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खदान में भूस्खलन : 22 घंटे की जद्दोजहद के बाद मलबे से निकला श्रमिक का शव, विकास की भट्टी में कब तक होम होंगी गरीब की जिंदगियां?

Landslide in Mine: Worker Body Recovered from Rubble After 22-Hour Struggle - Sikar News in Hindi

नीम का थाना (राजस्थान)। पत्थरों के सीने को चीरकर अपनों के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करने गया श्रमिक अब कभी घर नहीं लौटेगा। नीम का थाना इलाके की एक खदान में हुए भीषण भूस्खलन के बाद चले 22 घंटे के लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन का अंत बेहद दर्दनाक रहा। SDRF की टीम ने अथक प्रयास के बाद आखिरकार मलबे में दबे लापता श्रमिक के बेजान शरीर को बाहर निकाल लिया। गुरुवार रात जब खदान दरकी, तो चार जिंदगियां मलबे के नीचे दफन हो गईं। तीन खुशनसीब थे जिन्हें समय रहते निकाल लिया गया, लेकिन चौथी जिंदगी काल के गाल में समा गई। SDRF के जवान विनोद चौधरी के मुताबिक, सूचना मिलते ही टीम रात 2:00 बजे मौके पर पहुंच गई थी। रात के घने अंधेरे और भारी भरकम चट्टानों के बीच अपनों को तलाशती चीखें गूंज रही थीं। अगली सुबह जब 'लाइव सर्च' शुरू हुआ और चट्टानों को हटाया गया, तो उम्मीदें मलबे में तब्दील हो चुकी थीं—वहां सिर्फ एक बेजान लाश बची थी। हादसे या प्रशासनिक अनदेखी से हुई हत्याएं?
सुरक्षा मानकों की धज्जियां: राजस्थान के खनन क्षेत्रों में भूस्खलन (Landslide) की घटनाएं कोई नई नहीं हैं। सवाल यह है कि क्या इस खदान में सुरक्षा ऑडिट किया गया था? क्या खदान की दीवारों को सुरक्षित रखने के वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया गया था?
रात में माइनिंग का खेल: रात के अंधेरे में खदानों में काम कराना नियमों के मुताबिक कितना सही है? क्या ज्यादा मुनाफे के चक्कर में मजदूरों को जान जोखिम में डालने के लिए मजबूर किया जाता है?
मजदूरों की सस्ती जान: खनन से सरकार और ठेकेदारों की तिजोरियां तो भरती हैं, लेकिन हादसे के वक्त इन खदानों में आपातकालीन सुरक्षा उपकरण या प्राथमिक रेस्क्यू टीम क्यों नदारद रहती है? क्यों हर बार SDRF के पहुंचने का इंतजार करना पड़ता है?
"जिस खदान से कंक्रीट और पत्थर निकलते हैं, कल वहां से एक गरीब का जनाजा निकला। क्या यह हादसा है या चंद रुपयों के लालच में की गई व्यवस्था की लापरवाही?"
परिजनों का टूटता संसार
खदान के बाहर 22 घंटे तक टकटकी लगाए बैठे परिजनों की पथराई आंखें अब आंसुओं के समंदर में डूब चुकी हैं। घर का कमाऊ सदस्य चला गया। सरकार मुआवजे की घोषणा कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेगी, लेकिन सवाल यही है कि क्या कोई मुआवजा उस बूढ़ी मां की लाठी और मासूम बच्चों के सिर का साया वापस ला पाएगा? जब तक नियमों को ताक पर रखने वाले खदान मालिकों पर गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा नहीं चलेगा, तब तक गरीबों की मौत का यह सिलसिला थमेगा नहीं।

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Web Title-Landslide in Mine: Worker Body Recovered from Rubble After 22-Hour Struggle
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