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कर्नाटक : अब हिंदू-मुस्लिम सद्भाव के प्रतीक करागा उत्सव पर निशाना

Now Karaga festival, symbol of Hindu-Muslim harmony, being targeted in Karnataka - India News in Hindi

बेंगलुरु। हिंदू-मुस्लिम सद्भाव के प्रतीक के रूप में देखे जाने वाले बेंगलुरु में मनाए जाने वाले ऐतिहासिक करागा उत्सव को लेकर विवाद चल रहा है, क्योंकि हिंदू संगठनों ने दरगाह पर जाने वाले करागा जुलूस के 300 साल पुराने अनुष्ठान को समाप्त करने के लिए अपना अभियान तेज कर दिया है। हालांकि, कर्नाटक पुलिस ने शुक्रवार को हिंदू समूहों को सख्त चेतावनी दी कि करागा उत्सव को बाधित करने के किसी भी प्रयास से सख्ती से निपटा जाएगा। करागा उत्सव शुक्रवार से शुरू होगा। इस संबंध में मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने पहले ही मंदिर का दौरा किया है और परंपरा के अनुसार करागा जुलूस के लिए मस्तान साब दरगाह पर पूजा के लिए आने का निमंत्रण दिया है। पुलिस उपायुक्त, मध्य, एम.एन. अनुचेत ने शुक्रवार को कहा कि उत्सव, मंदिर उत्सव समिति के निर्णय के अनुसार होगा। यदि कोई व्यवधान उत्पन्न करने की कोशिश करता है या गतिविधि में शामिल होता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि करागा उत्सव का शांतिपूर्ण संचालन सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, 450 पुलिस कर्मियों को तैनात किया जाएगा और 38 वरिष्ठ अधिकारी पुलिस व्यवस्था की निगरानी करेंगे। स्थिति के अनुसार पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाने पर फैसला लिया जाएगा।
करागा उत्सव समिति के अध्यक्ष सतीश ने अपना रुख दोहराया है कि करागा उत्सव के अनुष्ठानों में कोई बदलाव नहीं होगा और एक सूफी संत की दरगाह पर जाने की रस्म को छोड़ने का कोई सवाल ही नहीं है।
जुलूस को दरगाह तक नहीं ले जाने की मांग को लेकर हिंदू कार्यकर्ताओं ने अपना ऑनलाइन अभियान तेज कर दिया है। उन्होंने सवाल किया है कि करागा की बारात किसी दरगाह पर क्यों जाए?
काली मठ के स्वामी ऋषि कुमार ने कहा कि जिस दरगाह पर करागा जुलूस जाता है वह मूल रूप से एक मंदिर था। करागा उत्सव का हजारों वर्षों का इतिहास है। यहां दरगाह बनने से पहले यह भीमलिंगेश्वर मंदिर था। उन्होंने कहा कि यह साबित करने के लिए दरगाह में पर्याप्त सबूत हैं कि यह पहले एक हिंदू मंदिर था।
करागा उत्सव बेंगलुरु के श्री धर्मरायस्वामी मंदिर में आयोजित किया जाता है और यह 9 दिनों तक मनाया जाता है। करागा दिवस पर शाम के ठीक बाद, महिला पोशाक पहने एक पुजारी एक रंगीन जुलूस का नेतृत्व करता है। जुलूस में तलवारें लहराने वाले बच्चों सहित थिगलर समुदाय के सैकड़ों सदस्य शामिल होंगे। महिलाएं और भक्त अपने सिर पर मिट्टी के बर्तन लेकर चलते हैं।
पुजारी फूलों से सजे पिरामिड को ले जाता है और जुलूस का नेतृत्व करता है जो मस्तान साब दरगाह में 18 वीं शताब्दी के मुस्लिम संत की कब्र पर जाता है। आदिशक्ति के रूप में द्रौपदी की वापसी को चिह्न्ति करने के लिए हर साल करागा उत्सव मनाया जाता है।
--आईएएनएस

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Web Title-Now Karaga festival, symbol of Hindu-Muslim harmony, being targeted in Karnataka
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