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गाय के गोबर से बन रहे गौरी-गणेश, पर्यावरण संरक्षण का संदेश

Gauri-Ganesh being made from cow dung, message of environmental protection - Lucknow News in Hindi

लखनऊ। भारतीय परंपरा में बेहद पवित्र और अपने औषधीय महत्व के कारण पंचगव्य में से एक गाय के गोबर से गौरी-गणेश की मूर्तियां बनाने की पहल शुरू की गयी है। इस बार के गणेशोत्व और दीपावली में लोग इन मूर्तियों का भी पूजन में उपयोग कर सकते हैं। बायोडिग्रेडबल होने के कारण ये मूर्तियां इको फ्रेंडली होंगी। घर के गमले में विसर्जित करने पर ये कंपोस्ट खाद में तब्दील हो जाएंगी। यह पर्यावरण संरक्षण का एक संदेश भी देंगे।

राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रही स्वयं सहयता समूह की महिलाएं भी इसमें बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। गाय के गोबर से मपर्यावरण संरक्षण के साथ इसे रोजगार का जरिया भी बना लिया है। इस बार गणेश महोत्सव के अलावा होंने वाली दीपावाली में गोबर के उत्पाद जैसे गमला, गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां, अगरबत्ती, हवन सामग्री भी महिलाएं तैयार कर रही हैं।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक सुजीत कुमार ने आईएएनएस को बताया, "हमारे समूहों द्वारा गोबर से मूर्तियां बनाने की एक अनूठी पहल की जा रही है। इससे लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। इसके लिए कई जिलों में प्रशिक्षण भी चल रहा है। इसके अलावा मुजफ्फरनगर जिले में दुर्गा समूह की सात सदस्यों द्वारा सजावटी समान, घड़ी, गमला मूर्तियां भी गाय के गोबर से तैयार हो रहे हैं। इसी जिले की नवजागरण स्वयं सहयता की 6 महिलाएं भी इसी कार्य में लगी हुई हैं। झांसी में तीन, जलौन में चार और प्रतापगढ़ में सात स्वयं समूह सहयता में करीब 20 महिलाएं गोबर से बने उत्पादों को बनाने में लगी हैं।"
उन्होंने बताया, "ये लोग अपने हुनर से पांच सौ से लेकर हजार रूपये तक कमा लेती हैं। इसके साथ ही लखनऊ , सुल्तानपुर, हरदोई, गजियाबाद आदि जिलों में भी गोबर से मूर्तियों और पूजन समाग्री बनाने का प्रशिक्षण चल रहा है।"
सिटीजन डेवलपमेंट फोउंडेशन संस्था के माध्यम से प्रवासी महिलाओं को इसकी ट्रेनिंग दी गई। गोबर से गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां बनाने और उनकी धार्मिक मान्यताओं से रूबरू करा कर उन्हें इस काम से जोड़ा गया। करीब 300 प्रवासी महिलाओं के समूह को रोजगार मिल गया है। शालिनी सिंह ने बताया, 20 हजार गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमाओं को बनाने का ऑर्डर भी महिलाओं को मिला है। ऐसे इस दीपावली मां लक्ष्मी इन महिलाओं के घरों में समृद्घ का संचार करेंगी। राजधानी के कृष्णानगर और मलीहाबाद में प्रशिक्षण के साथ बनाने का कार्य चल रहा है।
उन्होंने बताया कि गोबर की बनी इको फ्रेंडली प्रतिमाओं का दाम भी सामान्य प्रतिमाओं के मुकाबले कम होगा जबकि पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के लिए फोयदेमंद होगा। ऐसे में आने वाले गणेशोत्सव और दीपोत्सव पर ऐसी प्रतिमाओं का पूजन कर आप आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती हैं।
एक अन्य समूह की महिला ने बताया कि मूर्ति बनाने में बेल का गुदा, उड़द की दाल का चूरा और हल्की मिट्टी के अलावा गोबर के प्रयोग से मूर्तियां बन रही हैं। यह पूर्णतया प्राकृतिक है। इसमें सभी चीजें नेचुरल इस्तेमाल हो रही हैं। इनको बनाते समय इनमें औषधीय महत्व के पौधे मसलन तुलसी और गिलोय आदि के बीज भी डाले जाएंगे। बाद में ये घर की औषधीय वाटिका में शामिल होकर पूरे परिवार की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर होंगे।
--आईएएनएस

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Web Title-Gauri-Ganesh being made from cow dung, message of environmental protection
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