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अब दीवारों पर टांगने वाली कालीन भी

Now also on the wall hanging carpet - Varanasi News in Hindi

वाराणसी /भदोही। कालीन बुनाई अब बाजार की जरूरत को देखते हुए की जा रही है। सिर्फ फर्श पर ही नहीं, दीवारों पर टांगने के लिए भी नेचुरल लुक में छोटे आकार की कालीन बनाई जा रही है। कालीन निर्यातकों और उद्यमियों ने बाजार की नब्ज भांपते हुए कालीन की डिजाइन और उसका फंडा भी बदल दिया है।
पश्चिमी मुल्कों के ऑफिसों और घरों में अपनी खूबी का जलवा बिखेरने वाली भारतीय कालीन का भविष्य बेहतर और उज्ज्वल दिख रहा है। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में 27 से 30 मार्च तक चले 33वें कार्पेट एक्सपो के परिणाम उत्साहवर्धक नजर आए।
इस बार के एक्सपो (मेले) की खासियत यह रही कि दुनिया की सबसे महंगी कालीन यहां उपलब्ध थी, जिसके निर्माण में तीन साल से ज्यादा समय लगा।

कालीन मेले में 390 से अधिक विदेशी खरीदारों ने भारतीय कालीन को पसंद किया और उसकी खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। इस दौरान काफी संख्या में गणमान्य व्यक्ति वहां पहुंचे। भदोही के सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त मेले में निर्यातकों का हौसला बढ़ाने के लिए पहुंचे। इस बार के एक्सपो से निर्यातकों को बड़ी उम्मीद दिख रही है।

सीईपीसी के दूसरे वाइस चैयरमैन तथा मैमर्स हन्नांस ओरिएंटल रग्स उमर हमीद ने मेले में सबसे महंगी कालीन का प्रदर्शन किया। उनकी यह कालीन अनोखी थी। उमर के अनुसार, 9/12 फुट के इस कालीन निर्माण में साढ़े तीन साल का वक्त लगा और इसमें 2500 गांठें हैं। इसे बुनाई की खास प्रक्रिया सिन्नाह कहा जाता है। यह ईरान में भी उपलब्ध है, लेकिन उसकी बुनाई का तरीका अलग है।

उनके अनुसार, यह सबसे मंहगी कालीन है, क्योंकि इसके निर्माण में काफी वक्त के साथ तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। यह बेहद मुलायम और मखमली कालीन है।

डामेटैक्स इंटरनेशनल टेड फेयर हैनोवर जर्मनी में 2017 का कार्पेट डिजाइन अवार्ड पाने वाले नोमान वजीरी ने कालीन के अनूठे डिजाइन के बारे में खरीदारों को जानकारी दी। उन्होंने एक ऐसी मानोक्रोम प्लेट में बनी कालीन दिखाई जो सिर्फ दो रंगों से बनी थी। उसे फर्श पर लगाने की बजाय वाल हैंगिंग के लिए तैयार किया गया था। यह पूरी तरह हाथ से बुनी थी, जिसका आकार 8/10 फीट था। इसे तीन बुनकारों ने तीन महीने में मिलकर बनाया।

उमर हमीद के अनुसार, अब दीवारों पर पेंटिंग की बजाय खूबसूरत नेचुरल कालीन टांगने का वक्त आ गया है। यह कालीन बाजार का नया ट्रेंड हैं। कपूर कार्पेट की पांचवीं पीढ़ी के विजय कपूर ने बताया कि उनकी पीढ़ी ने 1903 में इसकी शुरुआत की। वर्ष 1924 में ब्रिटेन में आयोजित एंपायर एक्जीबिशन में द सर्टिफिकेट ऑफ ऑनर मिला था।

प्रगति मैदान में कालीन एक्सपो भारत सरकार की तरफ से आयोजित किया गया। इसका लक्ष्य 20 लाख लोगों को रोजगार मुहैया कराना है। यह एक्सपो 305 प्रदर्शकों के साथ एशिया का सबसे बड़ा कालीन मेला है। ग्रामीण महिलाओं को अधिक से अधिक जोड़ने के लिए बल दिया जा रहा है। कालीन खरीदारों के लिए यह अनूठा प्लेटफार्म है।

मेले में केंद्र और राज्य सरकार के जिन प्रतिनिधियों और शख्सियतों ने भाग लिया, उनमें संयुक्त सचिव पुनीत अग्रवाल, व्यापार सलाकार अदितिदास, आर्थिक सलाकार और टेक्सटाइल्स मंत्रालय से बबनी लाल के अलावा मिर्जापुर के मंडलायुक्त रंजन कुमार के अलावा दूसरी नामचीन हस्तियां मौजूद थीं।

आईएएनएस

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