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हिंदू, सनातन, केकेआर और बांग्लादेश हिंसा पर फूटा अनिरुद्धाचार्य का गुस्सा, कहा- धर्म का पालन करना चाहिए

Aniruddhacharya expresses anger over Hindu, Sanatan Dharma, KKR, and Bangladesh violence, says religious principles must be followed - Mathura News in Hindi

मथुरा। बॉलीवुड किंग शाहरुख खान की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) ने आईपीएल 2026 की नीलामी में बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को खरीदा था। इसके पर विवाद बढ़ने के बाद बीसीसीआई ने केकेआर से बांग्लादेशी खिलाड़ी को बाहर करने का निर्देश दिया है। अब इसी मामले पर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने विरोध दर्ज कराया है और इसके अलावा, बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर कड़ी टिप्पणी की है। अनिरुद्धाचार्य ने बॉलीवुड पर भी सवाल उठाए हैं और कहा कि वहां के लोग खुद को भगवान समझते हैं। सवाल: शाहरुख खान की टीम द्वारा बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को खरीदने पर मचे बवाल के बाद, बीसीसीआई ने टीम प्रबंधन को खिलाड़ी को टीम से बाहर करने के लिए कहा है। क्या आपको लगता है कि यह सही है?
जवाब : हमारा मानना ​​है कि जो आपके साथ खेलता है, आपके साथ खाता है, वही मित्र है। हमारा मित्र कौन है? जो हमारे हिंदुओं को जलाता है, जो हमारे सनातनियों को मारता है, वे कैसे मित्र हो सकते हैं? जो हमारे हिंदुओं से इतनी नफरत करते हैं, जो हमारे सनातनियों से इतनी नफरत करते हैं, हम उनके साथ क्रिकेट क्यों खेलें? बांग्लादेशी खिलाड़ियों को खरीदने वालों से पूछताछ होनी चाहिए। आप 9 करोड़ रुपये में खिलाड़ी खरीद रहे हैं, क्योंकि आपके पास पैसा है। लेकिन क्या आपको यह नहीं दिख रहा कि जिन भारतीयों ने आपको नाम और शोहरत दिलाई है, वे इस बात से आहत हैं कि आप उन लोगों को करोड़ों रुपये दे रहे हैं जो हिंदुओं का बेरहमी से कत्ल कर रहे हैं?
भारत से पैसा कमाकर आप उन लोगों को पैसा भेज रहे हैं जो हिंदुओं से घोर नफरत करते हैं। क्या इससे यह साबित नहीं होता कि आप (शाहरुख खान) भी हिंदुओं से नफरत करते हैं? अगर आप हिंदुओं से प्यार करते तो इस बारे में जरूर सोचते। जो लोग हिंदुओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं, उनके साथ हम क्रिकेट कैसे खेल सकते हैं? कुछ लोग तर्क दे सकते हैं कि ऐसे मामलों में खेल शामिल नहीं होना चाहिए। लेकिन हम इन्हें कैसे अनदेखा कर सकते हैं? धर्म हमें क्या सिखाता है? हमें धर्म का पालन करना चाहिए।
सवाल: क्या आपको लगता है कि शाहरुख खान की टीम इस बात से अनजान थी कि खिलाड़ी को खरीदने से भारत में आक्रोश फैल सकता है?
जवाब: बॉलीवुड के लोग खुद को भगवान समझते हैं। उन्हें लगता है कि वे जो भी करें, कोई उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकता क्योंकि बॉलीवुड बहुत ताकतवर है। उनके पास पैसों की कोई कमी नहीं है, इसलिए उनमें घमंड भरा है कि कोई उन्हें छू नहीं सकता। वे खुलेआम गुटखा और शराब का प्रचार करते हैं। वे समाज को अनैतिकता की शिक्षा देते हैं। वे सिगरेट, गुटखा और जुए को बढ़ावा देते हैं। क्या सच में कोई उन्हें रोक पाया है? किसने उन्हें नुकसान पहुंचाया है? बॉलीवुड का मतलब है ताकत। वे खुद में ही ताकतवर लोग हैं। आप और मेरे जैसे आम लोग क्या कर सकते हैं? बॉलीवुड का मतलब है सत्ता। ये लोग अपने आप में ही ताकतवर हैं। हम जैसे आम लोग क्या कर सकते हैं? इसी घमंड में ये फैसला लिया गया। लेकिन जब जनता ने इसके खिलाफ आवाज उठाई, तब शाहरुख खान को अपना फैसला पलटना पड़ा।
वे भारत की जनता को अपनी फिल्में बेचकर पैसा कमाते हैं और फिर उस धन को अन्यत्र बांट देते हैं। भारत की जनता ही उन्हें सुपरस्टार बनाती है, जबकि उनका दिल बांग्लादेशियों के लिए धड़कता है। क्या यह हमारे साथ धोखा नहीं है? यह छल है। आपने हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है और उनके भरोसे को तोड़ा है। इसे विश्वासघात कहते हैं।
सवाल: कुछ व्यक्तियों और राजनीतिक समूहों का दावा है कि भारत में मुस्लिम समुदाय भेदभाव का सामना कर रहा है। इस मुद्दे पर आपके क्या विचार हैं?
जवाब: हम कुछ मुसलमानों के भीतर मौजूद उस विचारधारा का विरोध करते हैं जो हिंदुओं के प्रति घृणा को बढ़ावा देती है। हिंदुओं के प्रति घृणा क्यों है? हिंदू मुसलमानों से घृणा नहीं करते। हम आपका विरोध नहीं करते, न ही हम यह कहते हैं कि आप गलत हैं। लेकिन हम कुकर्मों का विरोध करते हैं, उन कृत्यों का जिनमें हिंदुओं की हत्या की जा रही है, उनके गले काटे जा रहे हैं, और लोगों को जिंदा जलाया जा रहा है। मुसलमानों से पूछिए कि क्या वे इस नरसंहार का समर्थन करते हैं?
सवाल: जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर, जो पहले तृणमूल कांग्रेस में थे, ने घोषणा की है कि वे पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का निर्माण करेंगे। इस पर आपकी क्या राय है?
जवाब: मैंने मुसलमानों से भी सुना है कि बाबरी मस्जिद बाबर से पहले अस्तित्व में नहीं थी। मुसलमानों को खुद इस पर विचार करना चाहिए कि बाबरी मस्जिद कब से अस्तित्व में आई? भारत पर आक्रमण करने वालों ने इस धरती की बेटियों और बहनों पर अत्याचार किए। कितने मुगल शासकों ने भारतीय महिलाओं का अपमान किया? आप इस देश का भोजन करते हैं और इसका पानी पीते हैं, तो क्या विदेशी आक्रमणकारियों के नाम पर ऐसी इमारतें खड़ी होनी चाहिए जो सनातन अनुयायियों की आस्था को ठेस पहुंचाती हैं?
मस्जिदें बेशक बनाई जा सकती हैं, लेकिन मंदिरों को नष्ट करने के बाद ही क्यों? हमने कभी किसी मंदिर के लिए मस्जिद नहीं तोड़ी। पहले उन्होंने हमारा मंदिर तोड़ा और मस्जिद बनाई, फिर हमें मस्जिद तोड़कर मंदिर का पुनर्निर्माण करना पड़ा। हम शांति और सद्भाव से एक साथ क्यों नहीं रह सकते? लड़ने की क्या ज़रूरत है? अगर लड़ाई ही एकमात्र विकल्प है, तो सीधे लड़ो और युद्ध की तारीख तय कर लो। आम जनता को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। मुझे नहीं लगता कि मंदिर-मस्जिद की राजनीति सही है।
सवाल: हाल के दिनों में कई ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं जिनमें कथित तौर पर भीम आर्मी से जुड़े लोग मनुस्मृति को जलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस बारे में आपकी क्या राय है?
जवाब: मनुस्मृति जलाने वाले तो सरासर अज्ञानी और गुमराह हैं। अज्ञानी लोगों के बारे में क्या कहा जा सकता है? वेद, पुराण, शास्त्र, धार्मिक ग्रंथ और संविधान, ये किसके लिए हैं? कानून को तो केवल वही लोग पढ़ सकते हैं जिन्हें पढ़ना आता हो। जिन्हें पढ़ना नहीं आता, वे क्या पढ़ेंगे? गीता और रामायण का अध्ययन तो केवल वही लोग कर सकते हैं जिन्हें पढ़ना आता हो। अगर आपको मनुस्मृति पढ़ना भी नहीं आता, तो आप उसका अर्थ कैसे समझेंगे? और अगर आपने उसे पढ़ा ही नहीं है, तो आप उसे क्यों जला रहे हैं?
मैंने एक दलित भाई का वीडियो देखा, वो भी 'जय भीम, जय भीम' के नारे लगा रहा था, लेकिन उसने एक बहुत ही अर्थपूर्ण बात कही। उसने कहा, 'देखो, मैंने मनुस्मृति का थोड़ा सा अध्ययन किया है, और मुझे उसमें ऐसा कुछ नहीं मिला जिसके कारण उसे जलाया जाना चाहिए।' दलितों को कुछ लोगों ने गुमराह किया है, जिसके कारण ये सब शुरू हुआ। हमारे दलित समुदाय को गुमराह करने वाले कोई और नहीं बल्कि कुछ मुसलमान हैं। कुछ मुसलमान हमारे दलित भाइयों से कहते हैं कि वे उनके साथ खड़े हैं। अगर मुसलमान दलितों के इतने बड़े हितैषी हैं, तो पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री (जोगेंद्र नाथ मंडल) को तीन-चार साल बाद भारत क्यों लौटना पड़ा? वे कानून मंत्री थे, फिर भी वहां के मुसलमानों ने उन्हें पद से हटा दिया। बांग्लादेश में बेरहमी से मारे गए दीपू दास एक दलित युवक थे। उन्हें मुस्लिम भीड़ ने क्यों मारा? लोगों को इस बारे में सोचना चाहिए।
--आईएएनएस

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