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आकृति लैंडकॉन : बिना OC-CC कब्जा देने को माना सेवा में दोष, खरीदार को ₹50,000 अतिरिक्त हर्जाना देने का आदेश

Akruti Landcon: Defect in service for handing over possession without OC-CC, ordered to pay additional damages of ₹50,000 to buyer - Kota News in Hindi

खास खबर। कोटा राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RAJ-RERA) के एडजुडिकेटिंग ऑफिसर ने बिल्डरों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर कब्जा देने की प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाया है। आर.एस. कुलहारी ने 'आकृति लैंडकॉन प्राइवेट लिमिटेड' को आदेश दिया है कि वह अपने कोटा स्थित प्रोजेक्ट 'श्रीनाथ ओएसिस' की महिला आवंटी को मानसिक संताप और कानूनी खर्च के मुआवजे के रूप में ₹50,000 की राशि का भुगतान करे। अथॉरिटी ने स्पष्ट किया कि बिना पूर्णता प्रमाण पत्र (CC) और अधिभोग प्रमाणपत्र (OC) के कब्जा देना न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि यह प्रमोटर की ओर से 'सेवा में गंभीर चूक' है। यह विवाद कोटा निवासी रंजना साहनी से जुड़ा है, जिन्होंने साल 2013 में इस प्रोजेक्ट में फ्लैट (B-101) बुक किया था। आवंटी ने समय-समय पर भुगतान किया, लेकिन प्रोजेक्ट की प्रगति और वैधानिक स्वीकृतियों को लेकर हमेशा संशय बना रहा। मुख्य रेरा अथॉरिटी ने पूर्व में इस मामले की सुनवाई करते हुए आवंटी द्वारा किए गए ₹1,61,601 के अतिरिक्त भुगतान को ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया था। हालांकि, बिना अनिवार्य प्रमाण पत्रों के कब्जा देने और आवंटी को हुई मानसिक परेशानी के बदले मुआवजे के लिए मामला एडजुडिकेटिंग ऑफिसर के समक्ष पहुँचा।
सुनवाई के दौरान एडजुडिकेटिंग ऑफिसर ने बिल्डर की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की। अथॉरिटी ने पाया कि प्रमोटर ने प्रोजेक्ट के लिए अनिवार्य पूर्णता प्रमाणपत्र (CC) और अधिभोग प्रमाणपत्र (OC) प्राप्त किए बिना ही आवंटी को कब्जा दे दिया। कोर्ट ने रेखांकित किया कि ये दस्तावेज केवल कागजी खानापूर्ति नहीं हैं, बल्कि यह सुनिश्चित करते हैं कि इमारत सुरक्षित और रहने योग्य है। प्रमोटर द्वारा इन वैधानिक जिम्मेदारियों की अनदेखी करना आवंटी के साथ विश्वासघात है।
अथॉरिटी ने आवंटी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए माना कि उन्हें अपने हक की लड़ाई के लिए मुख्य अथॉरिटी से लेकर ट्रिब्यूनल तक का दरवाजा खटखटाना पड़ा। कोर्ट ने राहत प्रदान की कि प्रमोटर की लापरवाही और आवंटी को हुई शारीरिक व मानसिक पीड़ा के एवज में ₹50,000 का एकमुश्त मुआवजा दिया जाए। बिल्डर को इस राशि का भुगतान आदेश जारी होने के 45 दिनों के भीतर करना होगा। यदि बिल्डर निर्धारित समय सीमा (45 दिन) के भीतर भुगतान करने में विफल रहता है, तो उसे हर्जाना राशि पर 6% वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।
यह फैसला उन सभी प्रमोटरों के लिए एक सबक है जो फ्लैट तैयार होने का दावा तो करते हैं, लेकिन सरकारी प्रमाणपत्र लेने में कोताही बरतते हैं। रेरा ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वैध हस्तांतरण तभी माना जाएगा जब प्रमोटर के पास सभी कानूनी स्वीकृतियां मौजूद हों। क्या आप इस आदेश के आधार पर अन्य आवंटियों द्वारा हर्जाना मांगे जाने की कानूनी प्रक्रिया के बारे में और जानकारी चाहते हैं?

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Web Title-Akruti Landcon: Defect in service for handing over possession without OC-CC, ordered to pay additional damages of ₹50,000 to buyer
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