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सपा के सामने बसपा और प्रसपा से अपना वोट बैंक बचाने की चुनौती

Challenge of saving vote bank - Lucknow News in Hindi

धीरज उपाध्याय

लखनऊ । समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने कई राजनीतिक चुनौतियाँ है, उनमे से सबसे प्रमुख यूपी के आगामी 12 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव हैं। जहाँ सपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके अपने परंपरागत मुस्लिम और यादव वोटरों को अपने साथ बनाए रखने की है।
वहीं उपचुनाव में सपा को अपनी एक मात्र रामपुर सीट को बचाने के साथ बेहतर प्रदर्शन कर 2022 उपचुनावों के लिए कार्यकर्ताओं और वोटरों को सकारात्मक संदेश भी देना हैं।

गौरतलब है कि इस बार लोकसभा चुनाव में 10 सीटें जीतकर उत्साहित बसपा ने भी पहली बार उपचुनाव में उतरने का फैसला किया है। वहीं भाजपा के मजबूत संगठन ने जमीन पर उतरकर उपचुनाव की तैयारियां भी शुरू कर दी है। हालांकि इस बार चुनाव में सपा को चौतरफा चुनौती मिलने वाली है। सपा से अलग हुए शिवपाल यादव की पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) भले ही लोकसभा चुनाव में बेहतर परिणाम ना हासिल कर सकी हो, लेकिन उसका वोट बैंक भी वहीं यादव और मुस्लिम वोटर ही है जो सपा का कोर वोट बैंक है। जबकि बसपा सुप्रीमो मायावती अपने बयानों में ये कह चुकी है की सपा को यादव वोटरों ने भी वोट नहीं दिया इसलिए वो अपने गढ़ में हार गए। उनके बयान से ये स्पष्ट है की वो दलित वोटरों के साथ मुस्लिम मतदाताओं को बसपा की तरफ निर्णायक रूप से साथ आने का संदेश दे रही है। बसपा ने अपने कार्यकर्ताओं को इस चुनाव को मिशन मोड में लड़ने का आदेश दिया है ताकि अधिक सीटें जीतकर पार्टी विधानसभा में अपनी स्थिति और मजबूत कर सके।

बतादें की लोक सभा चुनाव 2019 में सपा-बसपा-रालोद का महागठबंधन होने के बाद भी सपा को केवल 5 सीटें ही मिली थी। जबकि बसपा को 10 सीटों पर जीत मिली थी और उसका वोट प्रतिशत भी बढ़ा था। वहीं सपा का वोट प्रतिशत 4.24% फीसदी कम होकर 17. 96% फीसदी रह गया था। विदेश से लौटने के बाद अखिलेश यादव ने संगठन में बदलाव के संकेत दिये है और पार्टी को चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा है। लेकिन जमीनी हकीकत ये है पार्टी कार्यकर्ता निराश है और अब आगे की रणनीति के लिए अपने अध्यक्ष की तरफ देख रहे है। सूत्रों के मुताबिक इस बार उपचुनाव में पार्टी के पास कोई खास रणनीति नहीं है, यहीं कारण है कि इस बार पार्टी उम्मीदवारों के चयन हेतु आवेदन मँगा रही है। सपा के सामने पहली चुनौती अपने संगठन में जान फूकने की है जो लगातार मिली दो चुनावी हार के बाद हताश व निराश है। जानकारों के मुताबिक अखिलेश यादव के भविष्य के लिए ये उपचुनाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि सपा में अब ऐसे नेता कम हैं जो जमीन पर जाकर काम करे। इसलिए वो अपने कोर वोट को बचाने के लिए अपनी पार्टी में मुस्लिम कार्यकर्ताओं को और अधिक प्रतिनिधित्व देने पर विचार कर सकते है ताकि मुस्लिम वोटर उनके साथ रहे।





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Web Title-Challenge of saving vote bank
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