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किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी ने पद छोड़ने के दिए संकेत, कहा-अब मजाक जैसा लगता है सब कुछ

Kinnar Akharas Mahamandaleshwar Mamta Kulkarni hints at stepping down, says everything now seems like a joke. - Allahabad News in Hindi

प्रयागराज। आध्यात्मिक दुनिया में महामंडलेश्वर, जगद्गुरु और शंकराचार्य जैसे बड़े-बड़े पदों की संख्या जिस तेजी से बढ़ी है, इस बीच किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी ने आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में अपने पद को लेकर ऐसी बात कह दी, जिसने लोगों के बीच हलचल तेज कर दी। उन्होंने कहा है कि महामंडलेश्वर का पद अब उन्हें एक गंभीर आध्यात्मिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मजाक जैसा लगने लगा है। आईएएनएस से बात करते हुए ममता कुलकर्णी ने कहा, ''जब मैं इस आध्यात्मिक यात्रा में गहराई से उतरीं, तब मुझे कई सच्चाइयों का एहसास हुआ। बाहर से जो दुनिया बहुत पवित्र और ज्ञान से भरी हुई दिखाई देती है, अंदर जाकर देखने पर वैसी नहीं लगती। आज हर तरफ ऐसे लोग घूम रहे हैं, जो खुद को महामंडलेश्वर या जगद्गुरु घोषित कर रहे हैं, लेकिन उनके पास न तो सही ज्ञान है और न ही आत्मज्ञान। केवल वस्त्र पहन लेने या कोई पद पा लेने से कोई संत नहीं बन जाता।''
ममता कुलकर्णी ने धार्मिक ग्रंथों का उदाहरण देते हुए आत्मज्ञान की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ''वेदों और उपनिषदों में भी सिखाया गया है कि केवल मंत्रों को याद कर लेना या शास्त्रों का ज्ञान होना ही सब कुछ नहीं है। असली ज्ञान वह है, जिससे व्यक्ति अपने भीतर की सच्चाई को समझ सके।''
ममता ने श्वेतकेतु और उनके पिता उद्दालक ऋषि के संवाद का जिक्र करते हुए कहा कि जब चारों वेद कंठस्थ करने के बाद भी आत्मज्ञान नहीं मिला, तो वह ज्ञान अधूरा था। आज भी यही स्थिति देखने को मिल रही है।
उन्होंने कहा, ''मैंने अपने आध्यात्मिक सफर में बहुत कम सच्चे संत देखे हैं। दस में से नौ लोग ऐसे मिले, जो झूठे थे और केवल पद और पहचान के पीछे भाग रहे थे। इसी अनुभव के चलते मुझे अब महामंडलेश्वर का पद एक हास्य विनोद जैसा लगने लगा है। जब हर दूसरे दिन नए महामंडलेश्वर बनाए जा रहे हों, तो ऐसे में पदों की गंभीरता अपने आप खत्म हो जाती है।''
किन्नर अखाड़े के संस्थापक रहे ऋषि अजय दास पर भी ममता कुलकर्णी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "ऐसे कई लोग हैं, जिन्हें धर्म, वेद और परंपरा की बुनियादी समझ भी नहीं है, लेकिन वे बड़े-बड़े मंचों से उपदेश देते हैं। नाच-गाने को लेकर टिप्पणियां करते हैं। भारतीय परंपरा में नृत्य और संगीत को कभी तुच्छ नहीं माना गया। भगवान शिव का नटराज स्वरूप और श्रीकृष्ण की लीलाएं इसके उदाहरण हैं।"
ममता कुलकर्णी ने कहा कि वह महामंडलेश्वर का पद छोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रही हैं। उन्होंने कहा, "मुझे अंदर से संकेत मिल रहा है कि मुझे भी अपने इस पद को अभी छोड़ना चाहिए, क्योंकि जब चारों ओर नकली लोग भरे हों, तो ऐसे पद पर बने रहने का कोई अर्थ नहीं रह जाता। सत्य के लिए किसी विशेष वस्त्र या पद की जरूरत नहीं होती। सच्चा गुरु वही होता है, जो तपस्वी हो, अहंकार से दूर हो और दिखावे से परे जीवन जीता हो।"
--आईएएनएस

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