होली के दिन जमकर होली खेली। यही
नहीं हटिया बाज़ार के पार्क में आजादी का तिरंगा भी लहरा दिया था। जिसके बाद
हरकत पर आये गोरे सैनिको ने करीब 40 क्रांतिकारी युवाओं को होली के दिन ही
गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया। जिसके बाद कानपुरवासियों ने पांच दिन तक रंग
खेलकर अंग्रेजों के खिलाफ जककर संघर्ष किया। जिससे अंग्रेजी हुक्मरानों की
नींव हिल गयी और अनुराधा नक्षत्र के दिन सभी युवाओं को छोड़ दिया। जिसे
कानपुरवासी अपनी जीत समझ आजादी की होली पूरे शहर में घूम-घूमकर मनाई और ठेलों
व बड़े वाहनों से खूब रंग खेला गया।
इनकी रही महती भूमिका

हटिया के स्थानीय निवासी 78 वर्षीय मूलचन्द्र सेठ ने बताया कि हटिया गंगा मेला
की नींव साल 1942 में पड़ी थी। जब इस मोहल्ले में होली के दिन हटिया बाजार
रज्जन बाबू पार्क में नौजवान क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत की परवाह किए
बगैर होली खेली और तिरंगा फहरा दिया। करीब दो दर्जन घोड़े पर सवार अंग्रेज
सिपाहियों से लंबा संघर्ष हुआ। बताया कि संघर्ष करने वालों में गुलाब चन्द्र
सेठ, बुद्धूलाल मेहरोत्रा, नवीन शर्मा, विश्वनाथ टंडन, हमीद खान, गिरिधर शर्मा
आदि थे।
गांधी और नेहरू भी आए आगे

क्रांतिकारियों को गिरफ्तार करना अंग्रेजी हुक्मरानों के लिए गले की हड्डी बन
गई। गिरफ्तारी के विरोध में कानपुर का पूरा बाजार बंद हो गया। मजदूर,
साहित्यकार, व्यापारी और आम जनता ने हर जगह अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन
छेड़ दिया। यहां तक महिलाएं व छोटे-छोटे बच्चे भी उसी पार्क में धरने पर बैठ
गये। यह देख महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू भी आगे आ गये और अपने
प्रतिनिधियों को भेज आंदोलन को बढ़ाने का काम किया।

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Web Title-played Holi of independence in Kanpur was Anuradha constellation
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