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कैप्टन की मर्जी का मंत्रिमंडल, उप मुख्यमंत्री नहीं बनाए गए सिद्धू

Captains will to be Cabinet minister, not appointed Deputy Chief Minister - Punjab-Chandigarh News in Hindi

बलवंत तक्षक, चंडीगढ़। पंजाब में बंपर जीत के साथ कांग्रेस को सत्ता में ले कर आए पार्टी के प्रदेश कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी मर्जी का मंत्रिमंडल गठित किया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में मुलाकात के दौरान बिना किसी ना-नुकर के कैप्टन की मंत्रियों की सूची पर मोहर लगा दी। कैप्टन ने फिलहाल अपना मंत्रिमंडल छोटा रखने का फैसला किया है। विधायकों को एडजस्ट करने के लिए वे मुख्य संसदीय सचिव के पद बांटेंगे, इसकी उम्मीद कम हैं। मंत्रिमंडल के गठन से लगातार चल रही उन चर्चाओं पर विराम लग गया है, जिनमें भाजपा छोड़ कर कांग्रेस में आए नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी के सत्ता में आने पर उप मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलने की बातें कही जा रही थीं। गौरतलब है कि आप ने सिद्धू से उप मुख्यमंत्री पद देने का वादा किया था, लेकिन राहुल गांधी के साथ कई दौर की बातचीत के बाद अपनी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू के साथ उन्होंने बिना शर्त कांग्रेस में शामिल होना ही ठीक समझा था। सिद्धू को अब कैबिनेट मंत्री के तौर पर झंडी वाली सरकारी कार मिल गई है। कांग्रेस में यह परंपरा रही है कि विधायक दल की सहमति के नाम पर मुख्यमंत्री का पद पार्टी आलाकमान की इच्छा से तय होता है। टिकट के लिए आवेदन मांगने की प्रक्रिया के बावजूद प्रदेश अध्यक्ष की मर्जी के खिलाफ उम्मीदवार तय होते हैं। मंत्रिमंडल के गठन से पहले तय सूची में आलाकमान के इशारे पर नाम कटते और जुड़ते रहे हैं। इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ और न अभी किसे के नाराज हो कर कोप भवन में जा बैठने की खबर है। इस बार टिकटों के बंटवारे में कैप्टन की पूरी चली, मुख्यमंत्री पद का फैसला चुनाव से बहुत पहले हो गया और कैप्टन की तरफ से तैयार सूची में मंत्रिमंडल गठन से पहले किसी फेरबदल के लिए आलाकमान ने कोई दबाव भी नहीं बनाया। सब कुछ उसी तरह से होने दिया गया, जैसा कैप्टन चाहते थे। उम्मीद की जा रही है कि पंजाब में नये प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का फैसला जब भी होगा, कैप्टन के मर्जी के मुताबिक ही होगा। कैप्टन के मंत्रिमंडल में ब्रह्म महेंद्रा की हैसियत नंबर दो मंत्री की है। वरिष्ठता के हिसाब से पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के भतीजे मनप्रीत सिंह बादल और पूर्व सांसद नवजोत सिंह सिद्धू का नंबर उनके बाद आता है। हालांकि, अरुणा चौधरी और रजिया सुल्ताना, दोनों पहले भी विधायक रह चुकी हैं, लेकिन कैप्टन ने उन्हें फिलहाल कैबिनेट मंत्री बनाने के बजाये स्वतंत्र प्रभार दे कर राज्य मंत्री की कुर्सी दी है। कैप्टन के खिलाफ पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान बगावत का झंडा उठाने वाली पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल इस बार चुनाव हारने की वजह से आगे बढ़ कर कोई लड़ाई लड़ने की हैसियत में ही नहीं रहीं। मंत्रिमंडल में कैटन के अलावा आठ कैबिनेट व दो राज्य मंत्रियों के शपथ लेने से भविष्य में मंत्रिमंडल विस्तार की गुंजाइश बनी हुई है। अभी सात और विधायकों को मंत्री की कुर्सी मिल सकती है। हो सकता है दोनों महिला मंत्रियों अरुणा व रजिया के कामकाज का आकलन कर मंत्रिमंडल विस्तार के समय दर्जा बढ़ा कर कैप्टन इन्हें कैबिनेट मंत्री बना दें। मनप्रीत बादल इससे पहले बादल सरकार में भी वित्त मंत्री ही थे। मंत्री पद से इस्तीफा देने, अकाली दल छोड़ने, पंजाब पीपुल्स पार्टी गठित करने, पिछला विधानसभा चुनाव हारने, फिर अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने और अब गिदड़बाहा के बजाये बठिंडा शहर क्षेत्र से चुनाव जीतने के बाद भी अमरिंदर सरकार में उनके हिस्से वित्त मंत्री का ही पद आया है। कहा जा सकता है कि सरकार चाहे बादल की हो या कैप्टन की, मनप्रीत बादल की राजनीतिक हैसियत में दस साल बाद भी इजाफा नहीं हुआ है। मनप्रीत आज भी जैसे थे कि स्थिति में हैं। शपथ लेने के बाद मनप्रीत ने कहा, मंत्री बनने के बाद भी अपने इस्तेमाल के लिए वे सरकारी गाड़ी नहीं लेंगे। साफ-सुथरी छवि के धनी मनप्रीत ने रेत माफिया, ड्रग माफिया, ट्रांसपोर्ट माफिया, केबल माफिया के खिलाफ अभियान चलाने का संकल्प दोहराया है। यह भी पहली बार देखने में आया है कि कैप्टन के शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता पहुंचे हुए थे। असल में उत्तरप्रदेश व उत्तराखंड में भाजपा के मुकाबले कांग्रेस के शिकस्त खाने, गोवा व मणिपुर में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने के बावजूद भाजपा के सरकार बना लेने के बाद पंजाब ही एक ऐसा राज्य है, जो कांग्रेस नेताओं के मुरझाये चेहरों पर मुस्कान लौटने की वजह बना है।

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