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साहित्य का सूरज चमका झीलों की नगरी में, डॉ. अवधेश जौहरी के नाम रहा शायराना उदयपुर शिखर सम्मान

The sun of literature shone in the city of lakes, with Dr. Awadhesh Johri receiving the Shayrana Udaipur Shikhar Samman. - Udaipur News in Hindi

उदयपुर। जहां शब्दों में चाशनी हो और जज़्बातों में खुशबू, वहीं शायराना उदयपुर की महफ़िल सजती है। पिछले 15 वर्षों से अदब की सेवा कर रहे शायराना उदयपुर परिवार ने ऐश्वर्या कॉलेज के प्रांगण में अपना वार्षिक राज्य स्तरीय शिखर सम्मान समारोह आयोजित किया। इस शाम की सबसे चमकदार उपलब्धि भीलवाड़ा के डॉ. अवधेश कुमार जौहरी के नाम रही, जिन्हें 'शायराना उदयपुर सम्मान 2025' से नवाज़ा गया। कहते हैं कि कलम जब दिल में डूबकर चलती है, तो पत्थर भी मोम हो जाते हैं। डॉ. अवधेश जौहरी ने जब अपनी कविता के ज़रिए 'माँ' की ममता को शब्दों में पिरोया, तो पूरा सभागार पलकें भिगोकर नतमस्तक हो उठा। 50 से अधिक किताबों के लेखक डॉ. जौहरी को मुख्य अतिथि अतिरिक्त आयुक्त (देवस्थान विभाग) गीतेशश्री मालवीया ने पगड़ी, शॉल और मोमेंटो पहनाकर उनकी साहित्यिक साधना को सलाम किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. जिनेन्द्र शास्त्री ने बड़ी ख़ूबसूरत बात कही कि "साहित्य आज की युवा पीढ़ी के लिए किसी संजीवनी औषधि से कम नहीं है।" वहीं अध्यक्षता कर रहीं डॉ. सीमा सिंह ने कहा कि साहित्य ही वह ज़रिया है जो इंसान के भीतर मूल्यों के फूल खिलाता है।
कोटा, चित्तौड़, राजसमन्द और प्रतापगढ़ जैसे शहरों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से उल्लास का ऐसा दरिया बहाया कि हर कोई झूम उठा। संस्थापक मनोज गीतांकर ने भविष्य के लिटरेचर फेस्टिवल का ख़्वाब साझा किया, तो संचालन कर रहे मनोज आंचलिया और सीमा वेद की जुगलबंदी ने समां बाँध दिया।
संस्था के रूह-ए-रवां मनोज गीतांकर ने साल भर के सफरनामे के साथ भविष्य के 'लिटरेचर फेस्टिवल' और साहित्य कार्यशालाओं का खाका पेश किया। कार्यक्रम प्रभारी मनीष चौबीसा ने समाज को आइना दिखाने में कवियों की अहमियत बताई।
मनोज आंचलिया और सीमा वेद के दिलकश संचालन के बीच राजस्थान के कोने-कोने से आए रचनाकारों ने अपनी कविताओं से जादू जगा दिया। महफ़िल में : मनमोहन मधुकर, बाल कृष्ण त्रिपाठी, गुलजार प्रतापगढ़ी, श्याम मठपाल, सीपी जैन, मंजूर हुसैन, निशित चापलोत, मुरलीधर गट्टानी, हाजी मोइनुद्दीन, गोपाल लाल स्वर्णकार, रिमझिम शर्मा, शामिल शेख, प्रकाश शर्मा, अनिता अन्ना, डॉ. शीतल श्रीमाली, मोहन लाल जाट, प्रशांत फ़लेजा, गौतम मीणा, अखिलेश जोशी, गोविंद ओड, मनीष व्यास, महावीर जावरीया, लोकेश वैष्णव, हेमंत सूर्यवंशी, चंद्र प्रकाश, विजय राज कुमावत, पंकज जोशी, महेश उपाध्याय, जिग्नेश शर्मा, डॉ. राधिका लड्ढा, सूर्यप्रकाश सुवालका और संतोष अग्रवाल ने अपनी मखमली आवाज़ और धारदार रचनाओं से खूब वाहवाही बटोरी।
यह शाम महज़ एक पुरस्कार समारोह नहीं थी, बल्कि राजस्थान की माटी से उपजे साहित्य के प्रति एक गहरी कृतज्ञता थी।

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Web Title-The sun of literature shone in the city of lakes, with Dr. Awadhesh Johri receiving the Shayrana Udaipur Shikhar Samman.
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