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लोकसभा चुनाव 2019 : क्या उत्तरप्रदेश फिर तय करेगा देश की राजनीतिक दिशा?

नई दिल्ली। देश की कुल 543 लोकसभा सीटों में से अकेले 80 सांसदों को संसद भेजने वाले सर्वाधिक आबादी वाले उत्तरप्रदेश को देश की राजनीतिक दिशा तय करने वाला राज्य माना जा सकता है, क्योंकि 16 में से 12 बार केंद्र में उसी पार्टी की सरकार बनी है, जिसने यहां अधिकतम सीटों पर कब्जा किया है। 17वीं लोकसभा के चुनाव के लिए सात चरणों में वोट डले। क्या उत्तरप्रदेश देश का राजनीतिक भाग्य तय करने वाला राज्य बनेगा या फिर 1991, 1999, 2004 और 2009 जैसे चौंकाने वाले नतीजे यहां से आएंगे।

अब तक हुए 16 आम चुनावों के अनुसार, कांग्रेस ने 1991 में पांच और 1999 में नौ सीटें जीतने के बावजूद सरकार बनाई थी। 1999 और 2009 में समाजवादी पार्टी (सपा) ने यहां की अधिकतर सीटें जीती थी। एक्जिट पोल में रविवार को उत्तरप्रदेश में खंडित जनादेश दिखाया गया है। हालांकि राजग के सत्ता में वापसी के संकेत दिए गए हैं। यह देखना होगा कि जब 23 मई को मतगणना शुरू होगी तो उत्तरप्रदेश से किस प्रकार के नतीजे आते हैं।

क्या वहां भाजपा, समाजवादी पार्टी-बहुजन समाज पार्टी गठबंधन या फिर कांग्रेस मुख्य खिलाड़ी बनकर उभरती है। इस राज्य में भाजपा का मजबूत प्रदर्शन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूसरी बार ताजपोशी में मदद करेगा। भारत के पहले आम चुनाव 1952 से लेकर 1971 तक, कांग्रेस ने उत्तरप्रदेश की अधिकतर सीटों पर जीत दर्ज की और केंद्र में बहुमत वाली सरकार बनाई थी। विवादास्पद आपातकाल के हटने के बाद, विपक्षी पार्टियों ने जनता पार्टी के छतरी के नीचे कांग्रेस से मुकाबला किया और 1977 के चुनाव में जीत दर्ज की। मोरारजी देसाई तब भारत के गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने थे।

उस चुनाव में, कांग्रेस उत्तरप्रदेश में अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी, जबकि जनता पार्टी ने यहां की 85 लोकसभा सीटों पर कब्जा जमाया था, तब उत्तराखंड इसी राज्य का हिस्सा था। जनता पार्टी के प्रयोग के विफल होने के बाद, कांग्रेस ने 1980 के आम चुनाव में 529 सीटों में से 353 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। कांग्रेस ने इस चुनाव में उत्तप्रदेश में 50 सीटें जीती और इंदिरा गांधी फिर से प्रधानमंत्री बनी थीं।

1984 में इंदिरा गांधाी की हत्या और सिख विरोधी दंगों के बाद, सहानुभूति लहर में कांग्रेस को जबरदस्त जीत मिली। पार्टी ने 514 सीटों में से 404 पर जीत दर्ज की। भारतीय जनता पार्टी ने दो सीटें जीतकर अपनी शुरुआत की थी। पार्टी ने एक सीट आंध्रप्रदेश(अब तेलंगाना) में और एक सीट गुजरात में जीती थी। राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने थे। कांग्रेस ने तब उत्तरप्रदेश की 85 सीटों में से 83 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि दो सीटें लोकदल ने जीती थी।

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Web Title-Lok Sabha Election 2019 : Will Uttar Pradesh again decide political direction of india
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