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प्रतापगढ़ सड़क घोटाला : एसीबी ने PWD के 3 पूर्व अधिशाषी अभियंताओं और संवेदक को किया गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा जेल

Pratapgarh Road Scam: ACB arrests three former PWD Executive Engineers and a contractor - Kota News in Hindi

कोटा। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) मुख्यालय के निर्देश पर एसीबी कोटा इकाई ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 13 साल पुराने भ्रष्टाचार के मामले में सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के तीन पूर्व अधिशाषी अभियंताओं (एक्सियन) और एक ठेकेदार (संवेदक) को गिरफ्तार किया है। आरोपियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मामलों की विशेष अदालत (प्रतापगढ़) के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से न्यायालय ने सभी चारों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में भेजने के आदेश जारी किए हैं। ये आरोपी हुए गिरफ्तार :
सायरमल मीणा (निवासी सीकर) : तत्कालीन अधिशाषी अभियंता, गुणवत्ता नियंत्रण, खंड प्रतापगढ़।
एन.एल. परमार (निवासी बांसवाड़ा) : तत्कालीन अधिशाषी अभियंता, गुणवत्ता नियंत्रण खंड, बांसवाड़ा।
गिरधारी लाल वर्मा (निवासी चित्तौड़गढ़) : तत्कालीन अधिशाषी अभियंता, सा.नि.वि. द्वितीय पीपलखूंट, जिला प्रतापगढ़।
विनोद केडिया (निवासी जयपुर) : संवेदक एवं प्रोपराइटर, मेसर्स जय बाबा कंस्ट्रक्शन कंपनी।
घटिया निर्माण और बिना काम किए उठाए बिल: ₹11.78 लाख का घोटाला
एसीबी रेंज कोटा के प्रभारी एवं पुलिस उप महानिरीक्षक ओम प्रकाश मीणा ने बताया कि वर्ष 2013 में प्रतापगढ़ जिले में 'प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना' के तहत तीन संपर्क सड़कों का निर्माण किया गया था : लेवापाड़ा संपर्क सड़क, हीरापाड़ा संपर्क सड़क, जापा कॉलोनी संपर्क सड़क।
इन सड़कों के निर्माण में अत्यंत घटिया सामग्री का उपयोग किया गया था, जिसके कारण सड़कें बनते ही टूटने लगी थीं। इसके अलावा अधिकारियों और ठेकेदार ने मिलीभगत कर कार्य पूरा होने से पहले ही उसे कागजों में पूर्ण दिखा दिया और झूठे बिल पेश कर भुगतान उठा लिया। कुछ कार्य तो ऐसे थे जो धरातल पर हुए ही नहीं, लेकिन उनका भी भुगतान उठा लिया गया।
2013 में औचक निरीक्षण के बाद दर्ज हुआ था मुकदमा
इस घोटाले की शिकायत मिलने पर 19 जुलाई 2013 को एसीबी चौकी प्रतापगढ़ द्वारा सड़कों की विधिवत आकस्मिक चेकिंग (औचक निरीक्षण) की गई थी। इसके बाद 18 नवंबर 2013 को एसीबी में प्रकरण संख्या 503/2013 दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद हुई गिरफ्तारी
मामले के अनुसंधान अधिकारी एवं एसीबी कोटा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय स्वर्णकार द्वारा की गई गहन जांच में सामने आया कि तीनों अभियंताओं और ठेकेदार विनोद केडिया ने आपसी मिलीभगत कर राज्य सरकार को 11,78,752 रुपये की सीधी आर्थिक हानि पहुंचाई है। अपराध पूरी तरह प्रमाणित पाए जाने के बाद एसीबी मुख्यालय ने आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश करने का निर्णय लिया, जिसके बाद राज्य सरकार द्वारा तीनों अभियंताओं के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति (प्रॉसिक्यूशन सेंक्शन) जारी की गई।
अभियोजन स्वीकृति मिलते ही एसीबी ने कार्रवाई करते हुए 18 मई 2026 को चारों आरोपियों को नियमानुसार गिरफ्तार कर लिया और आज 19 मई को प्रतापगढ़ की विशेष अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

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Web Title-Pratapgarh Road Scam: ACB arrests three former PWD Executive Engineers and a contractor
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