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पुण्यतिथि विशेष शिक्षक से किसान नेता बनने का सफर, राजेश पायलट के सिद्धांतों को जीने वाले 'दबंग' मास्टर मुकुल की यादें आज भी ताज़ा

Death Anniversary Special : From a teacher to a farmer leader, memories of the Dabangg Master Mukul, who lived the principles of Rajesh Pilot, remain fresh. - Tonk News in Hindi

टोंक। "खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले, खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है..." इन पंक्तियों को अपने जीवन में उतारने वाले टोंक जिले के कद्दावर नेता मास्टर रामस्वरूप मुकुल की आज पुण्यतिथि है। एक साधारण शिक्षक से लेकर किसानों के मसीहा और दबंग राजनीतिक पहचान बनाने वाले मास्टर मुकुल का जीवन आज भी आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। शिक्षक नेता से किसान राजनीति का चमकता सितारा मास्टर रामस्वरूप मुकुल ने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में की थी। शिक्षा विभाग में रहते हुए उन्होंने शिक्षकों की पीड़ा को करीब से देखा और उनकी आवाज को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए शिक्षक नेता की भूमिका निभाई। उनकी कार्यक्षमता और दूरदृष्टि का ही परिणाम था कि वे बाद में टोंक जिला सहकारी भूमि विकास बैंक के चेयरमैन बने और खेतिहर मजदूरों व किसानों के हितों के लिए ऐतिहासिक कार्य किए।
राजेश पायलट के विचारों को किया आत्मसात
मास्टर मुकुल की पहचान एक दबंग और बेबाक छवि वाले नेता की रही। उन्होंने स्व. राजेश पायलट के उस प्रसिद्ध वाक्य को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया, जिसमें उन्होंने कहा था— "जब तक किसान का बेटा पढ़-लिखकर उन कुर्सियों तक नहीं पहुंच जाता जहाँ से किसानों के हितों के निर्णय होते हैं, तब तक किसान का भाग्य नहीं बदलेगा।" इसी लक्ष्य के साथ उन्होंने गुर्जर समाज और ग्रामीण अंचलों में शिक्षा और जागरूकता की अलख जगाई।
शिक्षा को बनाया परिवार का संकल्प
राजनीति के साथ-साथ मास्टर मुकुल का पूरा ध्यान गांव और गरीब के बालक को शिक्षा से जोड़ने पर रहा। उन्होंने न केवल समाज को प्रेरित किया, बल्कि अपने परिवार को भी इसी मार्ग पर लगाया। उन्होंने अपने पुत्रों स्व. रामसिंह मुकुल, रमेश मुकुल और पुत्री सुमन गुर्जर को उच्च शिक्षित कर समाज सेवा और शिक्षा के प्रति समर्पित किया। उनके द्वारा स्थापित शिक्षा के मंदिर आज भी ग्रामीण छात्रों को कामयाब बनाने का माध्यम बन रहे हैं।
एक अमिट विरासत
आज भले ही मास्टर रामस्वरूप मुकुल हमारे बीच सशरीर मौजूद नहीं हैं, लेकिन टोंक की राजनीति और गुर्जर समाज के उत्थान में उनका योगदान सदैव जीवित रहेगा। उनकी दबंग छवि, बेबाकी और किसानों के प्रति उनका समर्पण आज भी उनकी यादों को संजोए हुए है।

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Web Title-Death Anniversary Special : From a teacher to a farmer leader, memories of the Dabangg Master Mukul, who lived the principles of Rajesh Pilot, remain fresh.
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