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नारायण सेवा संस्थान के सामूहिक विवाह समारोह में 54 जोड़े थामेंगे एक-दूसरे का हाथ

54 couples will hold each other hands in mass marriage ceremony of Narayan Seva Sansthan - Udaipur News in Hindi

उदयपुर (ब्यूरो)। दिव्यांगों और निर्धन युवाओं के घर बसाने के पुनीत कार्य में जुटे उदयपुर के नारायण सेवा संस्थान के 40 वें नि:शुल्क दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह में 54 जोड़े एक-दूसरे का हाथ थामने जा रहे हैं। यह विवाह समारोह आगामी 2 और 3 सितम्बर को होने जा रहा है।

संस्थान के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल बताते हैं कि सामूहिक विवाह समारोह संस्थान के सेवा महातीर्थ बड़ी परिसर में होगा। इसमें राजस्थान के अलावा बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के वर-वधू शामिल हैं। इस साल का यह दूसरा सामूहिक विवाह समारोह है, जो 54 जोड़ों की ज़िन्दगी में खुशियाँ घोलेगा। उन्होंने बताया कि इस विवाह समारोह में ऐसे भी कुछ जोड़े हैं, जो हाथ-पैरों से दिव्यांग हैं। जो व्हीलचेयर या बैशाखी से या घिसटकर चल पाते हैं। चक्षुरोगी दिव्यांग भी इसमें शामिल हैं। विवाह समारोह प्रभारी रोहित तिवारी बताते हैं कि 2 सितम्बर की शाम पांच बजे वर और वधुओं की बिंदोली नगर निगम से निकलेगी। शहर के मुख्य मार्गों से होकर यह सेवातीर्थ बड़ी पहुंचेगी, जहां फेरे की रस्में की जाएंगी।
गंगोत्री विभाग प्रमुख रजत गौड़ ने बताया कि 2 सितंबर को शुभ मुहूर्त में संस्थान संस्थापक चेयरमैन पद्मश्री कैलाश जी 'मानव' व कमला देवी जी के सानिध्य में गणपति स्थापना, हल्दी रस्म व विवाह के पारम्परिक गीत-नृत्य के बीच मेहंदी रस्म की अदायगी होगी। इस दौरान उन जोड़ों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने पिछले विवाहों में फेरे लेकर घर-संसार बसाया और वे खुशहाल हैं।
वर-वधुओं को अपने खर्च से लाएगा और भेजेगा संस्थानः
संस्थान इस विवाह समारोह में वर और वधुओं को अपने खर्चे से वाहनों से लेकर आएगा। भले ही वह राजस्थान या अन्य प्रांतों के हो। विवाह के बाद उन्हें उपहारों के साथ जोड़े के साथ उनके घर पहुंचाने की जिम्मेदारी संस्थान ने तय कर ली है। प्रस्तावित जोड़े और उनके परिजन 1 सितंबर तक उदयपुर पहुंच जाएंगे। विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले जोड़ों, उनके परिजनों व अतिथियों के संपूर्ण सुविधायुक्त आवास, भोजन, परिवहन आदि की व्यवस्था संभालने के लिए संस्थान ने समितियों को जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी हैं।
देश भर से 1500 से अधिक अतिथि आएंगेः
इस सामूहिक विवाह में दिल्ली, अहमदाबाद, गुजरात, जयपुर, लखनऊ, रायपुर, कोलकाता, रांची, चंडीगढ़, भोपाल, इंदौर, मुंबई, हैदराबाद, शिमला आदि शहरों से 1500 से अधिक घराती -बराती बन समारोह में भाग लेंगे। जो नवयुगलों को आशीर्वाद प्रदान करेंगे। समारोह में देश के विभिन्न नगरों से संस्थान की शाखाओं तथा आश्रमों के प्रभारी व प्रेरक भी भाग लेंगे। संस्थान की ओर से 40 वें नि:शुल्क दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह का पोस्टर संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, विष्णु शर्मा हितैषी तथा भगवान प्रसाद गौड़ ने विमोचित किया।
संस्थान के प्रयासों से अब तक 2252 जोड़े थाम चुके हाथः
दिव्यांगजन पुनर्वास योजना के तहत तीन दशक पहले शुरू किए गए नि:शुल्क दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह में संस्थान इससे पहले 2252 जोड़ों का विवाह करा चुका है। संस्थान के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल बताते हैं कि शुरूआत में संस्थान ने दिव्यांग और निर्धन जोड़ों के परिवारों को आपस में मिलाने के लिए परिचय सम्मेलन आयोजित किया। किन्तु उस समय वधुओं के तीन जबकि वर के चार सौ से अधिक प्रस्ताव आए थे। तब यह निर्णय लिया कि यदि दिव्यांग और निर्धन युवाओं को वास्तविक मदद पहुंचानी है तो उनके निशुल्क विवाह ही नहीं कराने, बल्कि उनके लिए रोजगार के अवसर भी प्रदान करने होंगे और वहीं से इसकी शुरूआत हुई। संस्थान इस तरह 39 सामूहिक विवाह समारोह में 2252 दिव्यांग और निर्धन जोड़ों का घर बसा चुका है।
कन्यादानियों का किया जाएगा सम्मानः
आगामी विवाह समारोह मं जो 54 जोड़ों के धर्म माता-पिता बन 108 परिवारों का सपना साकार करने वाले संस्थान के सदस्यों का संस्थान परिवार द्वारा 2 सितंबर को प्रातः 11 बजे सम्मान समारोह में राजस्थानी परंपरा से अभिनंदन किया जाएगा। रमिला बनेगी आबू के युवक की आंखेंः सिरोही जिले के आबूरोड निवासी शैतान की 6 साल की उम्र में अचानक नेत्रहीनता आ गई। जिसके चलते पूरा परिवार परेशान दुःखी हो गया। वर्ष 2007 में गांव वालों की मदद से नारायण सेवा संस्थान आया। जहां संस्थान के आवासीय विद्यालय में उसकी निःशुल्क शिक्षा—दीक्षा हुई। अब वह यहां एक निजी स्कूल में अध्यापन कराता है। गरीबी और बड़ा परिवार के चलते उसके पिता शैतान की शादी करने में असमर्थ थे। कुछ महीने पहले उसे नारायण सेवा संस्थान के सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किए जाने की जानकारी मिली। उसी दौरान आबू निवासी रमिला से मुलाकात हुई जो अनाथ है। उसकी सहमति के बाद शैतान ने संस्थान में विवाह करने का आवेदन किया जिसे संस्थान ने स्वीकार कर लिया। अब दोनों हमसफर बनने जा रहे हैं। गौरतलब है कि शैतान इन दिनों आरएएस परीक्षा की तैयारी में जुटा है।
आत्मनिर्भर रमझू की दुल्हन बनेंगी सोनियाः
बांसवाड़ा जिले का रहने वाला रमझू 2 साल की उम्र में पोलियो का शिकार हो गया। जिसका नारायण सेवा संस्थान में ऑपरेशन हुआ। कैलिपर लगाकर चलने लगा। गरीबी के चलते संस्थान में ही सफाईकर्मी का काम करने लगा। कुछ दिनों बाद उसने संस्थान के कम्प्यूटर कोर्स में दाखिला लिया। अब वह ऑपरेटर की नौकरी कर रहा है। अपने गांव की ही सोनिया जो कि निर्धन परिवार से है। दोनों सामूहिक विवाह में एकदूजे के बनने जा रहे हैं।
संस्थान ने बनाया सकलांग, अब करेंगे शादीः
कुशलगढ़ बांसवाड़ा निवासी अनिल बचपन से एक पैर और एक हाथ से दिव्यांग था। इसी तरह रंजिला बेदी भी घिसट—घिसटकर चलती थी। संस्थान में हुए उपचार और ऑपरेशन के बाद दोनों बैसाखी तथा कैलीपर्स के सहारे चल पाते हैं। दोनों ने गरीबों के चलते संस्थान में ही विवाह करने का पंजीयन कराया और उनकी शादी होने जा रही है। रंजिला इन दिनों सरकारी सेवा की परीक्षा को लेकर तैयारी में जुटी है।

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