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आदिवासी किसानों के लिए 'एटीएम' की तरह हैं भेड़-बकरी और खरगोश, सीएसडब्ल्यूआरआई निदेशक ने किया कृषि सामग्री का वितरण

Sheep, Goats, and Rabbits Serve as ATMs for Tribal Farmers, CSWRI Director Distributes Agricultural Supplies - Tonk News in Hindi

मालपुरा। केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI) के मरुक्षेत्रीय परिसर, बीकानेर द्वारा अनुसूचित जनजाति (ST) उपयोजना के तहत एक विशेष पहल की गई है। कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), बड़गांव (उदयपुर) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'किसान वैज्ञानिक संगोष्ठी एवं सामग्री वितरण कार्यक्रम' में आदिवासी किसानों को वैज्ञानिक खेती और पशुपालन के गुर सिखाए गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएसडब्ल्यूआरआई के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने की। भेड़-बकरी और खरगोश हैं छोटे किसानों के लिए 'एटीएम' निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने आदिवासी किसानों से पारंपरिक कृषि के स्थान पर वैज्ञानिक खेती और उन्नत पशुपालन मॉडल अपनाने की अपील की। उन्होंने मिट्टी की जांच के आधार पर ही रासायनिक खादों का संतुलित उपयोग करने की सलाह दी।
निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने कहा: > "छोटे और सीमांत किसानों के लिए भेड़, बकरी और खरगोश कम खर्चे में पलने वाले बेहतरीन पशु हैं। ये पशुपालक किसानों के लिए किसी भी समय 'एटीएम' (ATM) की तरह काम करते हैं, जो जरूरत पड़ने पर तत्काल आर्थिक मजबूती प्रदान करते हैं। किसान वैज्ञानिकों की सलाह से समेकित खेती और उन्नत पशुपालन मॉडल को अपने खेतों पर लागू करें।"
जैविक खेती पर जोर: उन्होंने सरकार द्वारा जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी और किसानों से सीधे उपभोक्ताओं तक अपने उत्पाद पहुंचाने का आह्वान किया।
उन्नत नस्लें अपनाने की सलाह: डॉ. तोमर ने फसलों के लिए अच्छी गुणवत्ता के बीज और पशुओं में उन्नत नस्ल की भेड़-बकरी व खरगोश पालने के फायदों को उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
वैज्ञानिकों ने सिखाए उन्नत कृषि और मूल्य संवर्द्धन के गुर
इस संगोष्ठी में केवीके प्रभारी डॉ. पी.सी. भटनागर, डॉ. आशीष चोपड़ा, डॉ. चेतन पाटिल सहित विभिन्न कृषि विशेषज्ञों और वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारियों ने किसानों के साथ सीधा संवाद किया। वैज्ञानिकों ने आदिवासी कृषकों को वैज्ञानिक तरीके से समेकित खेती, पशुपालन, पोल्ट्री (मुर्गी पालन) और उनके मूल्य संवर्धित (Value-Added) उत्पादों को तैयार करने व बेचने की उन्नत तकनीकों की विस्तार से जानकारी दी।
झाड़ोल-फलासिया ब्लॉक के 55 किसानों को मिली कृषि सामग्री
अविकानगर के मीडिया प्रभारी डॉ. अमरसिंह मीना ने बताया कि इस कार्यक्रम में उदयपुर जिले के झाड़ोल-फलासिया ब्लॉक के देवास एवं बड़ा भीलावाड़ा गांवों के कुल 55 से अधिक आदिवासी किसानों (जिसमें 47 पुरुष और 8 महिला किसान शामिल हैं) ने भाग लिया।
निदेशक डॉ. तोमर की गरिमामयी उपस्थिति में इन सभी लाभार्थी किसानों को खेती और पशुपालन को सुगम बनाने के लिए टीएसपी इनपुट्स (कृषि सामग्री) जैसे कीटनाशक स्प्रे मशीन, छाता, टॉर्च, आयरन फेंसिंग (लोहे की जाली), आयरन पोल्स (लोहे के खंभे) और लोहे की चादरें आदि आवश्यक सामग्रियां निशुल्क वितरित की गईं।
इस अवसर पर जगदीश प्रसाद जोशी (सदस्य, वनवासी कल्याण आश्रम), जगदीश कुलमी (प्रदेश संगठन मंत्री, वनवासी कल्याण परिषद उदयपुर), मुकेश चोपड़ा, प्रदीप सिंह, विष्णु भटनागर सहित कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ व कर्मचारी डॉ. दीपक जैन, डॉ. मनप्रीत, डॉ. जीवन, डॉ. बहादुर सिंह, संजय धाकड़, एमपी सिंह, अचल समधानी और धीरेंद्र व्यास उपस्थित रहे।

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Web Title-Sheep, Goats, and Rabbits Serve as ATMs for Tribal Farmers, CSWRI Director Distributes Agricultural Supplies
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