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कड़े मुकाबले में फंसा है भाजपा का गढ़ हाड़ाैती, भाजपा को करानी पड़ी मोदी की सभाएं

BJPs stronghold Hadaiti is stuck in a tough contest, BJP had to organize Modi meetings. - Kota News in Hindi

कोटा। दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के हाड़ाैती अंचल काे मूल रूप से भाजपा का गढ़ माना जाता है। भाजपा में दिग्गज नेता दिवंगत दाऊदयाल जाेशी, रघुवीर सिंह काैशल, ललित किशाेर चतुर्वेदी, हरिकुमार औदिच्य, के के गाेयल के अलावा वसुंधरा राजे, ओम बिरला यहां से चुनाव जीतकर प्रदेश और देश की राजनीति में छाए हुए रहे हैं।
कांग्रेस में दिवंगत भुवनेश चतुर्वेदी, जुझार सिंह, रामकिशन वर्मा से लेकर माैजूदा मंत्री शांति धारीवाल, अशाेक चांदना, प्रमाेद जैन भाया ने सियासत की लंबी पारी खेली है। माैजूदा समय में हाड़ाैती में 17 सीटाें में से 10 भाजपा के पास और 7 कांग्रेस के पास हैं। इस चुनाव में अब राज्य में सरकार बनाने में दाेनाें प्रमुख दलाें के कितने प्रत्याशियाें का याेगदान रहता है, इसका फैसला 3 दिवसंबर काे हाेना है।
लेकिन, अभी भाजपा का गढ़ हाड़ौती कड़े मुकाबले में फंसा हुआ नजर आ हा है। इसीलिए भाजपा को यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभाएं करानी पड़ी हैं। वहीं चंबल रिवर फ्रंट पर हुए हादसे ने कांग्रेस के मंत्री शांति धारीवाल के खिलाफ भाजपा को घर बैठे मुद्दा दे दिया है। गुंजल पहले ही इस प्रोजेक्ट को लेकर धारीवाल पर हमलावर हैं। यहां धारीवाल के समर्थक भी धीरे-धीरे खिसक रहे हैं।
झालावाड़ जिले काे छाेड़ भी दिया जाए ताे भी 17 में से ज्यादातर विधानसभा सीटें कड़े मुकाबले में फंसी हुई हैं। झालावाड़ जिले काे पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधराराजे का परंपरागत वाेट बैंक माना जाता है। जहां से वे 5 बार सांसद और 3 बार विधायक के साथ दाे बार प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। झालरापाटन-झालावाड़ सीट से वसुंधराराजे फिर से भाजपा की प्रत्याशी हैं। वे यहां पर राेड शाे करके प्रदेश में भ्रमण कर रही हैं और पार्टी प्रत्याशियाें के समर्थन में सभाएं कर रही हैं।
खानपुर सीट पर भाजपा-कांग्रेस के बीच बराबर मुकाबला माना जा रहा है। मनाेहरथाना सीट पर त्रिकाेणीय संघर्ष जैसी स्थिति है। यहां कांग्रेस जिलाध्यक्ष रहे पूर्व विधायक कैलाश मीणा के निर्दलीय चुनाव लड़ने से ऐसे हालात हैं।
डग-भवानीमंडी में बराबर मुकाबला माना जा रहा है। बारां जिला वसुंधराराजे के पुत्र सांसद दुष्यंतसिंह का निर्वाचन क्षेत्र है, जहां वसुंधरा राजे अपना राेड शाे-सभा कर चुकी है। इस जिले में बारां-अटरू सुरक्षित सीट पर कांग्रेस-भाजपा में सीधा मुकाबला है।
छबड़ा-छीपाबड़ाैद सीट पर भाजपा के विधायक प्रतापसिंह सिंघवी- कांग्रेस के पूर्व विधायक करणसिंह के सामने कांग्रेस के बागी निर्दलीय नरेश मीणा और भाजपा के बागी उपेंद्र शर्मा खड़े हैं। दाेनाें कितने वाेट ले पाते हैं, इस पर भी नजरें टिकी है।
शाहाबाद-किशनगंज आदिवासी-सहरिया बहुल क्षेत्र है, जहां विधायक निर्मला सहरिया का मुकाबला पूर्व विधायक ललित मीणा से हाे रहा है। यह सीट कांग्रेस अपनी परंपरागत सीट मानती रही है। सबसे ज्यादा नजरें अंता-मांगराेल सीट पर टिकी हैं, जहां मंत्री प्रमाेद जैन भाया की प्रतिष्ठा दाव पर है। यहां वसुंधरा सभा कर चुकी। मंगलवार काे प्रधानमंत्री मोदी ने अंता में सभा की है।
बूंदी जिले में सबसे कम 3 विधानसभा सीटें हैं। बूंदी-तालेड़ा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के पूर्व वित्त राज्यमंत्री और वरिष्ठ नेता हरिमाेहन शर्मा का फिर से मुकाबला भाजपा के तीन बार के विधायक अशाेक डाेगरा से हाे रहा है। भाजपा के बागी रूपेश शर्मा यहां डाेगरा के लिए कांग्रेस से ज्यादा चुनाैती बने हुए हैं।
सुरक्षित सीट केशवरायपाटन में विधायक चंद्रकांता मेघवाल का मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी जिलाध्यक्ष सीएल प्रेमी से हाे रहा है। यहां कांग्रेस के बागी राकेश बाेयत निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। वे कांग्रेस काे नुकसान पहुंचा सकते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव से इस बार उलट स्थिति है। वर्ष 2018 के चुनाव में राकेश बाेयत कांग्रेस प्रत्याशी थे और सीएल प्रेमी का पार्टी ने ऐनवक्त पर टिकट काटकर बाेयत काे दे दिया था। प्रेमी निर्दलीय चुनाव लड़े थे। बाेयत पिछला हार का सबक सिखाने के उद्देश्य से मैदान में हैं।
माली और गुर्जर समाज बहुल हिंडाैली-नैनवां सीट पर खेल मंत्री अशाेक चांदना का मुकाबला पूर्व कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी से हाे रहा है। राहुल गांधी रविवार काे इस क्षेत्र में चुनावी सभा कर चुके हैं। सैनी पिछला चुनाव अंता में प्रमाेद भाया से हार चुके हैं।
काेटा जिले में काेटा उत्तर सबसे हाॅट सीट मानी जाती है, जहां मंत्री शांति धारीवाल काे पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल के सामने दूसरी बार चुनाैती मिली है। काेटा के दशहरा मैदान में मंगलवार दाेपहर काे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी काेटा-बूंदी जिले के 8 प्रत्याशियाें के समर्थन में सभा कर रहे है।
काेटा दक्षिण में महिला कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष राखी गाैतम का मुकाबला दाे बार के भाजपा विधायक संदीप शर्मा से हाे रहा है। ब्राह्मण बहुल मानी जाने वाली सीट पर दाेनाें ब्राह्मण एक-दूसरे काे टक्कर दे रहे हैं। यह सीट ओम बिरला काे 3 बार विधायक बना चुकी है।
लाडपुरा सीट पर भाजपा ने पूर्व राजपरिवार की सदस्या कल्पना देवी काे फिर से प्रत्याशी बनाया हैं, वहीं कांग्रेस ने 3 बार के हारे हुए नईमुद्दीन गुड्डू पर भराेसा जताया है। पूर्व भाजपा विधायक भवानीसंह राजावत भी यहां निर्दलीय मैदान में थे। लेकिन, भाजपा ने डैमेज कंट्रोल करते हुए देर रात उन्हें मना लिया। वे यहां की प्रत्याशी कल्पना देवी के समर्थन में बैठ गए हैं। उन्होंने कल्पना देवी को समर्थन देने की भी घोषणा की है।
पीपल्दा-इटावा में दोनों दलों के बीच सीधी टक्कर है। सांगोद में भरतसिंह के चुनाव लड़ने से इनकार के बाद कांग्रेस ने देहात जिलाध्यक्ष भानुप्रतापसिंह काे पहली बार प्रत्याशी बनाया है, जिन्हें पूर्व विधायक हीरालाल नागर चुनाैती दे रहे हैं। कुल मिलाकर हाड़ाैती की सभी सीटाें पर भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे का टक्कर देते नजर आ रहे हैं।

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