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टोंक स्थित विश्व विख्यात शोध संस्थान के लिए हुई चर्चा, फोल्डर के विमोचन के साथ उसके विकास के लिए संघर्ष का लिया संकल्प

Discussion held for the world-renowned research institute in Tonk; a folder was released, and a pledge was made to strive for its development. - Tonk News in Hindi

टोंक। जयपुर राजस्थान की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को संजोने वाले विश्व विख्यात मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान (MAAPRI) की अहमियत एवं वर्तमान आवश्यकता पर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन शनिवार को जयपुर के झोटवाड़ा स्थित फार्चून एविलेट होटल में हुआ। इस कार्यक्रम में संस्थान की विरासत को मजबूत करने और उसकी स्थिति पर गहन विचार-विमर्श किया गया। साथ ही शोध संस्थान की अहमियत और वर्तमान स्थिति पर आधारित फोल्डर का विमोचन किया गया।

सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बीएल शर्मा ने कहा कि इस संस्थान को बचाने के लिए इसे आधुनिक से ओतप्रोत करते हुए आगे बढाने पर जोर दिया। उन्होंन शिक्षा को बढावा देने पर जोर देते हुए कहा जो हमारे पूर्वजों ने धरोहर संरक्षित की उनको आगे बढाने की जरूरत है। इसके विकास पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। शोध संस्थान की अहमियत को आमजन को अवगत कराते हुए उनको भी जोड़ना चाहिए। उन्होंन एकता- भाईचारे पर जोर दिया। सेवानिवृत्त न्यायाधीश मोहम्मद हनीफ ने कहा अरबी फारसी शोध संस्थान स्तरीय बने, इस पर सरकार के साथ ही हमें भी ध्यान देने की ज़रूरत हैं। सेवानिवृत्त न्यायाधीश अय्यूब खान ने शोध संस्थान के महत्व पर रोशनी डालते हुए इसे विश्वविद्यालय की तरह शोध का बड़ा केंद्र बनाए जाने के लिए आवश्यक प्रयास किए जाने पर जोर दिया। साथ ही शोध संस्थान के महत्वपूर्ण पदो पर भर्ती किए जाने के लिए हर स्तर पर प्रयास की आवश्यकता बताया।
मंच के संचालक सिकंदर खान नियाजी ने कहा टोंक पिछड़ा है, लेकिन कल्चर पूरी तरह सुरक्षित है। इस मौके पर सेवानिवृत्त न्यायाधीश शहाबुद्दीन अहमद, टोंक प्रोग्रेसिव संयोजक सरताज अहमद एडवोकेट, सदर मुफ्ती आदिल नदवी, सैयद बदर अहमद, मोहम्मद अजमल देवपुरा, हुसैन कायमखानी ने शोध संस्थान की अहमियत पर रोशनी डाली। इस संस्थान के विकास के लिए संबंधित मंत्री से मुलाकात करने पर भी विमर्श हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बी.एल. शर्मा रहे, जबकि अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति मोहम्मद हनीफ ने की। विशेष रूप से मौजूद रहे रिटायर्ड जज अयूब खान, टोंक प्रोग्रेसिव कमेटी के पदाधिकारी सहित कई प्रबुद्धजन और विद्वान मौजूद रहे। इस मौके पर जफर रजा, सरताज मेहमूद, मोहम्मद शकील, सोहेल खान, अमजदुल्लाह खान, फरहान अख्तर, अफरोज सरताज, मोहम्मद सुफियान, इमरान सरताज, गुफरान खान आदि मौजूद रहे।
उल्लेखनीय है कि शोध संस्थान, जो टोंक जिले में स्थित है। इसको 1978 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत ने निदेशालय के रुप में स्थापित किया था। यहां लगभग 8,000 से अधिक दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथ (manuscripts) संरक्षित हैं, जिनमें अरबी, फारसी, उर्दू, संस्कृत साहित्य, इतिहास, इस्लामी अध्ययन, सूफीवाद, चिकित्सा, दर्शनशास्त्र और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े सदियों पुराने ग्रंथ शामिल हैं। ये ग्रंथ टोंक के तीसरे नवाब मोहम्मद अली खां ने एकत्रित किए थे। उसके बाद भी कई जखीरा यहां पर कई जगहों से संग्रहित किया गया। आज ये विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है। 50 से अधिक देशों के शोधार्थी एवं पर्यटक यहां आ चुके हैं। जिससे इसकी अहमियत का पता लगाया जा सकता है।
ये संस्थान राजस्थान की ऐसी सांस्कृतिक धरोहर है, जिसकी आवश्यकता विश्व स्तर तक है। वक्ताओं ने कार्यक्रम में संस्थान की अहमियत पर जोर देते हुए कहा गया कि यह न केवल प्राचीन ज्ञान का संरक्षण करता है, बल्कि सांस्कृतिक विविधता, हिंदू-मुस्लिम एकता और ऐतिहासिक समझ को मजबूत करता है। वर्तमान युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने, बहुभाषी साहित्य के अध्ययन और पूर्वाग्रह-मुक्त इतिहास बोध के लिए यह संस्थान अत्यंत आवश्यक है। हालांकि, संस्थान इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहा है। पिछले 30 वर्षों से महत्वपूर्ण पदों पर कोई नियमित भर्ती नहीं हुई है, जिसके कारण कई पद रिक्त हैं और कर्मचारियों की भारी कमी है। इससे दुर्लभ ग्रंथों का संरक्षण, शोध कार्य, डिजिटलीकरण और रखरखाव प्रभावित हो रहा है। कार्यक्रम में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें सरकार को अवगत कराने, पत्र लिखने और कानूनी विकल्पों (जैसे सेवा नियमों के तहत भर्ती प्रक्रिया तेज करना या उच्च न्यायालय में याचिका दायर करना) पर विचार किया गया।
यह कार्यक्रम राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक महत्व बनाए रखने की दिशा में एक सार्थक प्रयास साबित हुआ। प्रतिभागियों ने संस्थान की सुरक्षा, विकास और कर्मचारी भर्ती के लिए सामूहिक प्रयासों की शुरुआत करने का संकल्प लिया। ऐसे प्रयास न केवल संस्थान को मजबूत करेंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य ज्ञान का खजाना सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
प्रोग्रेसिव कमेटी प्रदेश स्तर पर करेगी काम:
आयोजित कार्यक्रम में ये भी तय हुआ की प्रोग्रेसिव कमेटी प्रदेश स्तर पर गठित होगी। रिटायर्ड जज अयूब खान की सरपरस्ती में शोध संस्थान ही नहीं राजस्थान की कई समस्याओ के समाधान के लिए अपनी भूमिका निभाएगी। शिक्षा के लिए स्टूडेंट्स को प्रोत्साहित करने के साथ ही राजस्थान के विकसित के लिए कार्य करने पर जोर देगी।

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