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आईआईएम उदयपुर में बरेली के छात्र की संदिग्ध मौत – एक दर्दनाक सवालों का सिलसिला

Suspicious death of Bareilly student in IIM Udaipur – a series of painful questions - Udaipur News in Hindi

उदयपुर/बरेली। बरेली के रहने वाले 23 वर्षीय फरहत मोहम्मद की मौत ने बरेली से लेकर उदयपुर तक कई दिलों को झकझोर दिया है। यह वह छात्र था जिसने CAT जैसी कठिन परीक्षा में 98.42 पर्सेंटाइल हासिल कर आईआईएम उदयपुर तक का सफर तय किया था। एक ऐसा छात्र, जिसने अभी दो महीने पहले ही अपने सपनों की नई मंज़िल की शुरुआत की थी। लेकिन रविवार को हॉस्टल के कमरे से उसका शव फंदे पर लटका मिला।

संस्थान और पुलिस की ओर से इसे आत्महत्या बताया जा रहा है, लेकिन पिता मोहम्मद इशाक इसे हत्या करार देते हैं। उनके सवाल बेहद सीधे और दर्दनाक हैं – “क्या मेरा बेटा, जो जिंदगी से भरा हुआ था, सचमुच खुदकुशी कर सकता है? या फिर उसे मारकर आत्महत्या का रूप दिया गया?” फरहत ने बरेली के खंडेलवाल कॉलेज से बीसीए में 76% अंक लाकर पढ़ाई पूरी की थी। दो बड़ी बहनों के भाई और मां के निधन के बाद पिता की उम्मीदों का सहारा बना था। पहले ही प्रयास में आईआईएम जैसे संस्थान में प्रवेश – यह उपलब्धि उसके जुनून और मेहनत की गवाही देती है।
पिता बताते हैं कि बेटा बेहद जिंदादिल था। हर शनिवार और रविवार परिवार से लंबी बातें करता था। शनिवार को बहनों से बातचीत हुई थी, लेकिन रविवार को अचानक फोन बंद हो गया। रात 10 बजे अचानक खबर आई – “आपके बेटे ने आत्महत्या कर ली है।”
यह सूचना जितनी चौंकाने वाली थी, उतनी ही अविश्वसनीय भी।
पिता के आरोप और संस्थान की चुप्पी
पिता का आरोप है कि आईआईएम प्रबंधन ने उदयपुर पहुंचने पर उन्हें छात्रों से स्वतंत्र रूप से मिलने नहीं दिया। जिस कमरे में शव मिला, वहां उन्हें हालात आत्महत्या जैसे नहीं लगे। उनका कहना है – “मेरे बेटे का गला रस्सी से घोंटा गया और फिर शव को फंदे से लटकाकर आत्महत्या का रूप दिया गया।”
प्रबंधन की यह चुप्पी और नियंत्रण की कोशिशें ही शक को और गहरा करती हैं। सवाल उठता है कि एक प्रतिष्ठित संस्थान, जिसे पारदर्शिता और जिम्मेदारी की मिसाल होना चाहिए, वहां पीड़ित परिवार को सच्चाई से दूर क्यों रखा गया?
रहस्य से घिरी ‘पार्टी वाली रात’
कुछ छात्रों से मिली गुपचुप जानकारी के अनुसार, रविवार रात फरहत दोस्तों के साथ किसी पार्टी में शामिल हुआ था। इसके बाद अचानक मौत की खबर ने कहानी को और संदिग्ध बना दिया।
क्या पार्टी में कोई विवाद हुआ था?क्या किसी ने फरहत को निशाना बनाया?या यह सब महज संयोग है?
ये सवाल पुलिस जांच के घेरे में हैं।
लैपटॉप और मोबाइल – राज़ की चाबी
फरहत का लैपटॉप और मोबाइल पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। इन्हीं से उस रात की असली तस्वीर सामने आ सकती है। क्या उसमें कोई चैट, मेल या कॉल रिकॉर्ड छुपा है जो हत्या या दबाव की ओर इशारा करता है? या फिर वाकई मानसिक तनाव की झलक मिलती है?
परिवार का विश्वास है कि तकनीकी जांच से सच सामने आएगा।
आईआईएम की चमक और पारदर्शिता पर सवाल
फरहत को आईआईएम रांची और उदयपुर दोनों जगह प्रवेश मिला था। उसने उदयपुर इसलिए चुना, क्योंकि यहां उसके कुछ दोस्त पहले से पढ़ते थे। लेकिन वही उदयपुर आज उसके परिवार के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
आईआईएम जैसे संस्थान जहां देश का भविष्य तैयार होता है, वहां यदि एक मेधावी छात्र की मौत संदेहों से घिरी रह जाए तो यह केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे शैक्षणिक माहौल का संकट है।
आलोचनात्मक दृष्टि
संस्थान की जिम्मेदारी : क्या आईआईएम प्रबंधन ने घटना की जांच में पारदर्शिता दिखाई? या उन्होंने जल्दीबाज़ी में इसे आत्महत्या बताकर अपनी छवि बचाने की कोशिश की?
पुलिस की भूमिका : शुरुआती बयान आत्महत्या की ओर झुकते क्यों दिख रहे हैं? क्या जांच पहले से किसी दिशा में मोड़ी जा रही है?
छात्र सुरक्षा : क्या आईआईएम जैसे बड़े संस्थानों में भी छात्रों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और निगरानी की व्यवस्था पर्याप्त है?
सामाजिक पहलू : मेधावी छात्रों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव, संस्थागत राजनीति और असुरक्षा किस तरह उनके जीवन को प्रभावित कर रही है?
गमगीन विदाई, अधूरे सवाल
पोस्टमार्टम के बाद जब फरहत को गांव धंतिया के कब्रिस्तान में दफनाया गया, तो पूरा गांव आंसुओं में डूबा था। हर किसी के मन में एक ही सवाल था – “क्या सचमुच यह आत्महत्या थी?”
आज भी ये सवाल हवा में तैर रहे हैं:
पार्टी वाली रात आखिर क्या हुआ था?
लैपटॉप और मोबाइल कौन से राज़ खोलेंगे?
क्या पुलिस सचमुच निष्पक्ष जांच करेगी?
फिलहाल इतना साफ है कि फरहत की मौत ने सिर्फ एक परिवार को ही नहीं, बल्कि आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की साख और पारदर्शिता को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि सपनों की सबसे ऊंची उड़ान भी कितनी नाजुक होती है। और यह कि संस्थागत जिम्मेदारी, न्याय और सच्चाई की खोज केवल परिवार की नहीं, समाज की भी सामूहिक लड़ाई होनी चाहिए।

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Web Title-Suspicious death of Bareilly student in IIM Udaipur – a series of painful questions
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